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करगिल के 22 साल, 22 कहानियां:किसी ने कहा था जब तक आखिरी दुश्मन जिंदा है मैं सांस लेता रहूंगा, किसी ने कहा था मेरे फर्ज की राह में मौत रोड़ा बनी तो उसे भी मार डालूंगा

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र
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करगिल की हजारों फीट ऊंची चोटियों पर दुश्मन और हमारी फौज नीचे। दोनों ओर गहरी खाई और एकदम सीधी चढ़ान। ऊपर से मौसम का कहर। माइनस में तापमान और हाड़ कंपा देने वाली ठंड। यानी सबकुछ दुश्मन के फेवर में। फिर भी हमारे जांबाज भूख प्यास की परवाह किए बिना सिर पर कफन बांधकर आगे बढ़ते रहे। कई शहीद हुए, कई जख्मी हुए, लेकिन अपने अटल इरादे से पीछे नहीं हटे। आखिरकार 26 जुलाई 1999 को करगिल पर वापस हिंदुस्तान की फौज ने तिरंगा लहराया। अब उस जीत के 22 साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर हम 22 इन्फोग्राफिक्स के जरिए 22 योद्धाओं की कहानी बता रहे हैं...

नोट: इस स्टोरी में कैप्टन विक्रम बत्रा की जन्मतिथि गलत लिख दी गई थी। ये गलती अब सुधार दी गई है।

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