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  • Captain Anuj Nayyar Was Engaged, Was To Be Married After 2 Months, Had Killed 9 Enemies Alone Before Being Martyred

करगिल के महावीर चक्र विजेता की कहानी:कैप्टन अनुज नैयर की सगाई हो गई थी, 2 महीने बाद शादी होनी थी; शहीद होने से पहले अकेले 9 दुश्मनों को ढेर कर दिया था

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र
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तारीख 6 जुलाई 1999, 17वीं जाट बटालियन को पॉइंट 4875 से दुश्मनों को खदेड़ने की जिम्मेदारी मिली। टीम की कमान 24 साल के कैप्टन अनुज नैयर के हाथों में थी। वे अपनी टीम को लेकर जंग के लिए निकल पड़े। दुश्मन हजारों फीट ऊंची चोटी पर कब्जा जमाए बैठे थे, वे वहां से सीधे अटैक कर रहे थे और आसानी से हमारी फौज को देख सकते थे। इसलिए दिन में चढ़ाई करना खतरे से खाली नहीं था।

शाम ढली तो अनुज की टीम ने चोटी पर चढ़ना शुरू किया। भूख-प्यास की परवाह किए बगैर वे आगे बढ़ते रहे। जब वे करीब पहुंचे, दुश्मनों ने फायर करना शुरू कर दिया। इधर से अनुज की टीम ने भी अटैक किया। दोनों तरफ से लगातार फायरिंग होती रही। दुश्मनों की संख्या भी अधिक थी और उनके पास पर्याप्त मात्रा में बड़े हथियार भी थे। अनुज के कई साथी शहीद हो गए, लेकिन वे जान हथेली पर रखकर आगे बढ़ते रहे। जख्मी होने के बाद भी उन्होंने एक के बाद एक 9 दुश्मनों को ढेर कर दिया। पाकिस्तान के तीन बड़े बंकर तबाह कर दिए।

करगिल युद्ध के दौरान ही अनुज नैयर को प्रमोट करके लेफ्टिनेंट से कैप्टन बनाया गया था।
करगिल युद्ध के दौरान ही अनुज नैयर को प्रमोट करके लेफ्टिनेंट से कैप्टन बनाया गया था।

रात ढल चुकी थी, सुबह के करीब 5 बजे का वक्त था। दुश्मन अब आसानी से हमारी फौज को देख सकते थे। सामने कई जवानों के शव पड़े थे। अनुज आगे बढ़े तो उनके एक साथी ने रोका कि अब उजाला हो गया है। दुश्मन हमें देख लेगा, लेकिन अनुज को अपने पिता की बात याद थी कि जंग में पीठ मत दिखाना। उन्होंने सिर पर कफन बांधा और पाकिस्तान के चौथे बंकर के ऊपर टूट पड़े। उन्होंने जैसे ही फायरिंग शुरू की, बम का एक गोला उनके ऊपर आकर गिरा और वे शहीद हो गए, लेकिन कैप्टन अनुज अपनी शहादत के साथ ही जीत की बुनियाद रख गए थे, उसी दिन कुछ ही घंटों बाद पॉइंट 4875 पर तिरंगा फहराने लगा। मरणोपरांत कैप्टन अनुज को महावीर चक्र सम्मान से नवाजा गया।

बचपन में अनुज की हिम्मत देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए थे
कैप्टन अनुज का जन्म 28 अगस्त 1975 को दिल्ली में हुआ। उनके पिता एसके नैयर प्रोफेसर थे जबकि मां मीना नैयर दिल्ली यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में काम करती थीं। अनुज की मां अपने बेटे को याद करते हुए कहती हैं कि अनुज बचपन से ही बहादुर था। डर नाम की चीज तो उसमें थी ही नहीं। स्कूल में भी वह लीड करता था। पढ़ाई के साथ स्पोर्ट्स में भी वह आगे रहता था। उसे शुरू से मिलिट्री और गन को लेकर दिलचस्पी रही थी। उसके दादा आर्मी में थे, उनसे वह काफी अटैच्ड था।

ये कैप्टन नैयर की NDA की ट्रेनिंग के दौरान की तस्वीर है। अपने पहले ही प्रयास में उनका NDA में सिलेक्शन हुआ था।
ये कैप्टन नैयर की NDA की ट्रेनिंग के दौरान की तस्वीर है। अपने पहले ही प्रयास में उनका NDA में सिलेक्शन हुआ था।

एक हादसे को याद करते हुए वे बताती हैं कि एक बार अनुज को चोट लग गई थी। घाव गंभीर था, उसके शरीर में 22 टांके लगे थे। तब अनुज ने एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लिए बिना ही ऑपरेशन करा लिया था। उसकी बहादुरी देखकर डॉक्टर भी अचंभित रह गए थे।

12वीं के बाद पहले ही अटेंप्ट में अनुज का NDA में सिलेक्शन हो गया। तब होटल मैनेजमेंट और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) में भी उनकी अच्छी रैंक आई थी, लेकिन उन्होंने आर्मी जॉइन की। साल 1993 में उनकी ट्रेनिंग शुरू हुई और 1997 में वे कमीशंड हुए। दो साल बाद यानी 1999 में करगिल की जंग छिड़ गई और अनुज को जंग के लिए बुलावा आ गया।

पिता ने कहा था- कुछ भी हो जाए दुश्मन को पीठ मत दिखाना

मीना नैयर कहती हैं कि हमें उसके जंग में शामिल होने की जानकारी नहीं थी। वह जब भी फोन करता था या खत लिखता था तो यही कहता था कि वह सेफ जोन में है। वहां कोई जंग नहीं हो रही है। हमें उसके एक दोस्त के जरिए पता चला था कि वह भी करगिल की जंग में शामिल है।

अनुज अपनी मां से जंग की बातें शेयर नहीं करते थे। हां, अपने पिता से वे जरूर जंग की बातें शेयर करते थे। तब उनके एक खत के जवाब में एसके नैयर ने कहा था कि बेटा जंग में हो, कुछ भी हो जाए कभी दुश्मन को अपनी पीठ नहीं दिखाना।

पॉइंट 4875 से दुश्मनों को खदेड़ने की जिम्मेदारी 24 साल के कैप्टन अनुज नैयर की टीम को मिली थी।
पॉइंट 4875 से दुश्मनों को खदेड़ने की जिम्मेदारी 24 साल के कैप्टन अनुज नैयर की टीम को मिली थी।

उस वाकये को याद करते हुए अनुज की मां कहती हैं कि पिता का ही वचन याद रहा होगा जो वह अपने साथी के कहने के बाद भी पीछे नहीं हटा और शहीद हो गया। एक मां के नाते कई बार मुझे लगता भी है कि अनुज तब आगे नहीं बढ़ा होता तो बच जाता, लेकिन यह भी सच है कि युद्ध में बहादुर पीछे नहीं हटते और उसमें तो बहादुरी कूट-कूट कर भरी थी। पीछे हटने का तो कोई सवाल ही नहीं था।

मैं यह देखना चाहता हूं कि सियाचिन ज्यादा ताकतवर है या मैं
अनुज की मां बताती हैं कि उसे सियाचिन बहुत पसंद था। काफी पहले से वहां जाने की उसकी तमन्ना थी। उसके बारे में इसे लेकर एक किस्सा भी है। एक बार एक रिपोर्टर ने कैप्टन अनुज से पूछा था कि वे आर्मी में क्यों भर्ती हुए हैं, तब अनुज ने कहा था कि मैं यह देखना चाहता हूं कि सियाचिन ज्यादा ताकतवर है या मैं।

शादी की तारीख भी तय हो गई थी
मीना नैयर बताती हैं कि अनुज अपने साथ पढ़ी एक लड़की को पसंद करता था। दोनों दस साल से एक-दूसरे को जानते थे। दोनों की सगाई हो गई थी और शादी की तारीख भी तय कर दी गई थी। 10 सितंबर 1999 को अनुज की शादी होनी थी, लेकिन वक्त को कुछ और ही मंजूर था।

7 जुलाई 1999 को कैप्टन अनुज नैयर शहीद हो गए, तब उनकी उम्र महज 24 साल थी।
7 जुलाई 1999 को कैप्टन अनुज नैयर शहीद हो गए, तब उनकी उम्र महज 24 साल थी।

युद्ध के दौरान अनुज ने अपनी सगाई की अंगूठी उतारकर अपने ऑफिसर को यह कहते हुए दे दी थी कि अगर वे जंग से जिंदा लौटते हैं तो वे अंगूठी वापस ले लेंगे, लेकिन अगर शहीद होते हैं तो उनकी मंगेतर तक यह अंगूठी पहुंचा दी जाए। वे नहीं चाहते कि उनके प्यार की निशानी दुश्मन के हाथ लगे। अनुज की शहादत के बाद उनके शव के साथ वह अंगूठी भी उनके घर पहुंची थी।

और अंत में अनुज की वह आखिरी चिट्ठी जो उन्होंने जंग पर जाने से ठीक पहले लिखी थी...

डियर डैड

आपका पिछला खत मिला, आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए। अभी तक कोई ऐसा माई का लाल नहीं मिला जो मुझसे जीत पाए। वो दिन कभी नहीं आएगा जब मुझे हार का स्वाद चखना पड़ेगा। डर नाम का कोई वर्ड उस डिक्शनरी में है ही नहीं जो आपने मुझे दी है। आप 200% सही थे, जमीनी हवा कुछ नहीं छुपाती। मैं अब हथियार चलाने में माहिर हो गया हूँ। यहां तक कि मैं अब बिना हथियार के भी किसी का मुकाबला कर सकता हूं। आप चिंता मत कीजिए। आपके बेटे को कभी कोई हालात हरा नहीं सकते। मुझे सिर्फ आपकी चिंता लगी रहती है। आप लोग अपना ध्यान रखें। आपकी अगली एनिवर्सरी हम साथ मनाएंगे।

कैप्टन अनुज नैयर की शहादत के बाद केंद्र सरकार की तरफ से उन्हें एक पेट्रोल पंप मिला है। उनकी मां अभी इसकी देखरेख करती हैं।
कैप्टन अनुज नैयर की शहादत के बाद केंद्र सरकार की तरफ से उन्हें एक पेट्रोल पंप मिला है। उनकी मां अभी इसकी देखरेख करती हैं।
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