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भास्कर एक्सप्लेनर:बच्चे को कोरोना इन्फेक्शन से बचाने के लिए गोद में लेते और दूध पिलाते समय भी मास्क पहनें मां

एक महीने पहलेलेखक: रवींद्र भजनी
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भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर में बच्चों में संक्रमण के केस बढ़ रहे हैं। ऐसे में ऐसी महिलाएं ज्यादा चिंतित हैं जो अभी-अभी ही मां बनी हैं या जिनके बच्चे बहुत ही छोटे हैं। इस मदर्स डे पर हमने ऐसी ही मांओं की चिंताओं को डॉ. शिराफ वज़ीफ़दार, एमडी, डीजीओ, कंसल्टेंट, गायनेकोलॉजी, पीडी हिंदुजा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर, खार फेसिलिटी के सामने रखा। उनसे जानने की कोशिश की कि क्या वाकई में छोटे बच्चों को कोरोना से खतरा है? उन्हें बचाने के लिए क्या कदम उठाने जरूरी है?

क्या छोटे बच्चों को कोरोना इन्फेक्शन होने का खतरा है?

  • हां। पहले तो कहा जा रहा था कि नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों की इम्युनिटी मजबूत होती है। इस वजह से उन्हें कोरोना इन्फेक्शन होने का खतरा नहीं है। पर हमने हाल ही में देखा है कि एक महीने के बच्चे को भी कोरोना इन्फेक्शन हुआ है। अच्छी बात यह है कि बच्चों में लक्षण बेहद हल्के या मामूली ही रहे हैं। इन लक्षणों के अनुसार ही इलाज भी किया जा रहा है। जो महिलाएं नई-नई मां बनी हैं, उन्हें अतिरिक्त सावधानी रखनी जरूरी है।

नवजात शिशुओं को इन्फेक्शन से बचाने के लिए क्या करें?

  • ज्यादा लोगों के संपर्क में आने से रोकें। बच्चे को जितने कम लोग हाथ में लेंगे, उतना अच्छा होगा। अगर कोई मिलने-जुलने वाले या मेहमान आ भी रहे हैं तो उन्हें सख्ती से हाथों को सैनिटाइज करने और मास्क पहनने को कहें। उसके बाद ही उन्हें बच्चे को छूने की इजाजत दें। मां के लिए भी यह बेहद जरूरी है कि वह अपने हाथों को बार-बार धोती रहे। नवजात शिशु को दूध पिलाते समय भी मां मास्क पहने ताकि उसे इन्फेक्ट होने से बचाया जा सके।

क्या बच्चे को मालिश करवाना जारी रखें?

  • इसकी जरूरत नहीं है। फिर भी, यह फैसला आपका होगा। पर, चिकित्सकीय दृष्टि से देखें तो नवजात शिशु के लिए मालिश फायदेमंद या जरूरी नहीं होती। बेहतर होगा कि अगर बच्चे की मालिश करने के लिए किसी को रखा हो तो उसे कुछ दिनों के लिए छुट्टी दे दें। इस समय जितने कम लोग बच्चे के आसपास रहेंगे, उतना ही बेहतर होगा। जितना संभव हो, बाहरी लोगों/ मेहमानों/ रिश्तेदारों/ बच्चों को संभालने वालों से बच्चे का संपर्क टालें।

बच्चों को दूध पिला रहीं मां कोरोना इन्फेक्शन को कैसे रोकें?

  • नई मां के लिए यह बेहद जरूरी है कि बच्चे को दूध पिलाने से पहले और उसके बाद अपनी ब्रेस्ट को अच्छे से साफ कर लें। यह शिशु को इन्फेक्शन से बचाने में मदद करेगा। पर इसका मतलब यह नहीं है कि ब्रेस्ट को सैनिटाइजर या बॉडी वॉश से धोना है। बार-बार सफाई, साफ-सुथरी रुई से पोंछना ही काफी है। साथ ही नई मां को यह सलाह दी जाती है कि वह नवजात शिशु से सीधे संपर्क से बचे और मास्क पहने।

क्या नई मां को भी कोरोना वैक्सीन लगवानी चाहिए?

  • हालात बदल रहे हैं। पहले गर्भवती महिलाओं और ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली मां को कोरोना वैक्सीन न लगाने की सलाह दी गई थी। पर अब स्टडी बताती है कि बच्चों को दूध पिला रही मां भी वैक्सीन लगवा सकती हैं। हालांकि यह फैसला हम प्रेग्नेंट महिलाओं पर छोड़ रहे हैं कि वे वैक्सीन लेना चाहती हैं या नहीं।
  • दुनियाभर में प्रेग्नेंसी के दौरान वैक्सीन देने पर कुछ स्टडी हुई है। प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर काफी कम डेटा उपलब्ध है। हम यह गारंटी नहीं दे सकते कि मौजूदा स्थिति में प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए वैक्सीन सुरक्षित है या नहीं। प्रेग्नेंट महिला के लिए कोरोना वैक्सीन लगवाना या न लगवाना उसका व्यक्तिगत फैसला होगा। चूंकि, एक प्रेग्नेंट महिला अपने गर्भ में एक बच्चे को पाल रही होती है, इसलिए हमें अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। हमें साइड इफेक्ट्स की संभावनाओं पर भी विचार करना चाहिए।

वैक्सीन का डोज लेने के बाद प्रेग्नेंट होती हैं तो क्या करें?

  • अगर पहला या दूसरा डोज लेने के कुछ दिन बाद प्रेग्नेंसी का पता चलता है तो कुछ करने की जरूरत नहीं है। अबॉर्शन कराने की कतई जरूरत नहीं है। यह बात अलग है कि फाइनेंशियल सपोर्ट या किसी अन्य कारण से अगर प्रेग्नेंट महिला अबॉर्शन कराना चाहती है तो वह ऐसा कर सकती है। पर हम यह स्पष्ट तौर पर कह रहे हैं कि कोरोना वैक्सीन प्रेग्नेंसी खत्म करने का कारण नहीं बनना चाहिए।

क्या और भी कोई सावधानी बरतने की जरूरत है?

  • हां। नई मां बनी हैं या महिला प्रेग्नेंट हुई है तो उन्हें यह समझना होगा कि अब दो जिंदगियां उनके भरोसे हैं। ऐसे में अतिरिक्त सावधानी बेहद जरूरी है। कोरोना के लक्षण अब भी नए-नए तरीके से सामने आ रहे हैं। इन्फेक्शन होने से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाने बेहद जरूरी हैं।
  • हमने देखा है कि प्रेग्नेंट महिलाएं शॉर्ट ट्रिप्स या फ्लाइट्स में उड़ान भर रही हैं। उन्हें यह समझना होगा कि भीड़ और एयरपोर्ट्स/एयरलाइंस से दूर रहने में कोई अंतर नहीं है। किसी महिला को वैक्सीन लगी है या नहीं, उसे बच्चे के जन्म से पहले कोरोना हुआ है या नहीं हुआ है, यह कोई मायने नहीं रखता। री-इन्फेक्शन का खतरा तो बना ही हुआ है। सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
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