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भास्कर इंटरव्यू:कोविड टास्क फोर्स के चीफ एनके अरोड़ा ने कहा- नए वैरिएंट के हिसाब से नई वैक्सीन बनानी पड़ सकती है

4 महीने पहलेलेखक: रवि यादव
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कोरोना की तीसरी लहर चल रही है। ओमिक्रॉन लगातार कहर बरपा रहा है। हर दिन 2 लाख से ज्यादा मरीज मिल रहे हैं। आने वाले वक्त में लोगों के व्यवहार और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा कि इसका पीक कब आएगा। जिन लोगों ने वैक्सीन के दोनों डोज ले लिए हैं, वे संक्रमित होने के बाद भी जल्दी ठीक हो रहे हैं। दूसरी तरफ, जिन्होंने वैक्सीन नहीं ली है या एक ही डोज लिया है, उन्हें गंभीर बीमारी हो रही है और वे अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं। ये बातें भास्कर से बातचीत के दौरान कोविड टास्क फोर्स के चीफ डॉ. एनके अरोड़ा ने कही। पढ़िए उनसे बातचीत के प्रमुख अंश...

सवाल: WHO का कहना है कि बूस्टर डोज काम नहीं कर रहा है, आपकी क्या राय है?

जवाब: यह बात ठीक है कि बूस्टर डोज लगाने के बाद भी ऑमिक्रॉन संक्रमण से बचा नहीं जा सकता है। ऐसा भारत समेत दूसरे देशों में भी हो रहा है। अब वैज्ञानिक और डॉक्टर्स कोरोना पर नीतिगत फैसले ले रहे हैं। उन्हें बूस्टर डोज लगाने के फैसले को नई नजर से देखना होगा कि इसकी कितनी जरूरत है और उससे कितना फायदा होगा।

हमें अब यह भी सोचना होगा कि हमें नए वैरिएंट के हिसाब से नई वैक्सीन बनाने की जरूरत है कि नहीं। यही बात WHO कहना चाह रहा है और हमारे देश में भी वैज्ञानिक और दवा निर्माताओं ने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है।

सवाल: तीसरी लहर के बारे में आपका क्या कहना है?

जवाब: तीसरी लहर उफान पर है, लेकिन अभी इसका पीक आना बाकी है। उसमें कितना समय लगेगा ये कहना मुश्किल है। आने वाले समय में केस बढ़ेंगे। कई कारणों से यह तय होगा कि इसकी गति कब तेज होगी और ये सब जनता पर निर्भर करता है कि वो व्यवहार कैसे बनाए रखते हैं। भीड़-भाड़ में आना-जाना और प्रशासनिक अधिकारियों के फैसले पर ये निर्भर करता है। जैसे नाइट कर्फ्यू लगाना या शनिवार रविवार को लॉकडाउन करना। अलग-अलग राज्य अपने- अपने तरीके से फैसले ले रहे हैं।

सवाल: क्या तीसरी लहर में भी हॉस्पिटल की उतनी ही जरूरत पड़ेगी?

जवाब: आज के समय 2.50 लाख के करीब मरीज रोजाना संक्रमित हो रहे हैं, जबकि 20 फीसदी ही बेड भरे हैं। हमें डेल्टा जितनी परेशानी नहीं है। इसका बड़ा कारण यह है कि ऑमिक्रॉन आम तौर पर हल्का बीमार करता है। पिछले एक महीने के अनुभव के अनुसार यह पता चला है कि नया वैरिएंट डेल्टा के मुकाबले कम घातक है। हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि डेल्टा भी साथ-साथ फैल रहा है।

यह बात ठीक है कि लोग अस्पतालों में दाखिल हो रहे हैं, लेकिन मृत्यु दर कम है। मरीजों की मौत उन मामलों में हो रही है, जिन्हें वैक्सीन नहीं मिली है या फिर एक ही डोज लगा है। ये वो लोग हैं जिनकी उम्र 60 साल से ज्यादा है और शरीर में पहले से कोई बीमारियां मौजूद हैं। इन सब बातों से लगता है कि हम ज्यादा घातक समय नहीं देखेंगे। हमारे पास बिस्तर और अस्पताल पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं, लेकिन हमें सावधान रहने की जरूरत है।

सवाल: आपको नहीं लगता कि नए वैरिएंट को लोग हल्के में ले रहे हैं?

जवाब: हमारी जांच में यह सामने आया है कि जो मरीज अब तक संक्रमित हो रहे हैं, उनमें डेल्टा और डेल्टा प्लस वायरस मौजूद हैं। लोग इसे हल्के में न लें। अभी मौजूदा समय की बात करें तो नए वैरिएंट के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। तीसरी लहर में नया वैरिएंट ही चल रहा है, लेकिन जो मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, उनमें डेल्टा होने की संभावना भी है।

सवाल: कोरोना समय के साथ नए- नए रूप में आ रहा है। क्या वैज्ञानिक और डॉक्टर इसे काबू कर सकेंगे?

जवाब: कोरोना ने पूरी तरह मानव जीवन को प्रभावित किया है और इसका अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ा है। पूरी दुनिया के वैज्ञानिक इसमें लगे हुए हैं। मेरी नजर से यह प्राकृतिक और मानवता के बीच युद्ध चल रहा है। हमें हर रोज नई सीख मिल रही है। उसमें हमारे वैज्ञानिक व आमजन इस पर काबू पा लेंगे।

सवाल: क्या चुनाव के कारण तीसरी लहर घातक होने की संभावना है।

जवाब: चुनाव आयोग ने जिस प्रकार से चुनावी रैलियों पर रोक लगाने का काम किया है वो बेहद ही अच्छा कदम है। जनता को भीड़ में जाने से बचना चाहिए। इसके साथ ही नेताओं को भी ज्यादा भीड़ इकट्ठा नहीं करनी चाहिए।

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