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भास्कर एक्सप्लेनर:यूरोप के कई देशों ने हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए वैक्सीनेशन अनिवार्य किया, क्या भारत को भी उठाना चाहिए ऐसा कदम

2 महीने पहलेलेखक: आबिद खान
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कोरोना से निपटने के लिए दुनियाभर में वैक्सीनेशन प्रोग्राम चल रहा है। सभी देश जल्द से जल्द ज्यादा से ज्यादा आबादी को वैक्सीनेट करना चाहते हैं, लेकिन हर देश में वैक्सीन हेजिटेंसी भी देखी जा रही है। लोग वैक्सीन नहीं लगवाने के लिए धर्म से लेकर वैक्सीन के सुरक्षित नहीं होने को वजह बता रहे हैं। इससे निपटने के लिए कई देशों ने वैक्सीन नहीं लगवाने वालों के लिए अलग-अलग तरह के नियम बनाए हैं। कुछ देशों ने हेल्थकेयर वर्कर्स में कोरोना के ज्यादा खतरे को देखते हुए उनके लिए वैक्सीनेशन अनिवार्य कर दिया है।

इस फैसले के बाद अनिवार्य वैक्सीनेशन को लेकर बहस छिड़ गई है। विरोध-समर्थन में अलग-अलग तर्क दिए जा रहे हैं।

समझते हैं, किन देशों ने हेल्थकेयर वर्कर्स के वैक्सीनेशन को अनिवार्य किया है? भारत में क्या स्थिति है? इस बारे में एक्सपर्ट्स का क्या कहना है? और क्या भारत में भी हेल्थकेयर वर्कर्स को वैक्सीनेशन अनिवार्य कर देना चाहिए?…

किन देशों में हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए कोरोना की वैक्सीन लगवाना अनिवार्य है?

  • मार्च में इटली ने हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए कोरोना वैक्सीनेशन अनिवार्य किया। वहां डॉक्टर्स को किसी भी पेशेंट का इलाज करने से पहले खुद को अनिवार्य तौर पर वैक्सीनेट करवाना होगा। इसी तरह सर्बिया ने भी हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए वैक्सीनेशन अनिवार्य कर रखा है।
  • सऊदी अरब की नीति इस मामले में बेहद सख्त है। सऊदी ने हेल्थकेयर वर्कर के साथ-साथ पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे हर नौकरीपेशा आदमी के लिए वैक्सीनेशन अनिवार्य कर रखा है। वहां 'नो जैब-नो जॉब' की पॉलिसी है, यानी टीका नहीं तो नौकरी नहीं।
  • ग्रीस, इटली और फ्रांस भी हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए वैक्सीनेशन अनिवार्य कर चुके हैं। फ्रांस में जिन लोगों को वैक्सीन का एक भी डोज नहीं लगा है, उन्हें 21 जुलाई से सार्वजनिक स्थानों पर जाना प्रतिबंधित कर दिया है। अनवैक्सीनेटेड लोग थिएटर, पार्क, स्टेडियम और 50 से ज्यादा लोगों के बीच हो रहे आयोजनों में नहीं शामिल हो सकते।
  • यूके में होम केयर वर्कर्स को अक्टूबर से काम पर जाने के लिए वैक्सीन लगवाना अनिवार्य होगा।
  • केसेस बढ़ने के बाद मॉस्को ने भी अपनी वैक्सीनेशन पॉलिसी में सख्ती बढ़ाई है। मॉस्को में प्राइवेट कंपनियों को ये निर्देश दिया गया था कि 15 जुलाई तक अपने यहां काम कर रहे कम से कम 60 प्रतिशत स्टाफ को वैक्सीन का एक डोज लगवाएं। ऐसा नहीं करने पर जुर्माना लगाया जाएगा। इनमें प्राइवेट हॉस्पिटल्स भी शामिल हैं।

भारत में क्या स्थिति है?
भारत में 16 जनवरी से वैक्सीनेशन के पहले फेज की शुरुआत हुई थी। पहले फेज में हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को प्रायोरिटी ग्रुप में शामिल किया गया। हालांकि, भारत में किसी के लिए भी अनिवार्य वैक्सीनेशन जैसी कोई पॉलिसी नहीं है। सरकार ने लोगों को सलाह दी है कि खुद को और दूसरों को कोरोना से बचाने के लिए वैक्सीन जरूर लगवाएं। हेल्थकेयर वर्कर्स की बात करें तो देश में अब तक 1.02 करोड़ हेल्थवर्कर्स को वैक्सीन का पहला डोज लग चुका है। वहीं, इनमें से 77.3 लाख को वैक्सीन के दोनों डोज लग चुके हैं।

हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए कोरोना वैक्सीन अनिवार्य करने को लेकर एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?

अमेरिका के बोस्टन के ब्रिघम एंड विमंस हॉस्पिटल के 3 डॉक्टर्स ने एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन जर्नल में इस विषय पर एक लेख लिखा है। इसमें इन तीनों ने हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए वैक्सीनेशन क्यों अनिवार्य करना चाहिए इसके कुछ कारण बताए हैं। इन तीनों एक्सपर्ट्स ने कोरोना और फ्लू के बीच में तुलनात्मक अध्ययन किया है।

  • फ्लू के मुकाबले कोविड-19 की मोर्टलिटी रेट ज्यादा है। फ्लू से हर 1 हजार लोगों में 1 की मौत हुई थी, लेकिन कोविड की वजह से हर 100 से 250 लोगों में 1 की मौत हो रही है। फ्लू के मुकाबले कोरोना के मरीजों में हॉस्पिटल एडमिशन रेट भी ज्यादा है।
  • बाकी लोगों के मुकाबले हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स में कोरोना इन्फेक्शन रेट ज्यादा है। इस वजह से इस ग्रुप को खतरा भी ज्यादा है।
  • कोरोना के दौरान नोजोकोमियल ट्रांसमिशन रेट ज्यादा देखा गया। नोजोकोमियल ट्रांसमिशन रेट यानी हॉस्पिटल में किसी बीमारी से संक्रमित होना। कोरोना मरीजों का इलाज करते हुए कई हेल्थकेयर वर्कर्स संक्रमित हुए हैं।
  • हेल्थकेयर वर्कर्स के वैक्सीनेशन से मरीजों के संक्रमित होने का खतरा कम हो जाता है।
  • फ्लू की किसी वैक्सीन के मुकाबले कोरोना वैक्सीन ज्यादा असरकारी है। फ्लू की वैक्सीन की इफेक्टिवनेस 30 से 50% तक थी वहीं कोरोना वैक्सीन 90% तक इफेक्टिव है।

क्या किसी देश में पहले कभी किसी भी रोग के लिए वैक्सीनेशन अनिवार्य किया गया?
नहीं। दुनिया के किसी भी देश में अभी तक वैक्सीनेशन को आम लोगों के लिए अनिवार्य नहीं किया गया। सभी देशों ने अलग-अलग आधार पर छूट दी है। जिन लोगों ने वैक्सीन लगवाने से मना किया उन्हें सामाजिक, धार्मिक और स्वास्थ्य कारणों से छूट दी गई। यानी वैक्सीनेशन अनिवार्य था, लेकिन कुछ छूट भी दी गई थी। हालांकि लोगों में वैक्सीन हेजिटेंसी दूर करने के लिए काउंसलिंग भी की गई, जिसमें उन्हें वैक्सीनेशन के फायदे बताए गए ताकि वे लोग वैक्सीनेशन के प्रति जागरूक हों।

भारत में अब तक किसी भी ग्रुप के लिए वैक्सीनेशन अनिवार्य नहीं किया गया है। पोलियो के वैक्सीनेशन अभियान के दौरान भी हमारा लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा बच्चों को वैक्सीनेट करना था, लेकिन इसके लिए वैक्सीनेशन कभी अनिवार्य नहीं किया गया।

हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए कोरोना वैक्सीन लगवाना अनिवार्य नहीं करने पर एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?
इस मामले पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि जिन हेल्थकेयर वर्कर्स का वैक्सीनेशन नहीं हुआ हैं, उन्हें नॉन-कोविड मरीजों के इलाज में लगाया जा सकता है। इससे उनके संक्रमित होने का खतरा कम हो जाएगा।

वैक्सीन बीमारी से बचाती है, लेकिन बीमारी के ट्रांसमिशन को नहीं रोकती। यानी वैक्सीनेटेड व्यक्ति भी बीमारी को ट्रांसमिट तो कर ही सकता है।

क्या भारत में हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए वैक्सीनेशन अनिवार्य करना चाहिए?
महामारी विशेषज्ञ डॉक्टर चंद्रकांत लहारिया के मुताबिक, भारत में किसी भी ग्रुप के लिए कोरोना वैक्सीनेशन अनिवार्य नहीं करना चाहिए। डॉक्टर लहारिया इसके पीछे इन वजहों को बताते हैॆं।

  • दूसरी बीमारियों की तरह कोरोना से निपटने के लिए 100% वैक्सीनेशन की जरूरत नहीं है।
  • भारत में जो वैक्सीन इस्तेमाल की जा रही है, वो ट्रांसमिशन को रोकने में कारगर है या नहीं इस बात का वैज्ञानिक आधार कम है। जबकि यूरोप में जो वैक्सीन है, उनको लेकर ज्यादा स्टडीज मौजूद हैं। जो ये बताती हैं कि वो वैक्सीन ट्रांसमिशन को रोकने में भी कारगर हैं। इस आधार पर वहां वैक्सीनेशन अनिवार्य किया जा सकता है, लेकिन भारत में नहीं।
  • भारत में हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए वैक्सीनेशन को अनिवार्य करना लोगों के बीच गलत अवधारणा को बढ़ावा दे सकता है। लोगों को लगने लगेगा कि अभी हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए वैक्सीनेशन अनिवार्य हुआ है, धीरे-धीरे बाकी ग्रुप के लिए भी किया जा सकता है।
  • वैक्सीन अनिवार्य करने पर लोगों में वैक्सीन हेजिटेंसी बढ़ सकती है। इससे भारत के वैक्सीनेशन प्रोग्राम पर असर पड़ेगा।
  • भारत में अभी वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है। जो लोग चाह रहे हैं, उन्हें ही वैक्सीन के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। पहले हमारा लक्ष्य आबादी के कम से कम 50-70% हिस्से को वैक्सीनेट करना होना चाहिए। उसके बाद किसी ग्रुप के अनिवार्य वैक्सीनेशन के बारे में सोचा जा सकता है।
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