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क्लासिक बाइक Yezdi की कहानी:मैसूर के राजा इसे भारत लाए, बुलेट-राजदूत को देती थी टक्कर; 25 साल बाद लॉन्च हो रहा नया मॉडल

5 महीने पहलेलेखक: अनुराग आनंद
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1981 में एक कॉमेडी फिल्म 'चश्मे बद्दूर' आई थी। इस फिल्म में रुस्तम शेख का एक डॉयलॉग था- 'काली घोड़ी द्वार खड़ी।' शेख ने ‘काली घोड़ी‘ इसी येज्दी बाइक को कहा था। इसके बाद से ही येज्दी को काली घोड़ी के नाम से जाना जाने लगा।

आज हम इस काली घोड़ी यानी येज्दी बाइक की बात क्यों कर रहे हैं? दरअसल, 1970 के दशक में युवाओं की पसंदीदा क्लासिक जावा बाइक येज्दी एक बार फिर से धमाल मचाने को तैयार है। 13 जनवरी 2022 को महिंद्रा की मदद से इसका नया मॉडल ‘येज्दी रोड किंग’ लॉन्च हो रहा है।

इस मौके पर हमने सोचा क्यों न आपको उस पुराने दौर की तरफ ले चलें। जब एक कहावत खूब प्रचलित थी- 'राजदूत फॉर वीक ब्वॉय, बुलेट फॉर माचो मेन, येज्दी फॉर एवरी मैन’। तो चलिए येज्दी की पूरी कहानी शुरू से शुरू करते हैं।

1929 में चेक रिपब्लिक में शुरू हुई जावा कब और कैसे भारत आई

येज्दी नाम की बाइक को जावा कंपनी ने बनाया था। जावा कंपनी को चेक रिपब्लिक के कारोबारी 'फ्रेंटी जेनसे की' ने साल 1929 में शुरू किया था। भारत में जावा कंपनी को लेकर आने वालों में दो नाम मुख्य थे। पहला मैसूर के राजा जयचामाराजेंद्र वाडियार और दूसरे पारसी बिजनेसमैन रुस्तम ईरानी।

मैसूर के राजा जयचामाराजेंद्र वाडियार जिन्होंने जावा बाइक कंपनी को शुरू करने में मुख्य भूमिका निभाई थी।
मैसूर के राजा जयचामाराजेंद्र वाडियार जिन्होंने जावा बाइक कंपनी को शुरू करने में मुख्य भूमिका निभाई थी।

1960 में भारत आई जावा कंपनी का 13 साल बाद 1973 में नाम बदलकर येज्दी हो गया। रुस्तम ईरानी ने 51 लाख रुपए से इसकी शुरुआत की थी। 1950 में कार, बाइक समेत कई गाड़ियों के विदेश से आयात पर सरकार ने रोक लगा दी थी। सरकार ने ऐसा देशी कंपनी को बढ़ावा देने के लिए किया था। इसी का फायदा उठाकर जावा कंपनी से करार कर उस कंपनी को लेकर ईरानी भारत आए।

मैसूर के राजा ने ‘जावा’ कंपनी को भारत लाने में निभाई मुख्य भूमिका

मैसूर के राजा जयचामाराजेंद्र वाडियार बाइक के शौकीन थे। उन्हें जावा की रेसिंग बाइक काफी पसंद थी। जयचामाराजेंद्र को लगता था कि भारत में उन्हीं की तरह ही इस बाइक को पसंद करने वाले लाखों लोग हैं। यही वजह है कि मैसूर में जावा कंपनी को उन्होंने 25 एकड़ जमीन मुहैया कराई थी। साल 1960 में मैसूर शहर में जब इस कंपनी की नींव पड़ी, तब वह खुद वहां मौजूद थे। एक साल बाद कंपनी की पहली बाइक 'जावा 250- टाइप 353' लॉन्च हुई। लॉन्च होने के बाद ही बाइक ने धमाल मचा दिया था।

1961 में जावा ने अपनी पहली बाइक ‘जावा 250 टाइप 353’ लॉन्च की थी। ये उसी बाइक की तस्वीर है।
1961 में जावा ने अपनी पहली बाइक ‘जावा 250 टाइप 353’ लॉन्च की थी। ये उसी बाइक की तस्वीर है।

1960-70 के दशक में गांव-गांव तक पहुंच गई येज्दी

1961 में जावा ने अपनी पहली बाइक ‘जावा 250 टाइप 353’ लॉन्च की। इस बाइक को लोगों ने खूब पसंद किया। इसके बाद ही कंपनी ने दो और मॉडल जावा 50, जावा 50 टाइप 555 भी लॉन्च किए। अपने इन तीन मॉडल की बाइक के जरिए जावा देश के गांव-गांव तक पहुंच गई। फिर जावा ने येज्दी नाम से पहली बाइक ‘येज्दी जेट 60’ लॉन्च की। अगले 3 दशक तक जावा की इन रेसिंग बाइक को कोई कंपनी टक्कर नहीं दे सकी थी। भारत में येज्दी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक इस बाइक के 18 से ज्यादा मॉडल बाजार में आ चुके हैं।

जावा कंपनी की ‘येज्दी जेट 60’ बाइक जिसे देखने के लिए कभी गांवों में भीड़ लग जाती थी।
जावा कंपनी की ‘येज्दी जेट 60’ बाइक जिसे देखने के लिए कभी गांवों में भीड़ लग जाती थी।

जावा का लाइसेंस रिन्यू नहीं कराकर रुस्तम बने येज्दी के मालिक

1973 की बात है। अब तक येज्दी कंपनी की बाइक को चेक रिपब्लिक की कंपनी जावा ही बना रही थी, लेकिन इसी साल जावा कंपनी का लाइसेंस परमिट खत्म हो गया। रुस्तम ईरानी ने लाइसेंस लेने के बजाय खुद ही कंपनी को आगे बढ़ाने का फैसला किया। भारत सरकार में येज्दी नाम से रुस्तम ने अपनी कंपनी रजिस्टर कराई। अपनी कंपनी बनाने के बाद ईरानी ने 250CC की पहली येज्दी बाइक लॉन्च की। इस बाइक को 60 से ज्यादा देशों में कंपनी ने बेचा। कंपनी ने अपना स्लोगन ‘फॉरएवर बाइक, फॉरएवर वैल्यू’ बनाया। येज्दी की रोडकिंग, क्लासिक, CLII, डिलक्स और मोनार्क मॉडल तो एक समय में युवाओं के लिए कल्ट बन गया था।

राजदूत, बुलेट के बीच येज्दी बाइक ने इस तरह बनाई अपनी जगह

येज्दी बाइक इस्तेमाल करने वाले 60 वर्षीय निशांत सिंह ने अपना अनुभव भास्कर के साथ साझा किया है। उन्होंने कहा, 'मुझे राजदूत पसंद नहीं है। यह बाइक गरीब दिखने वाले लड़के की लगती है। एक जमाने में राजदूत बाइक दूध खरीदने-बेचने वाले रखते थे।

1973 में जावा से अलग होने के बाद येज्दी कंपनी ने अपनी पहली अपडेटेड 250CC की येज्दी बाइक लॉन्च की।
1973 में जावा से अलग होने के बाद येज्दी कंपनी ने अपनी पहली अपडेटेड 250CC की येज्दी बाइक लॉन्च की।

वहीं, बुलेट काफी हैवी बाइक है। यह भारी-भरकम लोगों की गाड़ी है। जबकि येज्दी हैंडसम लोगों की गाड़ी है।' निशांत सिंह इकलौते नहीं हैं जो येज्दी के बारे में इस तरह से सोचते हैं। येज्दी के बारे में इस तरह की सोच देश के ज्यादातर लोगों की है। इंजन के स्तर पर भी देखें तो राजदूत में 175CC का इंजन होता है। बुलेट में 350CC का इंजन जबकि येज्दी में 250CC का इंजन होता है।

येज्दी कंपनी बंद होने की क्या थी वजह?

येज्दी कंपनी की आखिरी बाइक साल 1996 में बाजार में आई थी। इसी साल कंपनी बंद भी हो गई। इसके पीछे मुख्य तौर पर तीन वजहें थीं।

  • पहली वजह- 1990 के बाद बाजार में कई नई बाइक बाजार में आ गई। इसका सीधा असर येज्दी बाइक की बिक्री पर पड़ा। कम बाइक बिकने की वजह से येज्दी की कमाई घट गई।
  • दूसरी वजह- येज्दी ने प्रोडक्शन कम कर दिया और बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की।
  • तीसरी वजह- ज्यादा पॉल्यूशन छोड़ने की वजह से कई देशों में बैन होने के साथ बिक्री भी कम हो गई थी।