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भास्कर एक्सप्लेनर:LIC का IPO आने वाला है; अगर आपके पास LIC की पॉलिसी है तो इस IPO से आपको क्या फायदा होगा, जानिए सब कुछ

19 दिन पहलेलेखक: रवींद्र भजनी
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आज का दिन भारत की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम यानी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) के लिए बहुत खास है। 19 जून 1956 को संसद ने LIC एक्ट पास किया था और इसके तहत 1 सितंबर 1956 को LIC की स्थापना हुई थी। तब से अब तक LIC भारत की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी के रूप में विकसित हुई है। अब आते हैं, आज की स्थिति पर। केंद्र सरकार LIC का इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) लाने की तैयारी में है। जुलाई में ही केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने LIC के IPO को मंजूरी दी है। IPO आने के बाद कंपनी भारत के स्टॉक मार्केट में लिस्ट हो जाएगी। इससे सरकार का डिसइन्वेस्टमेंट टारगेट पूरा होने की उम्मीद की जा रही है।

इससे पहले मिलीमैन एडवायजर्स को LIC की कीमत का आकलन करने के लिए अपॉइंट किया गया था। ग्लोबल कंपनियों HSBC, गोल्डमैन साक्स, बैंक ऑफ अमेरिका, सिटीग्रुप और BNP परिबास समेत 16 मर्चेंट बैंकर्स में से कोई एक कंपनी के पब्लिक इश्यू को मैनेज करेगा। इसका नाम जल्द ही तय होगा। मंत्रियों का एक समूह स्ट्रैटजिक डिसइन्वेस्टमेंट का वैकल्पिक ढांचा तय करेगा, जिसमें ऑफर का आंकड़ा तय होगा।

ये तो हो गई LIC के IPO की मोटी-मोटी बातें। अब सवाल यह उठता है कि आखिर LIC का IPO क्यों आ रहा है? अगर आपके पास LIC की पॉलिसी है तो क्या आपको इस IPO से कुछ फायदा मिलेगा? जानिए इन और इसी तरह के अन्य सवालों के जवाब-

LIC का IPO क्यों आ रहा है?

  • केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में डिसइन्वेस्टमेंट के बड़े टारगेट्स रखे, पर यह पूरे नहीं हो सके। एअर इंडिया और बीपीसीएल में हिस्सेदारी बेचने की कोशिश कोविड-19 समेत कई अन्य कारणों से टल रही है। अनुमान है कि इस वित्त वर्ष में सरकार इस दिशा में आगे बढ़ सकती है।
  • जहां तक मौजूदा वित्त वर्ष 2021-22 का सवाल है, सरकार ने डिसइन्वेस्टमेंट के जरिए 1.75 लाख करोड़ रुपए कमाने का टारगेट रखा है। यह तभी पूरा होगा जब LIC का IPO सफल रहता है। अब तक LIC के IPO की तारीख तय नहीं हुई है, पर उम्मीद है कि तीसरे या चौथे क्वार्टर में इसकी लिस्टिंग हो जाएगी।

इस IPO से केंद्र सरकार कितनी कमाई चाहती है?

  • चीफ इकोनॉमिक एडवायजर के. सुब्रमण्यम ने मार्च में कहा था कि LIC का IPO एक लाख करोड़ रुपए तक सरकार के लिए कमा सकता है। IPO और लिस्टिंग पर आगे बढ़ने के लिए LIC एक्ट 1956 में बड़े बदलाव किए गए हैं। कितने शेयर बेचे जाएंगे और वह किस प्राइज बैंड में होंगे, यह अब तक तय नहीं हुआ है। कानून में बदलाव से LIC की अधिकृत शेयर पूंजी 25 हजार करोड़ को 10 रुपए मूल्य के 2,500 करोड़ शेयर में बांटा गया है।
  • केंद्र सरकार की योजना LIC के IPO से पहले नेशनल फर्टिलाइजर्स, मिश्र धातु निगम और राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स में ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए हिस्सेदारी बेचने की है।

यह IPO पॉलिसी होल्डर्स के लिए किस तरह फायदेमंद साबित होगा?

  • सरकार ने कहा है कि वह LIC के IPO इश्यू साइज से 10% शेयर पॉलिसी होल्डर्स के लिए सुरक्षित रखेगी। LIC एक्ट में 2021 में हुए बदलावों में कहा गया है कि किसी पब्लिक इश्यू में जिस तरह कर्मचारियों के लिए शेयर सुरक्षित रहते हैं, उसी तरह का रिजर्वेशन LIC पॉलिसी रखने वालों के लिए किया जाएगा। यह कम्पीटिटिव बेसिस पर होगा।
  • मार्केट रेगुलेटर सेबी के नियम कहते हैं कि किसी भी इश्यू में प्रस्तावित इश्यू प्राइस का 10% से अधिक कर्मचारियों और रिजर्वेशन के तहत नहीं होगा। बाजार का नियम यह भी कहता है कि कंपनी फ्लोर प्राइज का अधिकतम 10% डिस्काउंट देकर कर्मचारियों के लिए शेयर जारी कर सकती है। खबरें आ रही हैं कि सरकार LIC के पॉलिसी होल्डर्स को इश्यू प्राइज पर डिस्काउंट की पेशकश कर सकती है।
  • इस समय LIC अपने सरप्लस का 5% भुगतान सरकार को और बाकी पॉलिसी होल्डर्स को करती है। लिस्टेड होने के बाद LIC को अपना प्रॉफिट शेयर होल्डर्स के साथ डिविडेंड के तौर पर बांटना होगा। इससे प्रक्रिया में बदलाव करना होगा। हालांकि, पॉलिसी पर सरकार की ओर से दी जाने वाली सोवरिन गारंटी IPO के बाद भी जारी रहेगी। यानी अगर किसी कारण से कंपनी क्लेम देने में नाकाम रहती है तो सरकार उसका भुगतान करेगी।

स्प्लिट IPO की बात क्यों हो रही है?

  • शेयर मार्केट में पिछले कुछ समय में कई IPO आए हैं। फूड डिलीवरी फेसिलिटेटर जोमैटो ने 9,375 करोड़ रुपए का इश्यू जारी किया। ओवरऑल इन्वेस्टर्स ने अप्रैल से जुलाई के बीच 27 हजार करोड़ रुपए इन्वेस्ट किए हैं।
  • पेटीएम का आईपीओ भी आने वाला है, जो करीब 16,600 करोड़ रुपए का होगा। इसे अब तक का सबसे बड़ा IPO कहा जा रहा है। इससे पहले 2010 में कोल इंडिया का IPO आया था और उसके जरिए 15,200 करोड़ रुपए जुटाए गए थे।
  • जब तक LIC का IPO आएगा, तब तक इन्वेस्टर्स के पास कितना पैसा रहता है, यह देखना होगा। LIC का IPO अब तक का सबसे बड़ा होगा, पेटीएम से भी बड़ा। ऐसे में मार्केट एनालिस्ट को लग रहा है कि इन्वेस्टर्स के पास इतना पैसा होना चाहिए कि वे LIC का IPO खरीद सकें।
  • ऐसे में सुझाव आ रहे हैं कि एक साथ लाने के बजाय दो हिस्सों में IPO को लाया जाए। इसके तहत शेयरों का एक लॉट पहले ऑफर होगा। इसके कुछ समय बाद दूसरा हिस्सा ऑफर हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो यह भारत में पहली बार होगा।

LIC के IPO के लिए क्या सेबी भी तैयार है?

  • हां। इतना बड़ा IPO आ रहा है तो सेबी को इसके लिए विशेष व्यवस्था करनी पड़ रही है। उसने फरवरी में कुछ नियम बदले हैं। एक लाख करोड़ रुपए की पूंजी वाली कंपनियों के प्रमोटरों को दो साल में 10% पब्लिक शेयर होल्डिंग की अनुमति दी है। पांच साल में यह पब्लिक शेयर होल्डिंग बढ़ाकर 25% की जा सकेगी। फरवरी से पहले तक 4 हजार करोड़ रुपए या अधिक के मार्केट कैप वाली कंपनी को तीन साल में 25% शेयर सार्वजनिक करने होते थे।

LIC के IPO को लेकर मार्केट में इतना उत्साह क्यों है?

  • बीमा नियामक IRDAI के मुताबिक 2019 तक भारत में इंश्योरेंस लेने वालों की संख्या 2.82% ही थी। यानी करीब 97% भारतीय ऐसे हैं जो इंश्योरेंस के कवर से बाहर हैं। उन्हें अगर इंश्योरेंस दिया जाता है तो यह मार्केट तेजी से बढ़ सकता है।
  • ऐसा नहीं है कि इंश्योरेंस मार्केट ने प्रोग्रेस नहीं की है। दो दशक से प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियां भी भारत में कारोबार कर रही हैं। इसके बाद भी LIC का मार्केट शेयर 66.2% बना हुआ है, जो बताता है कि लोगों का भरोसा सरकारी कंपनी पर बना हुआ है।
  • इसके अलावा, LIC देश के सबसे बड़े इन्वेस्टर्स में से एक है। प्राइमइंफोबेस.कॉम (primeinfobase.com) के मुताबिक 31 मार्च 2021 को LIC की इक्विटी होल्डिंग 7.24 लाख करोड़ रुपए की थी। देश की टॉप 300 कंपनियों में उसकी कम से कम 1% हिस्सेदारी है। यह उसके फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट्स को और भी मजबूत बनाता है।
  • 31 मार्च 2021 को खत्म वित्त वर्ष में LIC ने 1.84 लाख करोड़ रुपए पहले साल की प्रीमियम के तौर पर हासिल किए। LIC 2.9 लाख कर्मचारियों और 22.78 लाख एजेंट्स का नेटवर्क है। इंडस्ट्री के पंडितों के अनुसार अगर इसके 22 लाख एजेंट्स सालभर में सिर्फ एक पॉलिसी भी बेचें तो यह बहुत बड़ा वॉल्यूम क्रिएट कर सकते हैं।
  • 31 लाख करोड़ रुपए की बैलेंस शीट के साथ LIC भारत की दूसरी सबसे बड़ी फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी है। सबसे बड़ा भारतीय स्टेट बैंक है, जिसकी संपत्ति 39.5 लाख करोड़ रुपए की है।
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