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  • Bihar's Bandana Makes Furniture And Creative Art From Cardboard, Each Of Their Products Is Sold In Lakhs, There Is A Demand Abroad Too

आज की पॉजिटिव खबर:बिहार की बंदना कार्डबोर्ड से बनाती हैं फर्नीचर और खूबसूरत आइटम्स; लाखों में बिकते हैं एक-एक प्रोडक्ट, विदेशों में भी डिमांड

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र
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हम जब भी फ्रिज, टीवी या कोई सामान खरीदते हैं, तो वह कार्डबोर्ड में पैक होता है। पैकिंग खोलने के बाद हम लोग कार्डबोर्ड या तो फेंक देते हैं या इधर- उधर रख देते हैं। पर आपको यह जानकर थोड़ी हैरानी होगी कि जिस कार्डबोर्ड को हम लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं, उससे एक से बढ़कर एक चीजें बनाई जा सकती हैं। बिहार की बंदना जैन इसी कार्डबोर्ड से फर्नीचर और क्रिएटिव आर्ट के इतने खूबसूरत और शानदार आइटम्स बना रही हैं कि जिन्हें देखने के बाद आपको यकीन नहीं होगा कि इससे ऐसी भी कोई चीज बन सकती है। भारत के साथ-साथ विदेशों में भी उनके प्रोडक्ट्स की डिमांड है। उनके कई प्रोडक्ट्स लाखों में बिकते हैं।

बंदना कहती हैं कि मेरे लिए ये दुनिया कैनवास की तरह है। मैं अपने आसपास की चीजों को विजुअलाइज करती हूं। उनकी मेकिंग प्रोसेस को समझती हूं। फिर उस पर आर्ट वर्क शुरू करती हूं।

बंदना बिहार के ठाकुरगंज की रहने वाली हैं। वह एक मारवाड़ी फैमिली से ताल्लुक रखती हैं। उनके घर में लड़कियों को बाहर रहकर पढ़ाई करने की छूट नहीं थी, लेकिन उन्होंने जिद करके मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ आर्ट में दाखिला ले लिया। उनके मन में हमेशा से आर्ट को लेकर दिलचस्पी रही थी। इसलिए उन्होंने क्रिएटिव आर्ट में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की।

कैसे मिला कार्डबोर्ड से फर्नीचर और रियलिस्टिक आर्ट बनाने का आइडिया

बंदना बिहार के ठाकुरगंज की रहने वाली हैं। वह एक मारवाड़ी फैमिली से ताल्लुक रखती हैं।
बंदना बिहार के ठाकुरगंज की रहने वाली हैं। वह एक मारवाड़ी फैमिली से ताल्लुक रखती हैं।

वे बताती हैं कि ग्रेजुएशन के दौरान मुझे एक कार्डबोर्ड मिला। अचानक ही मेरी उस पर नजर पड़ गई। उसकी बनावट और स्ट्रेंथ को देखने के बाद मुझे लगा कि इससे कुछ रोचक और क्रिएटिव चीजें बनाई जा सकती हैं, लेकिन यह आइडिया बिल्कुल ही नया था। इसलिए मैंने बहुत ज्यादा फोकस नहीं किया। हालांकि इसको लेकर मैं लगातार रिसर्च करती रही।

साल 2012 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने मुंबई में एक घर ले लिया। नया घर था इसलिए उसमें स्पेस की कमी नहीं थी। मुझे लगा कि यही समय है अपने आइडिया को इम्प्लीमेंट करने का, अगर अब इस पर काम नहीं कर पाई तो शायद आगे न कभी न कर पाऊं। उसके बाद मैंने कुछ खास तरह के कार्डबोर्ड कलेक्ट किए। और तीन महीने की लगातार मेहनत के बाद एक फाइव सीटर सोफा तैयार किया।

बंदना बताती हैं कि जब सोफा तैयार हुआ, तब मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि ऐसा भी कुछ हो सकता है। वह मेरे लिए एक सरप्राइज मोमेंट था। मैं बार-बार उस पर बैठकर देखती थी कि यह कितना मजबूत और टिकाऊ है। तब मुझे रियलाइज हुआ कि यह लकड़ी के फर्नीचर से कहीं ज्यादा मजबूत है।

लोगों को पसंद आया तो शुरू किया बिजनेस

बंदना कहती हैं मैं अपने आसपास की चीजों को विजुअलाइज करती हूं। फिर उस पर आर्ट वर्क शुरू करती हूं।
बंदना कहती हैं मैं अपने आसपास की चीजों को विजुअलाइज करती हूं। फिर उस पर आर्ट वर्क शुरू करती हूं।

साल 2013 में बंदना ने घर से ही काम करना शुरू किया। वे लगातार रिसर्च और एक्सपेरिमेंट करती रही। उनके बनाए आर्ट वर्क को उनके रिलेटिव्स और फ्रेंड्स काफी पसंद कर रहे थे और इसे आगे बढ़ाने के लिए उनकी हिम्मत बढ़ा रहे थे। इसके बाद बंदना ने तय किया कि इस काम को प्रोफेशनल लेवल पर शुरू किया जाए।

लेकिन दिक्कत ये थी कि उनके आर्ट वर्क की कीमत क्या होगी और कौन उसे खरीदेगा, इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी। इसको लेकर लगातार स्टडी और मार्केट रिसर्च करती रही। करीब 5 साल बाद उन्हें इसको लेकर सफलता हाथ लगी। एक प्रदर्शनी में उनके आर्ट वर्क को काफी सराहा गया, उसकी अच्छी कीमत मिली। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे लगातार आगे बढ़ती रहीं।

उनका अपना नाम ही अब बन गया है ब्रांड

बंदना पहले सिल्वन स्टूडियो के जरिए अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करती थीं। बाद में उन्होंने खुद के नाम से ही अपने प्रोडक्ट की ब्रांडिंग शुरू कर दी। उन्होंने अपनी हेल्प के लिए दो और लोगों को काम पर रखा है। अगर डिमांड ज्यादा होती है तो वह और लोगों को भी हायर कर लेती हैं।

बंदना जैन अपने नाम से ही अपने प्रोडक्ट की ब्रांडिंग करती हैं। उनके कई प्रोडक्ट ऐसे होते हैं कि उन्हें देखकर यकीन नहीं होगा कि वे कार्डबोर्ड से बने हैं।
बंदना जैन अपने नाम से ही अपने प्रोडक्ट की ब्रांडिंग करती हैं। उनके कई प्रोडक्ट ऐसे होते हैं कि उन्हें देखकर यकीन नहीं होगा कि वे कार्डबोर्ड से बने हैं।

बंदना बताती हैं कि वह ब्रांड टू ब्रांड (B2B) और ब्रांड टू कस्टमर (B2C) दोनों ही लेवल पर मार्केटिंग करती हैं। कई बड़ी कंपनियों से उनका टाइअप है, जिसके लिए वह फर्नीचर और क्रिएटिव आर्ट तैयार करती हैं। उनके प्रोडक्ट की क्वालिटी और यूनीक लुक की वजह से डिमांड काफी ज्यादा होती है। कई बड़ी कंपनियों के लिए वे लग्जरी आइटम्स तैयार करती हैं। उनके एक-एक प्रोडक्ट की कीमत लाखों में होती है। उन्होंने कई प्रोडक्ट भारत के बाहर भी भेजे हैं।

बंदना कहती हैं कि बिजनेस के लिहाज से तो यह फील्ड ठीक है ही, लेकिन उससे भी बड़ी बात है कि यह आज की जरूरत है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस फील्ड में आना चाहिए, लोगों को ऐसे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि हम पर्यावरण को भी बचा सके।

कैसे तैयार करती हैं प्रोडक्ट्स, कहां से कलेक्ट करती हैं कार्डबोर्ड?

बंदना बताती हैं कि मैं अपने आर्ट वर्क के लिए खास तरह के कार्डबोर्ड का इस्तेमाल करती हूं। मैं खुद ही अपने सोर्सेज के पास जाकर कार्डबोर्ड कलेक्ट करती हूं। कई बड़े-बड़े होल सेल दुकानों से भी हमने टाइअप किया, जहां बड़ी संख्या में कार्डबोर्ड इकट्ठा होते हैं।

उनके प्रोडक्ट की क्वालिटी और यूनीक लुक की वजह से डिमांड काफी ज्यादा होती है। कई बड़ी कंपनियों के लिए वे लग्जरी आइट्मस तैयार करती हैं।
उनके प्रोडक्ट की क्वालिटी और यूनीक लुक की वजह से डिमांड काफी ज्यादा होती है। कई बड़ी कंपनियों के लिए वे लग्जरी आइट्मस तैयार करती हैं।

कलेक्शन के बाद हम उसकी क्वालिटी और साइज के हिसाब से अलग-अलग कैटेगरी में बांटते हैं। इसके बाद उसे शीट्स के रूप में काट लेते हैं। फिर अलग-अलग लेयर में उन्हें कंप्रेस और हीट करते हैं। इस तरह हमारा प्रोडक्ट बनता जाता है। कुछ प्रोडक्ट को बनाने के लिए हम मशीन और सॉफ्टवेयर की भी मदद लेते हैं।

अगर आप भी इस तरह का कोई स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं तो ये 2 स्टोरी आपके काम की है

  1. दिल्ली के रहने वाले सन्नी गोयल और खंडवा की रहने वाली उन्नति मित्तल ने ऐसी ही एक पहल शुरू की है। दोनों मिलकर प्लास्टिक वेस्ट से फर्नीचर और होम डेकोरेशन की चीजें तैयार कर रहे हैं। एक साल पहले ही उन्होंने यह स्टार्टअप शुरू किया था। अभी इससे वे हर महीने एक लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं। (पढ़िए पूरी खबर)
  2. दिल्ली की रहने वाली कनिका अब तक 360 टन से ज्यादा प्लास्टिक वेस्ट को रीसाइकिल्ड कर चुकी हैं। वे पर्स, बैग सहित कॉस्मेटिक से जुड़े दर्जनों प्रोडक्ट बना रही हैं। इससे सालाना 50 लाख उनकी कमाई हो रही है। (पूरी खबर पढ़िए)
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