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भास्कर एक्सप्लेनर:ओमिक्रॉन हुआ तो 24 घंटे में बन जाओगे कोरोना फैलाने वाले जॉम्बी, डेल्टा में लगते थे 2-4 दिन; जानिए कैसे बचें?

4 महीने पहलेलेखक: अभिषेक पाण्डेय
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ओमिक्रॉन की वजह से दुनिया को कोरोना की नई लहर का सामना करना पड़ रहा है। ओमिक्रॉन भारत समेत 100 से ज्यादा देशों में फैल चुका है। दुनिया पर कहर ढा चुके डेल्टा वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन कई गुना तेजी से फैलता है।

एक स्टडी के मुताबिक, ओमिक्रॉन से संक्रमित व्यक्ति पिछले वैरिएंट्स की तुलना में जल्दी कोरोना स्प्रेडर बन जाता है। यानी ओमिक्रॉन संक्रमित व्यक्ति को दूसरे लोगों में कोरोना फैलाने वाला बनने में काफी कम वक्त लगता है। या यूं कहें कि ओमिक्रॉन इन्फेक्टेड व्यक्ति 24 घंटे के अंदर ही वायरस फैलाने वाला जॉम्बी बन जाता है।

चलिए जानते हैं कि आखिर ओमिक्रॉन से कोई व्यक्ति कितनी जल्दी बन जाता है कोरोना फैलाने वाला? पिछले वैरिएंट्स की तुलना में ओमिक्रॉन से स्प्रेडर बनने की रफ्तार तेज क्यों है?

ओमिक्रॉन इन्फेक्टेड व्यक्ति में जल्दी दिखते हैं लक्षण
अमेरिकी फेडरेल हेल्थ एजेंसी डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक, कोई भी कोरोना संक्रमित व्यक्ति लक्षण प्रकट होने से कुछ दिन पहले और लक्षण खत्म होने के कुछ दिन बाद तक सबसे ज्यादा संक्रामक यानी दूसरों में कोरोना फैलाने वाला होता है।

हालांकि कुछ एक्सपर्ट के मुताबिक, ओमिक्रॉन के मामले में व्यक्ति अन्य कोरोना वैरिएंट्स की तुलना में जल्दी संक्रामक या कोरोना स्प्रेडर बन रहा है।

ओमिक्रॉन संक्रमित बनता है एक दिन में कोरोना फैलाने वाला

ओमिक्रॉन से संक्रमित व्यक्ति के दूसरों में कोरोना फैलाने या स्प्रेडर बनने का खतरा डेल्टा या अन्य वैरिएंट्स की तुलना में ज्यादा जल्दी रहता है।

शुरुआती स्टडीज के मुताबिक, ओमिक्रॉन संक्रमित व्यक्ति में लक्षण या सिम्प्टम महज तीन दिन के अंदर ही पैदा होने लगते हैं।

कुछ स्टडीज का मानना है कि ओमिक्रॉन से संक्रमित होने के बाद व्यक्ति महज एक दिन में ही दूसरों में कोरोना फैलाने वाला यानी संक्रामक बन जाता है।

वहीं डेल्टा और पिछले अन्य कोरोना वैरिएंट्स से संक्रमित होने के बाद व्यक्ति को संक्रामक या कोरोना फैलाने वाला बनने में 2-4 दिन लग रहे थे।

लक्षण खत्म होने के बाद भी रहता है कोरोना फैलने का खतरा

अमेरिकी हेल्थ एजेंसी सीडीसी के मुताबिक, कोरोना के किसी भी वैरिएंट से संक्रमित व्यक्ति सबसे ज्यादा संक्रामक या कोरोना वायरस फैलाने वाला लक्षण पैदा होने के कुछ दिन पहले और कुछ दिन बाद तक रहता है।

ओमिक्रॉन से अन्य वैरिएंट्स की तुलना में लक्षण जल्दी (लगभग 3 दिन में) पैदा हो रहे हैं, ऐसे में व्यक्ति महज एक दिन में ही कोरोना स्प्रेडर बन सकता है।

वहीं ओमिक्रॉन संक्रमित व्यक्ति लक्षण पैदा होने के कुछ दिन (दो-तीन दिन) बाद तक कोरोना स्प्रेडर रह सकता है।

डेल्टा और अन्य वैरिएंट्स से लक्षण 4-5 दिन में पैदा हो रहे थे और इन वैरिएंट्स से व्यक्ति 2-4 दिन में कोरोना फैलाने वाला बन रहा था।

ओमिक्रॉन के पहले के वैरिएंट्स में भी लक्षण पैदा होने के कुछ दिन बाद तक व्यक्ति के संक्रामक रहने का खतरा रहता है।

ओमिक्रॉन का इन्क्यूबेशन पीरियड महज 3 दिन

  • वायरस के इन्क्यूबेशन पीरियड से ही उसके स्प्रेड होने की रफ्तार का पता चलता है। दरअसल, किसी व्यक्ति के कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने और लक्षण पैदा होने के बीच के समय को इन्क्यूबेशन पीरियड कहते हैं।
  • स्टडीज के मुताबिक, डेल्टा वैरिएंट्स का इन्क्यूबेशन पीरियड 4 दिन और अल्फा का 5 दिन था। वहीं माना जा रहा है कि ओमिक्रॉन का इन्क्यूबेशन पीरियड घटकर 3 दिन रह गया है।
  • एक्सपर्ट के मुताबिक, इस बात की पूरी संभावना है कि किसी वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड जितना छोटा होगा, उसके उतनी ही तेजी से संक्रामक बनने की संभावना रहेगी, और उतनी ही तेजी से वह महामारी फैलेगी।।
  • जॉन हॉपकिंस सेंट ऑफ हेल्थ सिक्योरिटी की महामारी विशेषज्ञ जेनिफर नुजो के मुताबिक, छोटा इन्क्यूबेशन पीरियड किसी भी वायरस को नियंत्रित करने में बहुत-बहुत मुश्किल बना देता है।
  • यही वजह है कि अन्य वैरिएंट्स की तुलना में ओमिक्रॉन से व्यक्ति ज्यादा जल्दी कोरोना फैलाने वाला बन रहा है।
  • यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा मेडिकल स्कूल की डॉ. एमी कारगेर ने ओमिक्रॉन के छोटे इन्क्यूबेशन पीरियड को लेकर कहा है कि ज्यादातर लोग तीसरे दिन पॉजिटिव हो रहे हैं।
  • इससे पता चलता है कि अन्य वैरिएंट्स की तुलना में ओमिक्रॉन से जल्दी संक्रमित होने का खतरा रहता है।

बिना लक्षण वाले या एसिम्प्टोमेटिक लोग भी होते हैं संक्रामक

कोरोना संक्रमित व्यक्ति में सिम्प्टोमेटिक यानी जिनमें लक्षण पैदा हो रहे हैं, उनके संक्रामक बनने या कोरोना स्प्रेडर बनने को लेकर तो स्टडीज मौजूद हैं।

  • ओमिक्रॉन के अधिकतर मरीज एसिम्प्टोमेटिक हैं, यानी उनमें संक्रमण के बावजूद लक्षण पैदा नहीं हो रहे हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि एसिम्प्टोमेटिक या बिना लक्षण वाले लोग कितने दिन में कोरोना फैलाने वाले बन जाते हैं?
  • एक्सपर्ट का मानना है कि अधिकतर एसिम्प्टोमेटिक लोगों में वायरल लोड या उसका लेवल कम होता है। ऐसे में ये स्पष्ट नहीं है कि वे कितनी जल्दी कोरोना फैलाने वाले बनते हैं।
  • हालांकि WHO के मुताबिक, कोरोना संक्रमित बिना लक्षण वाले यानी एसिम्प्टोमेटिक व्यक्ति से भी कोरोना फैलने का खतरा उतना ही रहता है, जितना कि किसी लक्षण वाले व्यक्ति से रहता है।
  • इसलिए जरूरी है कि अगर आप हाल ही में किसी कोरोना व्यक्ति के संपर्क में आए हैं, तो भले ही आपमें कोई लक्षण न दिख रहे हों, तब भी आपको कोरोना टेस्ट कराना चाहिए।
  • ऐसा इसलिए क्योंकि संभव है कि आपमें लक्षण तो नहीं दिख रहे हैं, लेकिन आप कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। अगर ऐसा हुआ तो इस वायरस से आपके के जरिए दूसरों में फैलने का खतरा बढ़ जाएगा।
  • स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक, कोरोना पॉजिटिव आने वाले एसिम्प्टोमेटिक लोगों को भी खुद को सात दिन तक आइसोलेट करना चाहिए। तीन दिन लगातार बुखार नहीं आने पर ऐसे लोगों का आइसोलेशन खत्म माना जाएगा
  • एक्सपर्ट के मुताबिक, सिम्प्टोमेटिक लोगों को तब तक आइसोलेट रहना चाहिए जब तक वह कम से कम 24 घंटे तक बुखार से मुक्त न रहे हों।

कोरोना संक्रमित के संपर्क में आने के बाद कब कराना चाहिए टेस्ट?

एक्सपर्ट का मानना है कि जिन लोगों में कोरोना के लक्षण प्रकट हो जाएं, उन्हें तुरंत ही टेस्ट कराना चाहिए।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि कोरोना लक्षण दिखने पर आपको घर पर रैपिड एंटीजन टेस्ट कराने के बजाय लैब में RT-PCR टेस्ट कराना चाहिए।

दरअसल, लैब में किए जाने वाले टेस्ट वायरस को डिटेक्ट करने में कहीं ज्यादा सेंसिटिव होते हैं। RT-PCR टेस्ट में संक्रमित के संपर्क में आने के तीन के अंदर ही वायरस को डिटेक्ट करने की क्षमता होती है।

वहीं ओमिक्रॉन से व्यक्ति के जल्दी संक्रमित होने के खतरे को देखते हुए उसे कब कोरोना टेस्ट कराना चाहिए? इसे लेकर यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा मेडिकल स्कूल की डॉ. एमी कारगेर का कहना है कि लोगों को संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के तीन से पांच दिन बाद टेस्ट कराना चाहिए।

उनका कहना है कि अगर आपने एक टेस्ट करा लिया है तो आपको दूसरा टेस्ट कराने से पहले कम से कम पांच दिन तक इंतजार करना चाहिए।