पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX61350.260.63 %
  • NIFTY18268.40.79 %
  • GOLD(MCX 10 GM)479750.13 %
  • SILVER(MCX 1 KG)65231-0.33 %
  • Business News
  • Db original
  • Explainer
  • US FDA Denied Emergency Use Approval For Covaxin; What Next For Covaxin | WHO Approval Pending For Covaxin | Covaxin India Trial Data | Coronavirus (India) Vaccination Update | Covaxin Vs Covishield In India

भास्कर एक्सप्लेनर:कोवीशील्ड को भी तो नहीं मिला है अमेरिका में अप्रूवल, फिर कोवैक्सिन से जुड़े फैसले पर क्यों मचा है बवाल?

4 महीने पहलेलेखक: रवींद्र भजनी
  • कॉपी लिंक

अमेरिका ने कोवैक्सिन को इमरजेंसी यूज की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। कई देशों में कोवैक्सिन लगवाने वालों को वैक्सीनेट लोगों में नहीं गिना जा रहा। इन खबरों के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सिन खराब है? क्या वह हमें कोरोनावायरस से सुरक्षित रखने में कमजोर है? यह ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब वैक्सीन लगवाने से जुड़े फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।

आइए समझते हैं अमेरिकी रेगुलेटर का फैसला क्या है? उसने कोवैक्सिन को लेकर क्या कहा है…

कोवैक्सिन को अमेरिका में इमरजेंसी अप्रूवल क्यों नहीं मिला?

  • अमेरिका का कहना है कि उसके यहां पर्याप्त डोज लग चुके हैं। कुछ हद तक हर्ड इम्यूनिटी भी हासिल हो चुकी है। इस वजह से उसने अपनी पॉलिसी में बदलाव किया है। वैक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल देने के नियम कड़े कर दिए हैं।
  • यह जानना जरूरी है कि अमेरिका ने पिछले साल वैक्सीन के डेवलपमेंट के लिए ऑपरेशन वार्प स्पीड इनिशिएटिव के तहत 18 बिलियन डॉलर (1.30 लाख करोड़ रुपए) खर्च किए थे।
  • फाइजर और मॉडर्ना की mRNA वैक्सीन को इमरजेंसी यूज अप्रूवल दिया है। जॉनसन एंड जॉनसन की वायरल वेक्टर वैक्सीन भी वहां लग रही है। इन वैक्सीन को बनाने की प्रक्रिया में US FDA भी शामिल रहा है, जैसे कोवैक्सिन के डेवलपमेंट में भारत सरकार की संस्था इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने सक्रिय भूमिका निभाई है।

तो क्या इसका मतलब यह है कि कोवैक्सिन में कुछ गड़बड़ है?

  • बिल्कुल नहीं। US FDA ने भारत बायोटेक के अमेरिकी पार्टनर ऑक्युजेन को फुल अप्रूवल का आवेदन देने को कहा है। इसके लिए उसे अतिरिक्त जानकारी और डेटा की जरूरत होगी। क्लिनिकल ट्रायल्स भी करना पड़ सकता है, ताकि वैक्सीन के सेफ, इम्यून रेस्पॉन्स और स्वीकार्य इफेक्टिवनेस को वैरिफाई किया जा सके।
  • इसका मतलब सिर्फ इतना है कि अमेरिकी वैक्सीन मार्केट में कोवैक्सिन की एंट्री में वक्त लगेगा। इमरजेंसी अप्रूवल कुछ महीनों के डेटा पर मिल जाता है। पर फुल अप्रूवल में कुछ महीने या साल भी लग सकते हैं, क्योंकि उसे अर्जेंट नहीं समझा जाता। यानी भारत बायोटेक और ऑक्युजेन को अमेरिकी बाजार में कोवैक्सिन उपलब्ध कराने में वक्त लग सकता है।

क्या कोवीशील्ड को हम कोवैक्सिन से बेहतर मान सकते हैं?

  • ऐसा मानने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। दोनों ने अच्छे रिजल्ट दिए हैं। अगर बात अमेरिका की है तो कोवीशील्ड (एस्ट्राजेनेका की डेवलप की गई वैक्सीन) को भी वहां अप्रूवल नहीं मिला है। कोवीशील्ड के लिए भी अमेरिका में फुल अप्रूवल की कोशिशें चल रही हैं। यानी WHO के अप्रूवल को छोड़ दें तो अमेरिका के लिए कोवीशील्ड और कोवैक्सिन बराबर ही हैं।
  • जहां तक विदेश यात्रा पर जाने का सवाल है, भारत सरकार अन्य देशों से बात कर रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, ‘भारत बायोटेक ने WHO से कोवैक्सिन को इमरजेंसी इस्तेमाल की सूची में रखने का अनुरोध किया है। अगर किसी देश में कोई परेशानी है तो विदेश मंत्रालय उन देशों की सरकारों से बात कर रहा है।
  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल का कहना है कि जो देश कोवैक्सिन लगवाने वालों को वीजा से इंकार कर रहे हैं, उनसे बातचीत चल रही है। WHO कोवैक्सिन को आपात इस्तेमाल की सूची में रख दे तो यह हर देश के लिए मान्य हो सकती है। सरकार WHO से बातचीत कर रही है।

क्या अमेरिका के फैसले का भारत के वैक्सीनेशन प्रोग्राम पर कोई असर पड़ेगा?

  • नहीं। डॉ. पॉल का कहना है कि सभी रेगुलेटर के फैसले लेने की प्रक्रिया होती है। हम अमेरिकी रेगुलेटर के फैसले का सम्मान करते हैं। पर उसके फैसले का हमारे टीकाकरण अभियान पर कोई असर नहीं होगा। हमारे रेगुलेटर के पास इसके सेफ होने के संबंध में पर्याप्त डेटा है।

क्या अमेरिका में कोवैक्सिन को फुल अप्रूवल मिल सकता है?

  • मुश्किल है, पर नामुमकिन नहीं। अब तक किसी भी भारतीय वैक्सीन निर्माता को अमेरिका में फुल अप्रूवल नहीं मिला है। इसी वजह से भारत बायोटेक ने अमेरिकी कंपनी ऑक्युजेन के साथ डील की है। अमेरिका के साथ-साथ कनाडा में कोवैक्सिन पर होने वाला 45% प्रॉफिट ऑक्युजेन का होगा।
  • ऑक्युजेन का कहना है कि वह अब अमेरिका में कोवैक्सिन के लिए अब इमरजेंसी अप्रूवल नहीं मांगेगी। बल्कि बायोलॉजिक्स लाइसेंस एप्लीकेशन (BLA) हासिल करेगी। जरूरत पड़ी तो अमेरिका में ट्रायल्स भी करेंगे। पर यह छोटे ग्रुप पर ब्रिजिंग ट्रायल्स होंगे या बड़े ग्रुप पर स्टडी होगी, यह साफ नहीं है।
  • ऑक्युजेन के चेयरमैन और CEO शंकर मुसुनुरी ने कहा कि कोवैक्सिन डेल्टा वैरिएंट समेत अन्य स्ट्रेन पर कारगर है। ऐसे में आगे चलकर अमेरिका को कोवैक्सिन जैसी मजबूत वैक्सीन की जरूरत पड़ने वाली है।

अमेरिका के फैसले का विदेश यात्रा पर जाने वालों पर क्या असर होगा?

  • कुछ खास नहीं। अगर आप अमेरिका या कहीं जा रहे हैं तो आपको वहां के नियम पढ़ने होंगे। अमेरिकी पॉलिसी कहती है कि अगर आपकी RT-PCR रिपोर्ट निगेटिव है तो आप फ्लाइट पकड़ सकते हैं। आपने कोवैक्सिन लगवाई है तो भी आपको वैक्सीनेट नहीं माना जाएगा। आपको वहां उपलब्ध वैक्सीन भी लगवानी होगी। इसका कोई नुकसान नहीं है।
  • अभी अमेरिका में कोवैक्सिन के फुल अप्रूवल का रास्ता बंद नहीं हुआ है। वहीं, भारत बायोटेक के आवेदन पर WHO जुलाई और सितंबर के बीच इमरजेंसी यूज अप्रूवल जारी कर सकता है। उम्मीद कर सकते हैं WHO के अप्रूवल के बाद अमेरिका समेत अन्य देशों में कोवैक्सिन लगवाने वालों को भी वैक्सीनेटेड लोगों में गिना जाएगा।

कोवैक्सिन को लेकर अन्य देशों में क्या स्थिति है?

  • अब तक 14 देश कोवैक्सिन को अप्रूवल दे चुके हैं। 50 अन्य देशों और WHO के पास इमरजेंसी यूज अप्रूवल का आवेदन पेंडिंग है। इन पर भी एक-दो महीने में फैसला होने की उम्मीद कर सकते हैं।
  • ब्राजील में जरूर हेल्थ रेगुलेटर ANVISA ने कोवैक्सिन का आवेदन ठुकरा दिया था। मार्च में हुए इंस्पेक्शन में ब्राजील के अधिकारियों को भारत बायोटेक की हैदराबाद की फेसिलिटी में क्वालिटी को लेकर कुछ खामी नजर आई थी। पर इन मुद्दों को सुलझा लिया गया है। ANVISA ने 4 जून को कोवैक्सिन को सीमित मात्रा में इम्पोर्ट करने की इजाजत दे दी है। ANVISA का कहना है कि भारत बायोटेक के एक्शन प्लान से वे संतुष्ट हैं। कंपनी ने क्वालिटी से जुड़े मुद्दों पर आवश्यक सुधार किया है।

कोवैक्सिन के ट्रायल्स की क्या स्थिति है? कब आएगा उसका डेटा?

  • भारत में कोवैक्सिन के फेज 3 के क्लिनिकल ट्रायल्स में 26 हजार वॉलंटियर शामिल थे। जनवरी में जब कोवैक्सिन को बिना डेटा के अप्रूवल दिया था, तब जरूर आपत्ति उठी थी। विशेषज्ञों ने जल्दबाजी में लिए निर्णय पर सवाल भी उठाए थे।
  • भारत बायोटेक का दावा है कि फेज-3 ट्रायल्स के दूसरे अंतरिम नतीजों में वैक्सीन 78% इफेक्टिव साबित हुई है। हालांकि, अब तक 25 हजार वॉलंटियर्स पर किए गए ट्रायल्स के वास्तविक नतीजे सामने नहीं आए हैं। नीति आयोग के सदस्य (हेल्थ) डॉ. वीके पॉल के मुताबिक अगले एक-दो हफ्ते में कोवैक्सिन के अंतिम आंकड़े भी जारी कर दिए जाएंगे। यह डेटा इमरजेंसी अप्रूवल के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से शेयर किए डेटा से अलग होगा।

क्या कोवैक्सिन को लेकर कुछ भी डेटा नहीं है?

  • नहीं, ऐसा नहीं है। कोवैक्सिन को लेकर एक साल में अंतरराष्ट्रीय स्तर के 5 रिसर्च जर्नल्स में नौ स्टडी प्रकाशित हो चुकी हैं। भारत बायोटेक का दावा है कि उसकी वैक्सीन ने डेटा ट्रांसपेरैंसी का खास ध्यान रखा है। यह पहला और इकलौता ऐसा स्वदेशी प्रोडक्ट है, जिसने भारत में ट्रायल्स के अपने डेटा को प्रकाशित किया है।
  • कंपनी ने शनिवार को दावा किया कि कोवैक्सिन के प्री क्लिनिकल ट्रायल्स के नतीजे इंटरनेशनल जर्नल्स सेलप्रेस और नेचर कम्युनिकेशंस में छपे। फिर कोवैक्सिन के फेज-1 और फेज-2 क्लिनिकल ट्रायल्स के नतीजे द लैंसेट- इन्फेक्शियस डिजीज में छपे। वैरिएंट्स के खिलाफ कोवैक्सिन के प्रभावी होने की पुष्टि क्लिनिकल इन्फेक्शियस डिजीज, bioRxiv और जर्नल ऑफ ट्रैवल मैगजीन में छपी स्टडी में की गई है।
खबरें और भी हैं...