पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX59005.270.88 %
  • NIFTY175620.95 %
  • GOLD(MCX 10 GM)463320.4 %
  • SILVER(MCX 1 KG)602350.53 %
  • Business News
  • Db original
  • Ipsita Dash And Vinita Dash, Noida based Saree Startup 6yardsandmore Works With Weavers In Remote Villages Across India And Sells Sarees, Accessories, And More

आज की पॉजिटिव खबर:5 साल पहले नोएडा की इप्सिता ने घर से ही हैंडीक्राफ्ट साड़ियों की मार्केटिंग शुरू की, अब सालाना 60 लाख रुपए है टर्नओवर

नई दिल्ली2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

भारत हमेशा से ट्रेडिशनल आर्ट वर्क का हब रहा है। हमारे यहां हर जगह की अपनी एक खासियत होती है। खासकर, पहनावे को लेकर। हमारे बुनकरों की हाथ की बनाई हुई साड़ी और कपड़ों की डिमांड विदेशों में भी होती है। कई लोग अलग-अलग राज्यों के खास ड्रेसेज का कलेक्शन रखते हैं, लेकिन दिक्कत इनकी अवेलबिलिटी को लेकर होती है। कई बार ढूंढने के बाद भी हमें अपनी पसंद के कपड़े नहीं मिल पाते हैं। अगर मिलते भी हैं तो उनकी क्वालिटी को लेकर मन में शक रहता है।

इस परेशानी को दूर करने के लिए नोएडा की रहने वाली दो बहनों ने 5 साल पहले एक स्टार्टअप की शुरुआत की। जिसके जरिए वे अलग-अलग राज्यों के स्थानीय बुनकरों की बनाई साड़ियां और ड्रेसेज अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से देशभर में सेल करती हैं। विदेशों में भी उनके प्रोडक्ट्स की अच्छी डिमांड है। इससे वे सालाना 60 लाख रुपए टर्नओवर हासिल कर रही हैं।

41 साल की इप्सिता और 44 साल की विनीता, दोनों ही इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं। दोनों ने 12 साल से ज्यादा वक्त तक कॉर्पोरेट जॉब की है।

कॉर्पोरेट जॉब से मन ऊब गया था, खुद का कुछ करना चाहती थी

41 साल की इप्सिता और 44 साल की विनीता, दोनों ही इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं। विनीता भी इस टीम में को-फाउंडर हैं।
41 साल की इप्सिता और 44 साल की विनीता, दोनों ही इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं। विनीता भी इस टीम में को-फाउंडर हैं।

इप्सिता बताती हैं कि लंबे समय तक कॉर्पोरेट जॉब करने के बाद मैंने तय किया कि अब खुद का कुछ शुरू किया जाए। इसके बाद 2012 में मैंने बेंगलुरु में एक बिजनेस शुरू किया। जिसमें हम लोग इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स को प्रैक्टिकल और प्रोफेशनल ट्रेनिंग देते थे, ताकि वे नौकरी के लिए फिट हो सकें। यह काम अच्छा चला। कई स्टूडेंट्स को इससे नौकरी भी मिली, लेकिन दो साल बाद मेरे पति की पोस्टिंग नोएडा हो गई। इसके बाद मैं भी उनके साथ नोएडा शिफ्ट हो गई।

इप्सिता कहती हैं कि नोएडा शिफ्ट होने के बाद मुझे अर्निंग के लिए कुछ न कुछ करना था। मैं कॉर्पोरेट सेक्टर में वापस नहीं जाना चाहती थी। इसलिए खुद का कुछ शुरू करना चाहती थी। चूंकि मुझे आर्ट में दिलचस्पी थी, साड़ियों से लगाव था। इसलिए अलग-अलग राज्यों के खास कलेक्शन अपने साथ रखती थी। मेरे दोस्त भी उन साड़ियों को पसंद करते थे। इसलिए तय किया कि कुछ ऐसा काम शुरू किया जाए, जिससे लोगों को एक ही प्लेटफॉर्म से पूरे भारत की स्पेशल साड़ियों का कलेक्शन मिल सके।

इप्सिता बताती हैं कि हमने 40 से ज्यादा बुनकरों के ग्रुप से टाइअप किया है। वे हमारे लिए प्रोडक्ट तैयार करते हैं।
इप्सिता बताती हैं कि हमने 40 से ज्यादा बुनकरों के ग्रुप से टाइअप किया है। वे हमारे लिए प्रोडक्ट तैयार करते हैं।

स्टार्टअप शुरू करने से पहले ग्राउंड वर्क किया

साल 2016 में इप्सिता भारत के कई शहरों में गईं। वहां के लोकल बुनकरों से मिलीं। उनके काम को देखा और साड़ियों की बनावट को समझा। इसके बाद कुछ सैम्पल वे अपने साथ लेकर नोएडा आ गईं। यहां कुछ दिनों तक उन्होंने खुद ही उनका इस्तेमाल किया। रिस्पॉन्स अच्छा मिला तो उसकी मार्केटिंग को लेकर प्लानिंग शुरू कर दी।

इप्सिता कहती हैं कि हमने शुरुआत अपने फ्रेंड्स और रिलेटिव्स के साथ की। उन्हें हमारा प्रोडक्ट पसंद आया तो उन्होंने इसे अपने जानने वालों के साथ शेयर किया। इस तरह एक से दो, दो से तीन करके कस्टमर्स का नेटवर्क बनता गया। हम सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक प्रोडक्ट भेजने लगे। कुछ एग्जीबिशन में भी हमने पार्टिसिपेट किया। इसके बाद विदेशों से भी हमें ऑर्डर मिलने लगे। उन्होंने अपनी कंपनी का नाम 6yardsandmore रखा है। बाद में उनकी बहन विनीता भी इससे जुड़ गईं।

वे कहती हैं कि हमारे पास कश्मीर से कन्याकुमारी तक की साड़ियों का कलेक्शन है। इसके अलावा सूट, दुपट्टे और हैंडमेड प्रोडक्ट भी शामिल हैं। ये सभी स्थानीय कारीगरों के हाथ से बने हैं। आमतौर पर एक अच्छी साड़ी की रेंज 2 हजार से लेकर 10 हजार रुपए तक रहती है। अगर कोई इससे भी महंगा कलेक्शन लेना चाहे तो हमारे पास 50 हजार रुपए तक की साड़ियां हैं।

इप्सिता बताती हैं कि हमारे पास कश्मीर से कन्याकुमारी तक की साड़ियों का कलेक्शन है।
इप्सिता बताती हैं कि हमारे पास कश्मीर से कन्याकुमारी तक की साड़ियों का कलेक्शन है।

कैसे करती हैं काम, क्या है बिजनेस मॉडल

इप्सिता और उनकी बहन विनीता मिलकर ये काम संभालती हैं। जरूरत पड़ती है तो वे कुछ इंटर्न हायर कर लेती हैं। इसिप्ता बताती हैं कि हम अपने पास अलग-अलग वैरायटी का कलेक्शन रखते हैं। इन्हें हम अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हैं। उसके बाद जिस प्रोडक्ट के लिए ऑर्डर मिलता है, उसे तैयार करने वाले कारीगर को हम बता देते हैं। वह हमें तैयार करके भेज देता है। फिर उसकी क्वालिटी टेस्टिंग के बाद हम उसे कस्टमर के पते पर भेज देते हैं। हम पहले से कोई प्रोडक्ट स्टोर करके नहीं रखना चाहते हैं।

इप्सिता ने देशभर में करीब 40 बुनकरों के ग्रुप से टाइअप किया। हर ग्रुप में 5 से 7 कारीगर हैं। कोई मिडिल मैन नहीं। वे उन कारीगरों से ड्रेसेज बनवाती हैं और उन्हें उस प्रोडक्ट के एवज में पेमेंट करती हैं। इससे उन्हें भी अच्छी कमाई हो जाती है। वे बताती हैं कि हर दिन हमें कोई न कोई ऑर्डर मिलता ही है। त्योहारों के दिनों में और दिसंबर के महीने में हमारी ज्यादा सेल होती है। तब हमारे पास बहुत ज्यादा ऑर्डर आने लगते हैं।

इप्सिता देश के कई शहरों और संस्थानों में हैंडलूम सेक्टर के संबंध में स्पीच दे चुकी हैं। फिलहाल वे IIM संबलपुर में हैंडलूम सेक्टर के लिए मेन्टॉर की भूमिका भी निभा रही हैं।

साड़ियों के साथ-साथ इप्सिता स्थानीय कारीगरों के बनाए बैग और पर्स की भी मार्केटिंग करती हैं।
साड़ियों के साथ-साथ इप्सिता स्थानीय कारीगरों के बनाए बैग और पर्स की भी मार्केटिंग करती हैं।

क्या आप भी इस तरह का स्टार्टअप प्लान कर रहे हैं?

भारत में ट्रेडिशनल आर्ट के फील्ड में भरपूर स्कोप है। बड़े शहरों में भी स्थानीय कारीगरों के बनाए प्रोडक्ट की खूब डिमांड है। सबसे पहले बुनकरों से मिलिए, उनके काम को समझिए। प्रोडक्ट की कीमत समझिए और यह भी पता करिए कि मार्केट में उस प्रोडक्ट की कीमत कितनी है। अगर आप वही प्रोडक्ट कस्टमर्स को कम कीमत में उपलब्ध कराते हैं तो लोग आपको बेहतर रिस्पॉन्स देंगे।

अगर आपका बजट कम है तो आप शुरुआत छोटे लेवल पर करिए। कुछ बुनकरों को अपने साथ जोड़िए, उनके बनाए प्रोडक्ट के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड करिए, अपने रिलेटिव्स को भेजिए। निश्चित रूप से आपको रिस्पॉन्स मिलेगा।

ऑर्डर मिलने के बाद आप उस बुनकर से प्रोडक्ट कलेक्ट करिए और अपने कस्टमर को भेजिए। आप चाहें तो गिफ्ट के रूप में भी अपने रिलेटिव्स और बड़े सेलिब्रेटी को भेज सकते हैं। इससे मुफ्त में आपकी ब्रांडिंग हो जाएगी। ऑर्डर और डिमांड बढ़ने के बाद आप अपना दायरा बढ़ाइए, दूसरे बुनकरों को भी साथ जोड़िए। सोशल मीडिया पर पेड ऐड रन कीजिए, लगातार पोस्ट करते रहिए।

इप्सिता दावा करती हैं कि हमारी सभी साड़ियां और प्रोडक्ट पूरी तरह से हैंडमेड है और लोकल कारीगरों के बनाए हैं।
इप्सिता दावा करती हैं कि हमारी सभी साड़ियां और प्रोडक्ट पूरी तरह से हैंडमेड है और लोकल कारीगरों के बनाए हैं।

अंत में आपके काम की ये 2 स्टोरीज भी पढ़िए...

  • दिल्ली में पली-बढ़ीं तीन बहनें तरु श्री, अक्षया और ध्वनि मिलकर एक स्टार्टअप चला रही हैं। 2017 में तीनों ने अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बांस से बने हैंडीक्राफ्ट का बिजनेस शुरू किया। इनके साथ 500 से ज्यादा कारीगर जुड़े हैं। भारत के साथ ही विदेशों में भी इनके प्रोडक्ट की डिमांड है। पिछले साल इनकी कंपनी का टर्नओवर 7 लाख रुपए था। (पढ़िए पूरी खबर)
  • लखनऊ की रहने वाली तरिषी जैन ने तीन साल पहले अपने घर से ही हैंडमेड किड्स वियर का नया बिजनेस शुरू किया। वे छोटे बच्चों के लिए हाथ से बुने स्वेटर और फैंसी ड्रेस की मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित देशभर में ऑनलाइन मार्केटिंग कर रही हैं। 250 से ज्यादा लोगों को उन्होंने रोजगार दिया है। इनमें ज्यादातर महिलाएं हैं। पिछले साल उनकी कंपनी का टर्नओवर 2 करोड़ रुपए से ज्यादा रहा। (पढ़िए पूरी खबर)
खबरें और भी हैं...