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भास्कर एक्सप्लेनर:तालिबानी राज के लिए आने वाले समय में कौन से तालिबान विरोधी अफगानी बनेंगे सबसे बड़ी चुनौती? इस वक्त कहां हैं ये लोग?

3 महीने पहलेलेखक: जयदेव सिंह
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अफगानिस्तान में तालिबान सरकार कैसी होगी ये तय हो चुका है। नई सरकार में किसका क्या रोल होगा ये भी सामने आ चुका है। ये सरकार कितनी समावेशी होगी कितने समय तक चलेगी ये तो आने वाले वक्त में पता चलेगा, लेकिन ये जरूर तय है कि उसके सामने कई विरोधी होंगे। ये विरोधी आने वाले दिनों में विरोध करने के लिए एकजुट हो सकते हैं। तालिबान के पहले शासन के दौरान नॉर्दर्न अलायंस इसका उदाहरण है।

वैसे भी अफगानिस्तान में कभी भी कोई पूरी तरह से पावर में नहीं होता है। चाहे सोवियत संघ हो या उसके बाद सत्ता में आया तालिबान या फिर हाल की अफगान सरकार। यही तालिबान के साथ भी होगा।

आखिर वो कौन से अफगान वॉरलॉर्ड होंगे जो आने वाले समय में तालिबान के लिए चुनौती बनेंगे। उनकी क्या पहचान है? अफगानिस्तान के किन इलाकों में इन नेताओं का प्रभाव है? भारत-पाकिस्तान और ईरान जैसे पड़ोसियों से इनके रिश्ते कैसे हैं? आइए जानते हैं…

अब्दुल रशीद दोस्तम अफगानिस्तान के सबसे बड़े उज्बेक नेता हैं। अलग-अलग समय पर तालिबान समेत अफगानिस्तान के हर धड़े को सपोर्ट कर चुके हैं। 2014 के चुनाव में अशरफ गनी को सपोर्ट किया खुद उप-राष्ट्रपति बने। 2018 में राजनीतिक विरोधियों ने अपहरण और रेप के आरोप लगाए तो देश छोड़कर तुर्की चले गए थे। कुछ महीनों बाद लौटे तो गनी ने स्वागत किया। बाद में गनी पर अपने खिलाफ साजिश करने का आरोप लगाया।

1993 में भारत विरोधी माने जाने वाले हिकमतयार के लड़ाकों के रॉकेट हमले के बाद भारत ने काबुल मिशन को बंद कर दिया था। इस हमले में एक भारतीय सुरक्षा गार्ड की मौत हुई थी। इस बीच हिकमतयार ने कहा है कि भारत को पूर्व अफगान सरकार के नेताओं को शरण नहीं देना चाहिए।

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