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भास्कर एक्सप्लेनर:कोहली के कप्तानी छोड़ने की वजह सिर्फ वर्कलोड? भारत में कितना सफल होगा कैप्टेंसी का यूनिवर्सल फॉर्मूला, जानिए सब कुछ

2 महीने पहलेलेखक: जयदेव सिंह
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टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने गुरुवार को एक ट्वीट करके टी-20 वर्ल्ड कप के बाद टी-20 टीम की कप्तानी छोड़ने का ऐलान कर दिया। कोहली ने कहा कि उन्होंने अपना वर्कलोड कम करने के लिए ऐसा किया। कोहली के लिमिटेड ओवर से कप्तानी छोड़ने के कयास लंबे समय से लग रहे थे। मई में ही पूर्व चयनकर्ता किरण मोरे ने संकेत दिए थे कि इंग्लैंड दौरे के बाद कोहली लिमिटेड ओवर की कप्तानी रोहित शर्मा को दे सकते हैं।

विराट ने कप्तानी छोड़ने का ऐलान ट्विटर पर एक लेटर शेयर करके दिया। तीन दिन पहले ही मीडिया में विराट के टी-20 टीम की कप्तानी छोड़ने की खबरें आई थीं। उस वक्त BCCI ने इस तरह की खबरों का खंडन किया था, लेकिन गुरुवार को विराट ने इन खबरों को सही साबित कर दिया।

आखिर विराट ने कप्तानी छोड़ने वाले अपने लेटर में क्या लिखा? विराट के कप्तानी छोड़ने की वजह क्या है? देश में कब-कब अलग-अलग फॉर्मेट में अलग कप्तान रहे हैं? दुनिया के किन देशों में इस वक्त अलग-अलग फॉर्मेट के अलग कप्तान हैं? जहां स्प्लिट कैप्टेन्सी का चलन, वहां ये तरीका कितना सफल है, आइए जानते हैं…

विराट ने अपने लेटर में क्या कहा?

कोहली ने वर्क लोड को अपने फैसले की वजह बताई है। कोहली ने अपने लेटर में कहा कि मेरी समझ से वर्क लोड बेहद अहम होता है। मैं पिछले 8-9 साल से तीनों फॉर्मेट में खेल रहा हूं और 5-6 साल से लगातार कप्तानी भी कर रहा हूं। मैं महसूस कर रहा हूं कि टेस्ट और वनडे में टीम इंडिया की कप्तानी के लिए खुद को पूरी तरह से तैयार करने के लिए मुझे थोड़ा सा स्पेस चाहिए। टी-20 के कप्तान के तौर पर मैंने टीम को अपना सब कुछ दिया। आगे भी एक बल्लेबाज के तौर पर मैं टी-20 टीम में अपना योगदान जारी रखूंगा।

कप्तानी छोड़ने की बड़ी वजहें क्या हैं?

जो कोहली ने बताया: कोहली ने अपने लेटर में साफ किया कि वो वर्कलोड कम करना चाहते हैं। कोहली सिर्फ टी-20 कप्तानी छोड़ रहे हैं, लेकिन बल्लेबाज के रूप में खेलते रहेंगे। वैसे भी कोहली जब से तीनों फॉर्मेट के कप्तान बने हैं, तब से अब तक टीम इंडिया ने 67 टी-20 मैच खेले हैं। इनमें से सिर्फ 45 में ही कोहली टीम का हिस्सा रहे हैं। यानी, 33% मैचों में कोहली को आराम दिया गया। कप्तानी छोड़ने के बाद शायद ये आंकड़ा और बढ़े।

जो कोहली ने नहीं बताया: कोहली लिमिटेड ओवर में टीम को कोई बड़ा खिताब नहीं दिला सके हैं। वहीं, दूसरी ओर उप-कप्तान रोहित शर्मा का मुंबई इंडियन्स और टीम इंडिया के कार्यवाहक कप्तान के रूप में रिकॉर्ड शानदार रहा है। 2020 में रोहित ने जब मुंबई इंडियन्स को 5वीं बार चैम्पियन बनाया तब से कई एक्सपर्ट्स रोहित को लिमिटेड ओवर की कप्तानी देने की मांग करने लगे। ICC की वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल में भारत के हारने के बाद एक बार फिर से इस तरह की मांग उठने लगी है। पिछले दो साल से कोहली का बल्लेबाज के रूप में प्रदर्शन खराब रहा है। उनके ऊपर कप्तानी का दबाव दिख रहा है। 2016 से 2018 के बीच कोहली करियर के सबसे बेहतरीन फॉर्म में थे। इस दौरान ज्यादातर उन्होंने सिर्फ टेस्ट मैचों की कप्तानी की थी। वनडे और टी-20 में वो धोनी की कप्तानी में खेल रहे थे।

भारत में कब-कब रहे अलग-अलग फॉर्मेट में अलग-अलग कैप्टन रहे?

देश में पहली बार अलग-अलग फॉर्मेट में अलग कप्तान बनाने का चलन 2007 के T-20 वर्ल्ड कप से ही शुरू हुआ। दरअसल 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप से कप्तान राहुल द्रविड़ समेत सभी सीनियर खिलाड़ियों ने किनारा कर लिया। धोनी कप्तान बनाए गए और वर्ल्ड कप भी जीत गए। जीत के बाद देश लौटते ही धोनी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज के लिए भी कप्तान बना दिए गए। उम्मीद थी की धोनी को अब टेस्ट टीम की कप्तानी की भी जिम्मेदारी दे दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। BCCI ने राहुल द्रविड़ की जगह अनिल कुंबले को टेस्ट टीम का नया कप्तान बना दिया। कुंबले ने 10 टेस्ट में टीम की कप्तानी की। ये पहला मौका था जब जब वनडे और टी-20 का कप्तान अलग और टेस्ट का कप्तान अलग था। हालांकि, इस दौर में कुंबले सिर्फ टेस्ट खेलते थे। धोनी तीनों फॉर्मेट में खेल रहे थे। टेस्ट में वो उप-कप्तान की भूमिका में थे। कुंबले के संन्यास के बाद नवंबर 2008 में धोनी तीनो फॉर्मेट में टीम इंडिया का कप्तान बन गए।

सात साल बाद एक बार फिर देश में दो कैप्टन का दौर आया। साल 2014 दिंसबर के महीने की बात है। टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थी। धोनी ने बीच सीरीज में कप्तानी छोड़ने के साथ ही टेस्ट से संन्यास का ऐलान कर दिया। कोहली टेस्ट टीम के कप्तान बनाए गए। वहीं, वनडे और टी-20 की कप्तानी धोनी करते रहे। जनवरी 2017 में धोनी ने वनडे और टी-20 की भी कप्तानी छोड़ दी। हालांकि, वो इन दोनों फॉर्मेट में खेलते रहे। इसके बाद से विराट तीनों फॉर्मेट में टीम के कप्तान हैं।

सात साल बाद एक बार फिर टीम इंडिया को अलग-अलग फॉर्मेट में अलग-अलग कप्तान मिलेगा। इस बार टेस्ट और वनडे में एक कप्तान होगा तो टी-20 में अलग। टीम के उप-कप्तान रोहित शर्मा इस रेस में सबसे आगे हैं।

स्प्लिट कैप्टन्सी पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

इसी साल मई में पूर्व विकेटकीपर और चीफ सिलेक्टर किरण मोरे ने टेस्ट और लिमिटेड ओवर में अलग-अलग कप्तान बनाए जाने की वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि मुझे विश्वास है कि रोहित शर्मा को जल्द मौका मिलेगा। मोरे ने कहा था कि स्प्लिट कप्तानी भारत में काम कर सकती है। 2020 IPL में मुंबई इंडियन्स की जीत के बाद पूर्व ओपनर गौतम गंभीर ने भी लिमिटेड ओवर क्रिकेट में रोहित शर्मा को कप्तान बनाने की वकालत की थी। पूर्व चयनकर्ता मदन लाल ने भी इसकी स्प्लिट कैप्टंसी को एक अच्छा आइडिया बताया था।

वहीं, पूर्व कप्तान कपिल देव इस तरह के प्रयोग के खिलाफ थे। कपिल ने नवंबर 2020 में कहा था कि एक कंपनी के दो CEO नहीं हो सकते हैं। उन्होंने कहा था कि हमारे कल्चर में ऐसा नहीं हो सकता है। इसकी वजह बताते हुए कपिल ने कहा था कि तीनों फॉर्मेट में हमारी 70 से 80% टीम एक जैसी है। ऐसे में टीम के लोग अलग-अलग कप्तानी की थ्योरी और सोच को पसंद नहीं करेंगे।

दुनिया के किन देशों में इस वक्त अलग-अलग फॉर्मेट में अलग-अलग कप्तान हैं?

ICC के 12 फुलटाइम मेंबर हैं। यानी, वो देश जो टेस्ट, टी-20, वनडे तीनों फॉर्मेंट में खेलते हैं। इनमें से 7 देशों में इस वक्त अलग-अलग फॉर्मेंट में अलग कप्तान का चलन है। जिन तीन देशों में तीनों फॉर्मेट के एक ही कप्तान हैं, उनमें भारत, न्यूजीलैंड और पाकिस्तान शामिल हैं। वहीं, आयरलैंड और जिम्बाब्वे के लिए आखिरी बार टेस्ट में कप्तानी करने वाले विलियम पोर्टरफील्ड और बैंडन टेलर क्रिकेट के संन्यास ले चुके हैं।

इन देशों में कितने सफल रहे हैं ये प्रयोग?

मौजूदा वनडे वर्ल्ड चैम्पियन इंग्लैंड और टी-20 चैंपियन वेस्टइंडीज में अलग-अलग फॉर्मेट में अलग कप्तानों का चलन है। 2018 में बॉल टेम्परिंग स्कैंडल के बाद ऑस्ट्रेलिया में भी वनडे टी-20 की कप्तानी एरॉन फिंच कर रहे हैं तो टेस्ट में टिम पेन टीम के कप्तान हैं। साउथ अफ्रीका में टेस्ट और वनडे, टी-20 के कप्तान अलग हैं।

पाकिस्तान में इस वक्त तीनों फॉर्मेंट में बाबर आजम कप्तान हैं, लेकिन छह महीने पहले तक वहां भी अलग-अलग फॉर्मेट के कप्तान अलग थे। बांग्लादेश में तो इस वक्त तीनों फॉर्मेट में तीन अलग कप्तान हैं।

कुछ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि स्प्लिट कैप्टेन्सी का कल्चर सफल होना या नहीं होना टीम कल्चर पर निर्भर करता है। वहीं, ज्यादातर एक्सपर्ट्स मौजूदा दौर में हो रहे क्रिकेट की जरूरत बताते हैं। इस दौर की दो-तीन सबसे सफल टीमें भारत, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड हैं। इनमें से दो टीमों के तीनों फॉर्मेट में एक ही कप्तान है। हालांकि, न्यूजीलैंड अपने कप्तान केन विलियम्सन के आराम देने के लिए अक्सर टॉम लाथम और टिम साउदी को लिमिटेड ओवर क्रिकेट की कई सीरीज में कप्तानी की जिम्मेदारी सौंपता रहता है।

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