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भास्कर एक्सप्लेनर:MP, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सीरो पॉजिटिविटी अधिक, नए केस कम; कोरोना की संभावित तीसरी लहर के लिए इसके क्या मायने हैं?

2 महीने पहलेलेखक: आबिद खान
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इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने चौथे सीरो सर्वे का स्टेटवाइज डेटा जारी कर दिया है। पिछले हफ्ते ICMR ने बताया था कि देश में 67.6% आबादी में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी मिली है। देश में सबसे अधिक सीरो पॉजिटिविटी मध्यप्रदेश में (79%) और सबसे कम केरल (44%) मिली है। जब पिछले पांच दिन के नए कोविड-19 केस देखते हैं तो उन्हीं राज्यों में संख्या बढ़ी है जहां सीरो पॉजिटिविटी तुलनात्मक रूप से कम है।

ICMR ने यह सर्वे 14 जून से 16 जुलाई तक 21 राज्यों के 70 जिलों में किया था। सर्वे में 28 हजार 975 लोगों के सैंपल लिए गए। साथ ही 7 हजार 252 हेल्थकेयर वर्कर्स भी शामिल किए। आइए समझते हैं कि सीरो सर्वे के यह नतीजे तीसरी लहर के बारे में क्या बता रहे हैं?

सीरो सर्वे क्या है और चौथे सर्वे के नतीजे क्या कहते हैं?

  • ICMR ने अब तक चार बार ब्लड सीरम सर्वे किए हैं। इन सर्वे में ब्लड टेस्ट से देखा जाता है कि कितने लोगों में कोविड-19 के खिलाफ एंटीबॉडी बनी है। इससे यह पता चलता है कि कितनी आबादी को कोविड-19 इन्फेक्शन हो गया है यानी सीरो-प्रिवेलेंस है।
  • इससे पहले ICMR ने तीन सर्वे किए थे। मई-जून 2020 में पहले सर्वे में सीरो प्रिवेलेंस 0.7% रहा था। उसके बाद लगातार सीरो प्रिवेलेंस बढ़ा है। अगस्त-सितंबर 2020 में दूसरे सर्वे में यह 7.1% और दिसंबर-जनवरी (20-21) में 24.1% रहा। अब जून-जुलाई 2021 के चौथे सर्वे में यह 67.6% हो गया है।
  • चौथे सीरो सर्वे से साफ है कि ज्यादातर लोगों में कोविड-19 एंटीबॉडी बन चुकी है। यानी उन्हें किसी न किसी तरह का प्रोटेक्शन मिल गया है। हमारे यहां वैक्सीनेशन की रफ्तार भी कम है। इसे देखते हुए ज्यादा से ज्यादा आबादी में एंटीबॉडी बनना हमारे लिए अच्छा है।
  • ICMR ने राज्यों के आंकड़े जारी किए हैं, जो उम्मीद की किरण बनकर आए हैं। मध्यप्रदेश में सबसे अधिक 79% सीरो प्रिवेलेंस सामने आया है। राजस्थान (76.2%), बिहार (75.9%), गुजरात (75.3%), छत्तीसगढ़ (74.6%), उत्तराखंड (73.1%), उत्तरप्रदेश (71.0%) और आंध्रप्रदेश (70.2%) ऐसे राज्य हैं, जहां सीरो प्रिवेलेंस 70% से अधिक है।

क्या ज्यादा सीरो पॉजिटिविटी वाले राज्यों में बन गई है हर्ड इम्यूनिटी?

  • वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. गगनदीप कंग और महामारी विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहारिया जैसे विशेषज्ञ कह रहे हैं कि मौजूदा हालात में हर्ड इम्यूनिटी के लिए 85% आबादी में एंटीबॉडी बनना आवश्यक है।
  • इसका मतलब है कि 70% सीरो पॉजिटिविटी को पार कर चुके राज्यों में कुछ हद तक हर्ड इम्यूनिटी बन चुकी है। यही कारण है कि इन राज्यों में नए केस भी कम आ रहे हैं।
  • सीरो पॉजिटिविटी के टेबल में टॉप पर चल रहे मध्यप्रदेश की बात करें तो यहां पिछले 7 दिन में औसतन 11 केस ही मिले हैं। राजस्थान में 2 जुलाई को 90 नए केस मिले थे, पर उसके बाद लगातार गिरावट हुई है। बिहार में एक हफ्ते में औसतन 72 नए केस रोज सामने आए, जबकि गुजरात में 50 से कम। छत्तीसगढ़ में भी 18 जून के बाद एक दिन में 500 से अधिक केस नहीं मिले हैं।

जहां सीरो पॉजिटिविटी रेट कम है, वहां क्या हाल है?

  • इस समय पूरे देश में डेली नए केस का आंकड़ा 40 हजार के आसपास अटका हुआ है। इसमें भी करीब 60% केस केरल और महाराष्ट्र से आ रहे हैं। जब ICMR के सर्वे का सीरो पॉजिटिविटी रेट देखते हैं तो उसका असर नए केस पर साफ दिख रहा है।
  • पूरे देश में केरल में सीरो पॉजिटिविटी सबसे कम 44% रही। यहां हर दिन औसतन 17 हजार नए मामले सामने आ रहे हैं। 28 जुलाई को देश में 43 हजार नए मरीज मिले थे, इसमें से आधे मरीज केरल के हैं।
  • कम सीरो पॉजिटिविटी रेट के मामले में केरल के बाद असम दूसरे नंबर पर है, जहां 50% सीरो प्रिवेलेंस मिला है। यहां 28 जुलाई तक हर रोज 1 हजार से ज्यादा नए केस मिले हैं। महाराष्ट्र में भी अन्य बड़े राज्यों के मुकाबले सीरो प्रिवेलेंस रेट कम रहा और यहां केरल के बाद सबसे अधिक नए केस सामने आ रहे हैं।
  • ICMR के मुताबिक महाराष्ट्र में 58% लोगों में एंटीबॉडी मिली है और यहां पिछले एक हफ्ते से रोज औसतन 6 हजार से अधिक नए केस मिले हैं। हरियाणा और पश्चिम बंगाल में सीरो पॉजिटिविटी रेट 60% के आसपास है। पर राहत की बात यह है कि यहां नए केस अन्य राज्यों की तुलना में कम है।

सीरो पॉजिटिविटी के नतीजे तीसरी लहर के बारे में क्या बताते हैं?

  • यह ध्यान रखना होगा कि यह सर्वे के नतीजे हैं, हकीकत नहीं। जमीन पर परिस्थिति अलग भी हो सकती है। डॉ. लहारिया का कहना है कि सीरो पॉजिटिविटी रेट जहां ज्यादा है, वहां केस बढ़ने का रिस्क कम है। पर हमें ध्यान रखना होगा कि सैम्पल सर्वे से पूरे स्टेट का डेटा सामने नहीं आता। हो सकता है किसी राज्य में कुछ जिलों में इन्फेक्शन रेट अधिक हो।
  • वहीं, डॉ. कंग कहती हैं कि सीरो सर्वे के मुताबिक देश में 30% से अधिक आबादी यानी 40 करोड़ लोग अब भी इन्फेक्शन से दूर हैं। यानी वह खतरे में हैं। इस वजह से यह कहना सही नहीं होगा कि तीसरी लहर नहीं आएगी। महामारी में लहरें आती रहती हैं। अगर हमने मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और सेनेटाइजर जैसे नियमों का सख्ती से पालन किया तो तीसरी लहर खतरनाक नहीं होगी। सीरो पॉजिटिविटी रेट से भी यही संकेत मिल रहा है।
  • साथ ही शरीर में एंटीबॉडी कब तक रहेगी, इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। समय के साथ एंटीबॉडी का स्तर कम होता जाता है। हो सकता है आने वाले 6 महीनों में एंटीबॉडी का स्तर कम हो जाए तब खतरा बढ़ जाएगा। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को सुझाव दिया है कि वे खुद भी सीरो सर्वे कराएं, ताकि और सटीक आंकड़े हमें मिल सकें।

सीरो सर्वे क्या होता है?

दरअसल जब भी कोई वायरस आपके शरीर में आता है, तो शरीर का इम्यून सिस्टम उस वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनाता है। ये एंटीबॉडी करीब एक महीने तक आपके ब्लड में रहती है। इसी एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए ब्लड सैंपल के जरिए सीरो सर्वे किया जाता है। यानी अगर आपके शरीर में एंटीबॉडी बनी है तो इसका मतलब कि आप हाल ही में वायरस से इन्फेक्ट हुए थे।

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