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पंजशीर के शेर क्यों हो रहे हैं ढेर:पहली बार तजाकिस्तान से कट गई कभी न हारने वाली पंजशीर घाटी, पुराने दोस्तों ने भी साथ छोड़ा; जानिए इस बार क्यों भारी पड़ रहा है तालिबान

एक वर्ष पहले
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अफगानिस्तान की “अजेय” पंजशीर घाटी का किला इस बार ढहता नजर आ रहा है। 15 अगस्त को काबुल पर काबिज होने से पहले ही तालिबान पंजशीर के शेर अहमद शाह मसूद की इस घाटी को चारों तरफ से घेर चुका था। इतिहास में पहली बार नॉर्दर्न अलायंस अपने उत्तर में तजाकिस्तान से कट गया। तालिबानी लड़ाके घाटी में दाखिल हो गए और कई सरकारी बिल्डिंग्स पर कब्जा कर लिया।

तालिबान ने पंजशीर पर पूरी जीत का दावा तो किया है, मगर पंजशीर में मौजूद नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट (NRF) का कहना है कि जंग अभी जारी है। उनके लोग पहाड़ों पर अपनी स्थिति को मजबूत बनाए हुए हैं।

दूसरी ओर सच यह भी है कि NRF के नेता अहमद मसूद ने अपनी एक फेसबुक पोस्ट में तालिबान के सामने शांति का प्रस्ताव रखा और तालिबान ने उसे खारिज कर दिया।

मसूद ने पोस्ट में लिखा कि NRF जंग रोकने को तैयार है अगर तालिबान अपने हमले रोक दे। खबरें यह भी हैं कि मसूद तजाकिस्तान चले गए हैं। दावों और उलट दावों के बीच इतना तो तय कि पंजशीर में NRF की स्थिति अच्छी नहीं।

ऐसे में सवाल यह है कि आखिर 1979 से 1989 के बीच सोवियत संघ जैसी महाशक्ति और 1995 से 2001 के बीच तालिबान को अपनी घाटी में कदम न रखने को मजबूर करने वाले पंजशीर वालों को इस बार क्या हो गया? ऐसे कौन से हालात हैं जिसने शेर-ए-पंजशीर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद को तालिबान के सामने शांति प्रस्ताव रखने को मजबूर दिया...

  1. तजाकिस्तान की सप्लाई लाइन पर तालिबान काबिज नब्बे के दशक में जब तालिबान पहली बार अफगानिस्तान के बड़े हिस्से पर काबिज हो गया था, तब भी नॉर्दर्न अलायंस तजाकिस्तान से पंजशीर घाटी के लिए सप्लाई लाइन यानी आपूर्ति को बरकरार रख पाया था। इस बार तालिबान ने पंजशीर के उत्तर के प्रांतों पर कब्जा कर लिया है। नतीजतन घाटी पूरी तरह तालिबान से घिर चुकी है। घाटी में मौजूद नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट (NRF) को खाने और ईंधन के अलावा हथियार और गोलाबारूद की सप्लाई नहीं हो पा रही है।
  2. राजधानी काबुल से आने वाली मुख्य सड़क भी ब्लॉक पिछले सप्ताह से तालिबान ने काबुल से पंजशीर जाने वाली सड़क को ब्लॉक कर रखा है। इसके चलते घाटी में जरूरी सामान की भारी कमी हो गई थी। लोगों के घरों में जो भी खाना था वह खत्म होने की कगार पर है। दुकानें खाली हो चुकी हैं। काबुल में फंसे पंजशीर के लोगों का कहना है कि घाटी में मेडिकल सप्लाई की कमी हो गई है।
  3. कपिला प्रांत के ऊंचे पहाड़ों वाला अकेला रास्ता बचा जर्मन विकास एजेंसी GIZ के सीनियर पॉलिसी एक्सपर्ट जलमई निशात का कहना है कि फिलहाल अगर किसी को पंजशीर जाना है तो उसे पड़ोसी कपिला प्रांत के पहाड़ों से होते हुए लंबा सफर तय करना होगा। यह रास्ता ऐसा नहीं कि किसी भी तरह सैन्य मदद पंजशीर घाटी तक पहुंचाई जा सके।
  4. पाकिस्तान गोलाबारूद के साथ दे रहा हवाई मदद इस बार पाकिस्तान तालिबान को हथियार और गोलाबारूद की आपूर्ति के साथ हवाई मदद भी कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तानी हवाई मदद तालिबान के पक्ष में गेम चेंजर साबित हुई है। पाकिस्तानी इंटेलिजेंस एजेंसी ISI के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद की अफगानिस्तान में मौजूदगी पंजशीर मामले में पाकिस्तानी सेना की भूमिका को साफतौर पर जाहिर कर रही है।
  5. अमेरिका समेत सभी देशों ने नॉर्दर्न अलायंस का साथ छोड़ा इस बार अमेरिका ने नॉर्दर्न अलायंस को पूरी तरह अकेला छोड़ दिया है। नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट (NRF) के नेता अहमद मसूद से पहले उनके पिता अहमद शाह मसूद की ईरान से लेकर अमेरिका तक कई देशों ने मदद की थी। इनमें हथियारों और सैनिक साजो-सामान के साथ बाकी जरूरी सप्लाई भी शामिल थी। वहीं बेटे अहमद मसूद के साथ ऐसा नहीं है। 1990 में केवल सऊदी अरब, पाकिस्तान और UAE ने अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता दी थी, वहीं इस बार चीन तालिबान को कूटनीतिज्ञ मान्यता देने वाला पहला देश बन चुका है। रूस भी तालिबान के साथ खड़ा है। ईरान और अमेरिका पहले ही तालिबान के साथ अलग-अलग समझौतों पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।
  6. सीनियर मसूद के मुकाबले जूनियर मसूद कमजोर लड़ाका जानकारों का कहना है कि नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट (NRF) के मौजूदा नेता अहमद मसूद लंदन के किंग्स कॉलेज के अलावा ब्रिटेन के सैंडहर्स्ट में रॉयल मिलिट्री कॉलेज से पढ़ने के बावजूद अपने पिता अहमद शाह मसूद की तरह गोरिल्ला युद्ध में माहिर नहीं। पिता के समय सोवियत संघ की लाल सेना और बाद में तालिबान कभी पंजशीर पर काबिज नहीं हो सके। माना जा रहा है कि घाटी में तालिबान के घुसने के बाद अहमद मसूद पड़ोसी देश तजाकिस्तान में चले गए हैं। (2001 में 9/11 के हमले से ठीक दो दिन पहले अल कायदा ने अहमद शाह मसूद की कैमरे में छिपे बम में ब्लास्ट करके हत्या कर दी थी। अल कायदा का आतंकी उनका इंटरव्यू लेने के नाम पर पत्रकार बनकर पहुंचा था। उनके कैमरे में बम छिपा था। मौका पाकर उन्होंने बम ब्लास्ट कर दिया। मसूद को हेलिकॉप्टर से पड़ोसी देश तजाकिस्तान में भारतीय सेना के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।)
  7. इंटरनेट-टेलीफोन लाइन्स कटीं, सही सूचना नहीं आ रही बाहर पंजशीर में नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट (NRF) घाटी से बाहर से किसी तरह की सूचना नहीं भेज पा रहे हैं, क्योंकि तालिबान ने पिछले हफ्ते से इंटरनेट और फोन कनेक्शन काट दिए हैं। मीडिया ब्लैकआउट के चलते तालिबान के साथ चल रही जंग को लेकर बाहर आ रही सूचनाएं एकतरफा हैं।

मसूद की अगुवाई वाले नेशनल रेसिसटेंस फ्रंट (NRF) की तैयारी पर भारी पड़ रहा तालिबान

पंजशीर में NRF के नेताओं ने तालिबान का आखिरी सांस तक विरोध करने की कसम खाई है। पंजशीर के लड़ाकों के पास हवाई हमलों का जवाब देने के लिए एंटी एयरक्राफ्ट गन भी हैं।
पंजशीर में NRF के नेताओं ने तालिबान का आखिरी सांस तक विरोध करने की कसम खाई है। पंजशीर के लड़ाकों के पास हवाई हमलों का जवाब देने के लिए एंटी एयरक्राफ्ट गन भी हैं।
पंजशीर में नेशनल रेसिसटेंस फ्रंट (NRF) के पास सोवियत हथियार हैं। दरअसल, यह पूरी घाटी पहले सोवियत सेना और बाद में तालिबान को जबरदस्त सैन्य टक्कर देने के लिए मशहूर है।
पंजशीर में नेशनल रेसिसटेंस फ्रंट (NRF) के पास सोवियत हथियार हैं। दरअसल, यह पूरी घाटी पहले सोवियत सेना और बाद में तालिबान को जबरदस्त सैन्य टक्कर देने के लिए मशहूर है।
तालिबान का सैनिक विरोध करने वालों पंजशीर में अमहद मसूद के लड़ाकों के अलावा तालिबान विरोधी स्थानीय सशस्त्र गुट (मिलिशिया) के साथ अफगानिस्तान के सरकारी सुरक्ष बल भी शामिल हैं।
तालिबान का सैनिक विरोध करने वालों पंजशीर में अमहद मसूद के लड़ाकों के अलावा तालिबान विरोधी स्थानीय सशस्त्र गुट (मिलिशिया) के साथ अफगानिस्तान के सरकारी सुरक्ष बल भी शामिल हैं।
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