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बूस्टर डोज बिना आप कितने सुरक्षित:कोरोना से 90% तक प्रोटेक्शन दे रहा, फिर भी यह भारत में क्यों नहीं लगाया जा रहा?

नईदिल्ली4 महीने पहलेलेखक: अक्षय बाजपेयी
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UK में 63% आबादी को बूस्टर डोज लग चुका है। लेकिन भारत में अभी तक आम लोगों को बूस्टर डोज देने की परमिशन नहीं मिल पाई है। अभी सिर्फ फ्रंटलाइन वर्कर्स, हेल्थकेयर वर्कर्स और 60 साल से ऊपर के ऐसे बुजुर्गों को प्रिकॉशन डोज दिया जा रहा है, जिन्हें दूसरा डोज लिए 9 महीने पूरे हो चुके हैं। सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या बूस्टर डोज दिया जाना शुरू किया जाना चाहिए? हमने इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए भारत और UK के एक्सपर्ट्स से बात की। पढ़िए ये रिपोर्ट।

पहले एक्सपर्ट : डॉ. रजय नारायण, फाउंडर और डायरेक्टर, ग्लोबल हेल्थ अलायंस, UK

सरकार चाहे तो दो महीने में वैक्सीन प्रोडक्शन बढ़ाकर बूस्टर डोज सभी के लिए ओपन कर सकती है...
बूस्टर डोज को लेकर USA, UK में काफी एक्सटेंसिव रिसर्च हो चुका है, जिसमें साबित हुआ है कि बूस्टर डोज ओमिक्रॉन से 90% तक सुरक्षा देता है। बूस्टर लगने के बाद के बाद भी आप पूरी तरह कोरोना के खतरे से बाहर तो नहीं आएंगे, लेकिन आपको कोविड होने की रिस्क बहुत कम हो जाएगी। यदि कोविड हुआ भी तो बहुत माइल्ड होगा। मौत नहीं होगी। हॉस्पिटल में एडमिट होने की नौबत भी नहीं आएगी।

UK में 63% आबादी को बूस्टर डोज दिया जा चुका है। अभी यहां दो से ढाई लाख संक्रमण के केस रोज आ रहे हैं, लेकिन किसी को हॉस्पिटल नहीं जाना पड़ रहा। हमारी राय में 18 साल से ज्यादा उम्र वाले सभी लोगों के लिए भारत में भी बूस्टर डोज ओपन कर देना चाहिए।

इजरायल में तो अब चौथा डोज दिया जा रहा है। यह बात ठीक है कि आबादी के लिहाज से भारत और इजरायल की तुलना नहीं हो सकती, लेकिन सरकार बूस्टर डोज को सभी के लिए ओपन तो कर ही सकती है। कई बार वैक्सीन की कमी को कारण बताया जाता है, लेकिन मुझे लगता है कि सरकार चाहे तो एक से दो महीने में ही वैक्सीन प्रोडक्शन की कैपेसिटी बढ़ा सकती है।

भारत में सीरम इंस्टीट़्यूट वैक्सीन का बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन कर रहा है। सीरम से तो यूरोप के भी कई देश वैक्सीन ले रहे हैं। कुछ समय पहले कंपनी की तरफ से बयान आया था कि सरकार से डिमांड नहीं आ रही, इसलिए वैक्सीन प्रोडक्शन घटाना होगा। ऐसे में वैक्सीन की अवेबिलिटी न होने की बात सही नहीं है। सरकार को प्रायोरिटी ग्रुप के साथ ही सभी के लिए बूस्टर ओपन करना चाहिए, ताकि लोग कोरोना से ज्यादा से ज्यादा प्रोटेक्ट हो सकें।

दूसरे एक्सपर्ट : डॉ. चंद्रकांत लहारिया, देश के जाने-माने पब्लिक हेल्थ पॉलिसी एक्सपर्ट और महामारी विशेषज्ञ

MRNA वैक्सीन का बूस्टर डोज एंटीबॉडी को 24 गुना तक बढ़ाता है...
बूस्टर डोज देने वाले अधिकतर देश वायरस का ट्रांसमिशन रोकने पर फोकस कर रहे हैं, क्योंकि गंभीर बीमारी से बचने के लिए किसी भी वैक्सीन के दो डोज काफी हैं। दो डोज के बाद अधिकतर मामलों में हॉस्पिटल में एडमिट नहीं होना पड़ता और डेथ रेट काफी कम हो जाता है, जैसा हमें अभी भारत में देखने को मिल रहा है।

रही बात बूस्टर डोज की, तो भारत की स्थिति बाकी देशों से काफी अलग है। US में पिछले साल जनवरी में ही वैक्सीनेशन शुरू हो गया था। हमारे यहां मई-जून में शुरू हो पाया था। फिर वैक्सीन का दूसरा डोज लेने में तीन महीने का गैप भी था। दूसरा शॉट जुलाई, अगस्त में लग पाया था। इस लिहाज से लोगों को अभी फुली वैक्सीनेटेड हुए बहुत ज्यादा टाइम नहीं हुआ है।

बूस्टर डोज को लेकर कुछ स्टडी सामने आई हैं, जिनमें पता चलता है कि, MRNA वैक्सीन का बूस्टर एंटीबॉडी को 24 गुना तक बढ़ाता है। प्रोटीन बेस्ड वैक्सीन 8 गुना और जिस वैक्सीन का डोज पहले लिया है, उसका ही बूस्टर लेने पर 3 गुना तक एंटीबॉडी बढ़ती हैं, लेकिन MRNA वैक्सीन भारत में अवेलेबल नहीं है और जल्द आने की संभावना भी नहीं है।

ऐसे में हमें प्रोटीन वैक्सीन से ही बूस्टर डोज देना चाहिए, क्योंकि इसमें 8 गुना तक प्रोटेक्शन मिलता है। अभी जिस वैक्सीन के दो डोज लगे हैं, उसी का प्रिकॉशन डोज दिया जा रहा है।

हालांकि, भारत में बूस्टर को लेकर अभी तक पर्याप्त साइंटिफिक एविडेंस नहीं आए हैं। 60 साल से कम उम्र वालों को बूस्टर डोज देने का भी अभी तक कोई साइंटिफिक एविडेंस नहीं मिला है। इसलिए सभी लोगों को बूस्टर डोज देने की कोई जरूरत नहीं है।

अगले 60 दिनों में काफी बड़ी आबादी ओमिक्रॉन की चपेट में आएगी। ओमिक्रॉन होने के बाद बॉडी में एंटीबॉडी का लेवल 14 गुना तक बढ़ जाता है। मतलब ओमिक्रॉन होने के बाद वैसे ही अगले चार से छह महीने तक वैक्सीन की जरूरत नहीं है। इसलिए भी हमें बूस्टर डोज के लिए दो से तीन महीने और इंतजार करना चाहिए।

USA, UK में बूस्टर डोज दिया जा रहा है, क्योंकि वहां वैक्सीनेशन हमसे पहले शुरू हुआ था। वहां जो वैक्सीन लगाई गई है, वो अलग है। वहां की परिस्थितियां भी भारत से अलग हैं। हमें अपने देश के हिसाब से अभी और साइंटिफिक एविडेंस देखना है। फिर बूस्टर के लिए सही वैक्सीन का चुनाव करना है। इसके बाद पॉलिसी डिसीजन होना है। मुझे लगता है मिड फरवरी तक इस बारे में कोई डिसीजन लिया जा सकता है। डिफरेंट वैक्सीन का बूस्टर देना ही सही होगा।

किसी कंपनी को नहीं मिला DGCI से अप्रवूल
नीति आयोग के टॉप सोर्सेज के मुताबिक, केंद्र ने सभी कंपनियों को बूस्टर डोज के अध्ययन के लिए अलाउ कर दिया है। कंपनियों को अपनी स्टडी और डाटा ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के सामने पेश करना होगा। DGCI से परमिशन मिलने के बाद एक्सपर्ट्स का ग्रुप पड़ताल करेगा। इसके बाद ही अप्रवूल मिल सकेगा।

फरवरी के मध्य या मार्च तक कंपनियों को बूस्टर के लिए अप्रवूल मिल सकता है। हालांकि, देश में अभी बूस्टर डोज की जरूरत महसूस नहीं की जा रही, क्योंकि दो डोज के बाद ही एंटीबॉडी काफी डेवलप हो चुकी हैं। ओमिक्रॉन भी एंटीबॉडी बढ़ा रहा है।