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खुद्दार कहानी:स्टार्टअप के लिए सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़ी; लॉकडाउन लगा तो एक साल खाली बैठना पड़ा; अब चाय बेचकर लाख रुपए महीने का बिजनेस कर रहे

छिंदवाड़ाएक महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र
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मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा के रहने वाले अंकित नागवंशी पिछले 8 महीने से चाय का स्टार्टअप चला रहे हैं और इससे अच्छी कमाई कर रहे हैं। - Money Bhaskar
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा के रहने वाले अंकित नागवंशी पिछले 8 महीने से चाय का स्टार्टअप चला रहे हैं और इससे अच्छी कमाई कर रहे हैं।

वैसे तो मैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं, कई बड़ी कंपनियों में काम कर चुका हूं। जहां पैसे तो मिलते थे लेकिन सुकून नहीं। हर महीने की एक तारीख का इंतजार और सैलरी मिलते ही चंद दिनों में सब पैसे खत्म। कई ख्वाहिशें दब कर रह जाती थीं। बिजनेस का प्लान कई बार बनाता था, लेकिन कुछ कारणों से उसे इंप्लिमेंट नहीं कर पाता था। आखिरकार 4 साल काम करने के बाद मैंने 9 से 5 की नौकरी को बाय-बाय बोल दिया और लौट आया मुंबई से अपने घर छिंदवाड़ा। चूंकि मैं चाय का हमेशा से शौकीन रहा हूं, लेकिन मुझे कभी मनपसंद चाय ऑफिस में मिली नहीं। इसलिए तय किया कि चाय को ही अपना बिजनेस बनाया जाए।

ये कहना है मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा के रहने वाले अंकित नागवंशी का। अंकित ने पिछले साल लॉकडाउन के बाद अगस्त में इंजीनियर चायवाला नाम से एक स्टार्टअप की शुरुआत की। आज उनके हजारों कस्टमर्स हैं। हर दिन तीन हजार रुपए से ज्यादा का वे बिजनेस कर रहे हैं। अभी अंकित हर रोज सुबह 7 बजे से शाम 8 बजे तक एक चौराहे पर अपने चाय का छोटा सा स्टॉल लगाते हैं। जिस पर लिखा है इंजीनियर चायवाला। सोशल मीडिया पर कई लोग उनके स्टॉल की फोटो शेयर कर चुके हैं। इसलिए उन्हें कभी कस्टमर्स बनाने के लिए कोई खास प्रयास नहीं करना पड़ा।

30 साल के अंकित कहते हैं कि चाय बनाना रॉकेट साइंस नहीं है, लेकिन इसके लिए आपका बिजनेस मॉडल मजबूत होना चाहिए।
30 साल के अंकित कहते हैं कि चाय बनाना रॉकेट साइंस नहीं है, लेकिन इसके लिए आपका बिजनेस मॉडल मजबूत होना चाहिए।

आसान नहीं रहा है अंकित का सफर
अंकित नागपुर से BCA कर रहे थे। उसी दौरान 2013 में उनके पिता का देहांत हो गया। मां पहले ही गुजर चुकी थीं। ग्रेजुएशन की पढ़ाई के बाद अंकित खुद का बिजनेस करना चाहते थे, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों ने उनका इरादा बदलने पर मजबूर कर दिया। वे नागपुर से वापस छिंदवाड़ा लौट आए। दो साल तक उन्हें परिवार की देखभाल के लिए घर पर ही रहना पड़ा। इसके बाद 2016 में जब सब कुछ ठीक हुआ तो वे नौकरी के लिए मुंबई चले गए।

नौकरी छोड़कर लौटे तो लॉकडाउन का शिकार हो गए
अंकित बताते हैं कि 2019 में जब नौकरी छोड़कर लौटा तो काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। परिवार के लोग नहीं चाहते थे कि मैं अच्छी खासी इंजीनियर की नौकरी छोड़कर और चाय बेचने का काम करूं। उन्हें लगता था कि चाय बेचना ठीक नहीं होगा। ऊपर से जैसे ही जॉब छोड़कर आया और कुछ नया करने का प्लान ही बना रहा था तभी लॉकडाउन लग गया। करीब एक साल तक मुझे खाली हाथ बैठना पड़ा। जो कुछ सेविंग्स थी वो भी धीरे-धीरे खत्म हो रही थी। जैसे तैसे करके पिछले साल अगस्त में जब काम शुरू किया तो लोग ठेला लगाने को लेकर विरोध करने लगे। कई बार विवाद भी हुआ, मुझे तीन से चार बार जगह बदलनी पड़ी।

अंकित की चाय 8 महीने में ही लोकप्रिय हो गई है। अभी हर दिन उनके पास 300 से ज्यादा ग्राहक आते हैं।
अंकित की चाय 8 महीने में ही लोकप्रिय हो गई है। अभी हर दिन उनके पास 300 से ज्यादा ग्राहक आते हैं।

बिजनेस शुरू करने के पहले रिसर्च किया
30 साल के अंकित कहते हैं कि चाय बनाना रॉकेट साइंस नहीं है, लेकिन इसके लिए आपका बिजनेस मॉडल मजबूत होना चाहिए। ताकि आपके पास अलग-अलग वैराइटी हो और लोगों को आपका टेस्ट पसंद भी आए। इसमें टेस्ट ही सबसे अहम फैक्टर होता है। एक बार कस्टमर्स को आपकी चाय का टेस्ट भा गया तो फिर वे बार-बार आपके पास आएंगे। इसलिए मैंने तय किया कि बिजनेस शुरू करने के पहले अलग-अलग शहरों के लोगों का टेस्ट जान लूं। फिर मैंने जयपुर, पुणे, नागपुर सहित कई शहरों का दौरा किया और वहां की चाय के बारे में जानकारी जुटाई। कई जगह स्टडी भी की कि किस तरह से चाय का मसाला रखा जाए ताकि हमारा टेस्ट यूनिक हो।

अभी चार तरह के प्रोडक्ट कर रहे हैं तैयार
अंकित अभी चार तरह के प्रोडक्ट तैयार कर रहे हैं। इसमें तीन तरह की चाय और एक कॉफी है। हर प्रोडक्ट की अलग-अलग खासियत है। कोरोना के चलते उन्होंने इम्युनिटी चाय शुरू की। इसमें अदरक, तुलसी, पुदीना जैसी चीजें मिली हैं। दूसरी चाय का नाम उन्होंने मसाला चाय रखा है। इसमें खड़े मसाले और जड़ी-बूटियां मिली हैं। तीसरी चाय ब्लैक टी है। जबकि कॉफी साउथ इंडियन बेस्ड फिल्टर वाली है।

अपने स्टॉल पर चाय तैयार करते हुए अंकित। वे अभी चार तरह के प्रोडक्ट तैयार कर रहे हैं। इसमें तीन तरह की चाय और एक कॉफी है।
अपने स्टॉल पर चाय तैयार करते हुए अंकित। वे अभी चार तरह के प्रोडक्ट तैयार कर रहे हैं। इसमें तीन तरह की चाय और एक कॉफी है।

अंकित के पास हर दिन 300 से ज्यादा ग्राहक आते हैं। एक कप चाय की कीमत उन्होंने 8 रुपए रखी है। जबकि कॉफी की कीमत 15 रुपए है। इसके साथ ही उन्होंने कुछ दिन पहले अपने मेन्यू में पोहा भी शामिल किया है। अंकित कहते हैं कि मैं हमेशा कस्टमर्स से फीडबैक लेते रहता हूं। ताकि उनकी जरूरत के मुताबिक बदलाव कर सकूं।

अंकित के इस स्टार्टअप को अब परिवार का काफी सपोर्ट मिल रहा है। उनकी बहन और परिवार के लोग इस काम में उनकी मदद करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने दो और लोगों को अपने काम पर रखा है। अंकित कहते हैं कि लॉकडाउन की वजह से मेरे बिजनेस में ब्रेक लग गया नहीं तो अब तक और अच्छी पोजिशन में होता। आगे हमारा टारगेट है कि जल्द से जल्द एक स्थाई ठिकाना बनाया जाए और फिर उसे रेस्टोरेंट के रूप में तब्दील किया जाए।

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