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भास्कर एक्सप्लेनर:सिद्धू जीते अमरिंदर हारे, अब आगे क्या? मुख्यमंत्री सिद्धू बनेंगे या कोई और? अमरिंदर क्या करेंगे?

2 महीने पहलेलेखक: रवींद्र भजनी
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के साथ राज्य कांग्रेस में आया भूचाल जरूर शांत होता दिख रहा है, पर पिक्चर अभी बाकी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को चुनौती देने वाले नवजोत सिंह सिद्धू को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलेगी या नहीं?

इससे पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने राज्य में विधानसभा चुनावों से छह महीने पहले कैप्टन के खिलाफ बगावत का नेतृत्व किया। कांग्रेस के 40 विधायकों ने कांग्रेस हाईकमान को पत्र लिखकर अमरिंदर को हटाने की मांग की थी। पंजाब के प्रभारी हरीश रावत ने कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। शुक्रवार रात को ही रावत ने शनिवार शाम को पंजाब कांग्रेस भवन में विधायक दल की बैठक बुला ली।

इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठ रहे हैं कि सिद्धू और अमरिंदर में आखिर विवाद क्या था? अमरिंदर के लिए आगे क्या रास्ते हैं?

पंजाब कांग्रेस में आखिर हो क्या रहा है?

  • यह महत्वाकांक्षा की लड़ाई है। सिद्धू एक पापुलर चेहरा हैं और वे मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं। वहीं, कैप्टन अमरिंदर सिंह उन्हें यह मौका देने को तैयार नहीं थे। इसी वजह से यह विवाद इतना बढ़ गया। पंजाब में अमरिंदर के विरोधी भी सेलिब्रिटी चेहरे के तौर पर सिद्धू के साथ खड़े दिख रहे हैं।
  • सिद्धू का आरोप है कि कैप्टन अकाली दल (बादल) के नेताओं के खिलाफ नरमी दिखा रहे हैं। 2017 के चुनावों से पहले तो उन्होंने 2015 के गुरु ग्रंथ साहिब के साथ बेअदबी के मामले में आरोपियों को जेल में डालने का वादा किया था, पर कैप्टन इसमें नाकाम रहे। इसी तरह रोजगार और नशाखोरी रोकने में भी कैप्टन पर सिद्धू के तीखे आरोप हैं।
  • इस दौरान कैप्टन के विरोधी विधायक और मंत्री भी सिद्धू के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। इसमें कैप्टन के खिलाफ बगावत का झंडा उठाने वाले सुखजिंदर रंधावा और राजिंदर सिंह बाजवा जैसे मंत्री ऐसे हैं, जो कभी कैप्टन के खास थे। सिद्धू ने विरोध में बिगुल फूंका तो यह दोनों भी सक्रिय हो गए। इस तरह कैप्टन की सभी निगेटिव फोर्सेस ने साथ में काम किया।
  • शनिवार को विधायक दल की बैठक में पार्टी के बड़े नेता विधायकों से रायशुमारी करेंगे। एक रिपोर्ट बनाएंगे और दिल्ली में सोनिया गांधी को सौंपेंगे। उसके आधार पर ही तय होगा कि कैप्टन की जगह कौन मुख्यमंत्री बनेगा?
सिद्धू और अमरिंदर सिंह भले ही सार्वजनिक मंचों पर साथ दिखाई दिए हों, उनके बीच विवाद काफी पुराना है।
सिद्धू और अमरिंदर सिंह भले ही सार्वजनिक मंचों पर साथ दिखाई दिए हों, उनके बीच विवाद काफी पुराना है।

सिद्धू और कैप्टन के बीच विवाद क्या है?

  • पंजाब के पॉलिटिकल एनालिस्ट कहते हैं कि दोनों के बीच वैचारिक मतभेद हैं। दोनों एक-दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते। दोनों के ही रिश्ते तल्ख रहे हैं। सिद्धू 2004 से 2014 तक अमृतसर से सांसद रहे। इस दौरान 2002-2007 तक अमरिंदर के मुख्यमंत्री के कार्यकाल के सिद्धू कटु आलोचक रहे थे।
  • 2014 के चुनावों में भाजपा ने सिद्धू के बजाय अमृतसर से अरुण जेटली को मैदान में उतारा था और कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें हराकर भाजपा से यह सीट जीत ली थी। 2014 के चुनावों में टिकट न मिलने से सिद्धू भाजपा से नाराज थे और खबरें चल रही थी कि वे आम आदमी पार्टी या कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।
  • 15 जनवरी 2017 को तमाम नानुकूर के बीच सिद्धू ने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ली थी। उनकी इंट्री राहुल गांधी के मार्फत हुई थी, इस वजह से वह कहते रहे कि मेरा कैप्टन तो राहुल गांधी है। अमरिंदर सिंह नहीं। यह बात अलग है कि तीन महीने पहले ही उनकी पत्नी नवजोत कौर कैप्टन के मार्फत कांग्रेस की सदस्य बन चुकी थी।
  • 2017 के चुनावों में 117 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस ने 77 सीटें जीती थी और इस तरह भारी बहुमत के साथ कैप्टन सीएम बने। तब चर्चा चल रही थी कि सिद्धू को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। ऐसा हुआ नहीं। इसके बजाय सिद्धू को नगरीय निकाय विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
  • इसके बाद भी दोनों के बीच की तल्खी दूर नहीं हुई। कभी टीवी शो में जज की भूमिका को लेकर तो कभी विभागीय फैसलों को लेकर सिद्धू मुख्यमंत्री के निशाने पर ही रहे। तब कैप्टन ने सिद्धू का विभाग बदल दिया। उन्हें बिजली महकमा दे दिया, जो सिद्धू ने स्वीकार नहीं किया और घर बैठ गए।
  • वे शांत ही बैठे थे। पर कुछ ही समय पहले उन्होंने बेअदबी मामले को लेकर ट्वीट करना शुरू किए। बादलों को बचाने के आरोप कैप्टन पर लगाए। जब उन्हें कैप्टन विरोधियों का साथ मिला तो वे सक्रिय हो गए। हाइकमान ने हस्तक्षेप करते हुए सुनील जाखड़ को हटाकर सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाया।
राहुल गांधी के जरिए ही नवजोत सिंह सिद्धू की कांग्रेस में एंट्री हुई थी। इस वजह से सिद्धू कहते रहे हैं कि मेरा कैप्टन तो सिर्फ राहुल गांधी है।
राहुल गांधी के जरिए ही नवजोत सिंह सिद्धू की कांग्रेस में एंट्री हुई थी। इस वजह से सिद्धू कहते रहे हैं कि मेरा कैप्टन तो सिर्फ राहुल गांधी है।

किसके साथ कितने विधायक हैं?

  • पंजाब प्रदेश अध्यक्ष बनते ही सिद्धू ने विधायकों की मीटिंग बुलाई। दावा किया कि 70 विधायक उनके साथ हैं। कैप्टन को हटाने की मुहिम शुरू की। उधर, कैप्टन भी सक्रिय हुए। महलों में रहने वाले कैप्टन ने फार्म हाउस और अन्य जगहों पर विधायकों से मिलना शुरू किया। उनके खिलाफ मुखर हो रहे एक मंत्री के दामाद को दो दिन पहले कैबिनेट मीटिंग में फैसला कर सरकारी नौकरी दी गई है। यानी हरसंभव कोशिश है कि विधायक उनके साथ बने रहे।
  • दैनिक भास्कर के लुधियाना संपादक नरेंद्र शर्मा का कहना है कि कई विधायक ऐसे हैं जो दोनों की बैठकों में जा रहे थे। ऐसे में नंबर पर कयास लगाना ठीक नहीं हैं। हाईकमान सक्रिय हुआ तो कई विधायक ऐसे हैं जो पांच-छह महीने के लिए विधायकी छोड़ने का रिस्क नहीं उठाना चाहेंगे।
  • 2017 के चुनावों में 117 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस के 77, आम आदमी पार्टी के 20, अकाली दल के 15 और भाजपा के 3 विधायक जीतकर आए थे। ऐसे में अगर पार्टी टूटी तो आप और अकाली दल के विधायकों का रुख महत्वपूर्ण हो जाएगा।
तस्वीर 22 जुलाई की है। पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद सिद्धू ने विधायकों की बैठक बुलाई और उनके साथ ही अमृतसर में गुरुद्वारा साहिब के दर्शन करने पहुंचे थे।
तस्वीर 22 जुलाई की है। पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद सिद्धू ने विधायकों की बैठक बुलाई और उनके साथ ही अमृतसर में गुरुद्वारा साहिब के दर्शन करने पहुंचे थे।

हटने के बाद अमरिंदर की क्या रणनीति रहेगी?

  • कैप्टन ने इस्तीफे संभावना को देखते हुए अपनी जमावट पर काम शुरू कर दिया है। 2017 की बात करें तो पार्टी में कैप्टन को मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट बनने को लेकर कशमकश जारी थी। तब कैप्टन ने जाट महासभा खड़ी की थी। उसके बड़े-बड़े सम्मेलन लेकर पार्टी हाइकमान तक संदेश पहुंचाया था कि अगर मुख्यमंत्री नहीं बनाया तो वे पार्टी छोड़ देंगे। मुख्यमंत्री बनने के बाद जाट महासभा भी शांत हो गई थी।
  • मौजूदा संकट की बात करें अमरिंदर ने दो-तीन महीने पहले ही जाट महासभा को फिर एक्टिव कर दिया है। पदाधिकारी अपॉइंट किए जा रहे हैं। कैप्टन ने साफ किया है कि वह पार्टी नहीं छोड़ रहे, पर 6 महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में वे नए पत्ते फेंक सकते हैं।
  • अमरिंदर की आम आदमी पार्टी या अकाली दल के साथ जाने की संभावना न के बराबर है। ऐसे में एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि कैप्टन भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से अपने अच्छे रिश्तों को आगे बढ़ाए। किसान कानूनों को लेकर केंद्र सरकार को बड़ा फैसला लेने को राजी करें और भाजपा के साथ मिलकर 2022 के चुनावों में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर दावा करें।

क्या सिद्धू मुख्यमंत्री बन जाएंगे?

  • कहना मुश्किल है। बागी ग्रुप अगर कैप्टन को इस्तीफे के लिए दबाव बनाने में कामयाब भी हुआ तो संकट बना रहेगा। सुनील जाखड़, प्रताप सिंह बाजवा, सुखविंदर रंधावा, राजिंदर कौर भट्ठल से लेकर कई नेता ऐसे हैं, जो मुख्यमंत्री पद की दावेदारी कर सकते हैं।
  • यह बात जरूर है कि अगर सिद्धू की अगुवाई वाले बागी ग्रुप ने कैप्टन को मजबूर किया तो इससे पूर्व क्रिकेटर की राज्य में ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। 2022 के चुनावों में उनका वजन भी बढ़ेगा और उम्मीदवारों के सिलेक्शन में उनकी चलेगी।
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