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भास्कर एक्सप्लेनर:जानिए उन चेहरों के बारे में जो बने जेट 2.0 के पंख; पर पिक्चर अभी बाकी है क्योंकि न तो स्लॉट्स हैं और न ही प्लेन, पार्किंग स्पेस भी बड़ी समस्या

एक महीने पहलेलेखक: जयदेव सिंह
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अप्रैल 2019 से बंद पड़ी जेट एयरवेज फिर से उड़ने की तैयारी कर रही है। एयरलाइन के नए मैनेजमेंट ने दावा किया है कि 2022 की पहली तिमाही में इसकी घरेलू उड़ान शुरू हो जाएगी। वहीं, 2022 की तीसरी या चौथी तिमाही में इंटरनेशनल ऑपरेशन्स भी शुरू हो जाएंगे।

लेकिन ये होगा कैसे? कर्ज में डूबी ये कंपनी आखिर इन कर्जों से कैसे ऊबर गई? आगे इसके लिए क्या चुनौतियां हैं? कंपनी के नए मैनेजमेंट में कौन लोग शामिल हैं? जेट एयरवेज बंद होने की बड़ी वजहें क्या थीं? आइए समझते हैं...

जेट एयरवेज 2.0 क्या है?

2019 में नरेश गोयल की जेट एयरवेज का ऑपरेशन बंद कर दिया गया था। कंपनी दिवालिया होने के कगार पर थी, लेकिन अब इसे दोबारा शुरू करने की बात कही जा रही है। दरअसल, इसी साल जून में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने जालान-कालरॉक कंसोर्टियम को मंजूरी दी। इस कंसोर्टियम ने 1375 करोड़ रुपए का इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्लान पेश किया था। ये कंसोर्टियम फ्लाइट्स के ऑपरेशन को शुरू तो करेगा ही, साथ ही इसे दानदाताओं का उधार भी चुकाना है।

इसी कंसोर्टियम ने बीते सोमवार को जेट एयरवेज के संचालन को फिर से शुरू करने की योजना का ऐलान किया। हालांकि ये प्लान अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो जनवरी से मार्च 2022 के बीच कंपनी की पहली फ्लाइट दिल्ली से मुंबई के बीच शुरू हो जाएगी।

जालान-कालरॉक कंसोर्टियम क्या है?

जालान-कालरॉक कंसोर्टियम में शामिल जालान का मतलब है मुरारी लाल जालान। मूलत: रांची के रहने वाले मुरारी लाल जालान के पिता कागज के कारोबारी थे। परिवार के बिजनेस को आगे बढ़ाते हुए 1988 में जालान ने क्यूएसएस नाम से फोटो कलर लैब खोली। इसके बाद बीआईटी मेसरा में कैमरे बनाने का प्लांट लगवाया। जालान रांची से UAE कैसे पहुंचे, इसके बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन आज इनका कई देशों में बिजनेस है।

मौजूदा दौर में UAE और उज्बेकिस्तान में जालान की कंपनी का MJ डेवलपर्स के नाम से रियल स्टेट कारोबार है। रियल स्टेट के साथ ही उनका खनन, ट्रेडिंग, डेयरी, टूरिज्म सेक्टर में भी बिजनेस है। उनका कारोबार अमेरिका, रूस, उज्बेकिस्तान जैसे देशों में फैला है।

अब बात कालरॉक की

कालरॉक ब्रिटेन के इन्वेस्टमेंट ग्रुप फ्रेच का हिस्सा है। जो ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट एडवाइजर कंपनी के तौर पर काम करती है। कंपनी इन्वेस्टमेंट के बिजनेस में पिछले दो दशक से काम कर रही है। इसके चेयरमैन फ्लोरियल फ्रेच हैं। फ्रेच मूलत: जर्मनी के रहने वाले हैं।

क्यों बंद हुई थी जेट एयरवेज?

एक वक्त में जेट के पास कुल 120 प्लेन थे। 'दि ज्वॉय ऑफ फ्लाइंग' टैग लाइन के साथ ऑपरेशन करने वाली कंपनी जब पीक पर थी तो हर रोज 650 फ्लाइट्स का ऑपरेशन करती थी। हालांकि जब कंपनी बंद हुई तो उसके पास केवल 16 प्लेन रह गए थे। मार्च 2019 तक कंपनी का घाटा 5,535.75 करोड़ रुपए का हो चुका था। भारी कर्ज के चलते 17 अप्रैल 2019 को कंपनी बंद हो गई। कहा जा रहा है कि नया मैनेजमेंट जेट एयरवेज के पुराने कर्मचारियों को प्राथमिकता देगा, लेकिन इसके लिए कर्मचारी को कंसोर्टियम की शर्तों पर आना होगा, जिसके लिए ज्यादातर कर्मचारी तैयार नहीं हैं।

जेट के दोबारा संचालन में सबसे बड़ी दिक्कत क्या है?

एयरलाइन के पास इस वक्त कोई रेडी फ्लीट नहीं है। कंसोर्टियम ने कहा है कि उसका प्लान अगले तीन साल में 50 से ज्यादा एयरक्राफ्ट का संचालन करने का है। कंसोर्टियम का प्लान 2022 के पहले क्वार्टर में डोमेस्टिक ऑपरेशन शुरू करने का है। वहीं, 2022 के तीसरे या चौथे क्वार्टर में इंटरनेशनल ऑपरेशन्स की भी शुरुआत का प्लान है।

हालांकि अभी ये तय नहीं है कि ऑपरेशन में कौन से एयरक्राफ्ट कहां से शामिल किए जाएंगे। कंसोर्टियम में शामिल मुरारी लाल जालान कहते हैं कि एयरक्राफ्ट का सिलेक्शन किया जा रहा है। वहीं, एयरलाइन के एक्टिंग CEO कैप्टन सुधीर गौर कहते हैं कि हम नैरो-बॉडी एयरक्राफ्ट के साथ घरेलू उड़ानों की शुरुआत करेंगे। एयरक्राफ्ट लीज पर लेने के लिए हमारी कई लोगों से बात चल रही है। कई लोगों ने हमसे संपर्क भी किया है।

एयरलाइन ऑपरेशन शुरू करने में एक और चुनौती स्लॉट और पार्किंग स्पेस की भी है। इसे लेकर कंपनी एयरपोर्ट ऑपरेटर्स से बातचीत कर रही है।

दो साल से ग्राउंडेड जेट के पास अभी कितने कर्मचारी हैं?

नए जेट एयरवेज को HR डिपार्टमेंट में भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। पायलट, केबिन क्रू, नेटवर्क प्लानर जैसे क्रिटिकल लोगों की जरूरत होती है। एयरलाइन ने कहा है कि उसने अब तक 150 से ज्यादा फुल टाइम कर्मचारियों की भर्ती कर ली है। इस वित्त वर्ष के अंत तक कंपनी का प्लान 1 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को भर्ती करने का है।

वहीं, दूसरी ओर एयरलाइन के पूर्व कर्मचारियों ने जालान-कालरॉक कंसोर्टियम के रिवाइवल प्लान के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में अपील डाल रखी है। NCLAT ने अपील स्वीकार कर ली है और कंपनी से जवाब मांगा है।

कंपनी के पूर्व कर्मचारी इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?

2019 में कंपनी का ऑपरेशन बंद हुआ। उस वक्त काम कर रहे सैकड़ों कर्मचारियों का 3 लाख से 85 लाख रुपए तक का बकाया है, लेकिन अपने रिवाइवल प्लान में कंसोर्टियम ने हर कर्मचारी के लिए 23 हजार रुपए का सेटलमेंट ऑफर दिया है। इसे ज्यादातर कर्मचारियों ने ठुकरा दिया है। कुल मिलाकर इन कर्मचारियों का कंपनी पर 1 हजार 265 करोड़ रुपए का बकाया है, लेकिन कंसोर्टियम ने इसके लिए सिर्फ 52 करोड़ रुपए ही दिए हैं।

तो क्या एयरलाइन दोबारा शुरू हो पाएगी?

कंपनी को ऑपरेशन शुरू करने से पहले कई परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इसमें NCLAT में कंपनी के पूर्व कर्मचारियों का केस तो है ही, कंपनी को ऋण देने वाले पंजाब नेशनल बैंक ने भी कंसोर्टियम के खिलाफ ट्रिब्यूनल में अपील की है।

इसके साथ ही कंपनी को अपने ऑपरेशन शुरू करने के लिए कुछ प्राइम स्लॉट्स की भी जरूरत होगी, जो 2019 में कंपनी के ग्राउंडेड होने के बाद दूसरी कंपनियों को दे दिए गए। हालांकि कोरोना के कारण प्रभावित हुए एविएशन सेक्टर के कारण कंपनी को इनमें से कुछ स्लॉट मिल सकते हैं।

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