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  • Mobile phone handset retailers face a tremendous blow to earnings due to companies closing sales incentives

कटौती /कंपनियों द्वारा सेल्स इंसेंटिव बंद करने से मोबाइल फोन के हैंडसेट रिटेलर्स की कमाई पर लगा जबरदस्त झटका

कोविड-19 के कारण पूरे हैंडसेट इकोसिस्टम पर असर पहुंचा है कोविड-19 के कारण पूरे हैंडसेट इकोसिस्टम पर असर पहुंचा है

  • सैमसंग, विवो और ओपो जैसी हैंडसेट कंपनियों ने लिया फैसला
  • रिटेलर्स के मार्जिन स्ट्रक्चर में किया गया व्यापक बदलाव

Moneybhaskar.com

May 26,2020 04:47:00 PM IST

मुंबई. सैमसंग, विवो और ओपो जैसे मोबाइल हैंडसेट ब्रांड्स ने अपने ऑफलाइन रिटेल पार्टनर्स की मासिक बिक्री का इंसेंटिव वापस ले लिया है। कोविड-19 की वजह से मोबाइल फोन की मांग में जबरदस्त गिरावट दिखी है। इस कारण रिटेल पार्टनर्स को दिए जाने वाले मार्जिन के स्ट्रक्चर में व्यापक फेरफार किया गया है। इससे रिटेल स्टोर्स द्वारा बिक्री की जानेवाली छोटी कंपनियों तथा छोटे स्टोर मालिकों की कमाई पर जबरदस्त झटका लगा है।हालांकि रिटेलर्स को थोड़ी राहत भी मिली है। क्योंकि हैंडसेट ब्रांड्स ने बिक्री का लक्ष्य घटा दिया है।

बिक्री का लक्ष्य पूरा करने पर मिलता है इंसेंटिव

बता दें कि जब रिटेल स्टोर्स बिक्री के लक्ष्य को पूरा करता है तो कंपनियां उन्हें इंसेंटिव देती हैं। लेकिन कोविड-19 के कारण लॉकडाउन होने से रिटेलर्स एक भी रुपए का माल नहीं बेच पा रहे हैं। रिटेल स्टोर द्वारा बिक्री करनेवालों को मार्च तक मासिक सेल्स वैल्यू का 10 प्रतिशत तक इंसेंटिव मिलता था। पर अब यह घटकर 3 प्रतिशत फ्लैट रेट पर आ गया है।

रिटेलर्स की मासिक आय में आ सकती है गिरावट

सैमसंग, विवो और ओपो जैसे टॉप के ब्रांड्स फ्लैट रेट के आधार पर इंसेंटिव देने का निर्णय लिए हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि ग्राहक की मांग अभी आप्टिमम स्तर के नीचे पहुंच गई है। ऐसे में रिटेलर्स की मासिक आय में 25 प्रतिशत की गिरावट हो सकती है। रिेटेलर्स के मुताबिक वितरक प्राइस और एमआरपी के बीच 4 प्रतिशत का अंतर होता है। लेकिन यह अभी जैसे है, वैसे ही रहेगा।

कुछ कंपनियां पहले से ही 3 प्रतिशत इंसेंटिव दे रही हैं

भारत के कई टॉप के ब्रांड्स शाओमी, रियलमी और वन प्लस तो पहले से ही मासिक सेल्स वैल्यू का एक से तीन प्रतिशत इंसेंटिव ऑफर कर रहे हैं। उनके मार्जिन में कोई बदलाव नहीं हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि ऑफलाइन सेगमेंट में टार्गेट आधारित रणनीति से अधिकतम बिक्री होगी। जबकि ऑन लाइन चैनल में तो ऑर्डर्स की संख्या के आधार पर बिक्री होती है।

जीएसटी की दरों में वृद्धि से भी रिटेलर्स परेशान

1.5 लाख स्टैंडअलोन मोबाइल रिटेलर्स का प्रतिनिधित्व करनेवाले संगठन ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (एआईएमआरए) के प्रेसीडेंट अरविंदर खुराना ने कहा कि कोविड-19 के कारण पूरे हैंडसेट इकोसिस्टम पर असर पहुंचा है और अधिकतम फटका स्टैंडअलोन ऑफलाइन रिटेलर्स को पड़ा है। लॉकडाउन के प्रतिबंधों के सिवाय जीएसटी की दर में भी हुई वृद्धि से रिटेलर्स परेशान हैं। इसके अलावा डिवाइस की तंगी, प्रॉफिट मार्जिन में गिरावट जैसे प्रश्न भी उनकी समस्याओं को बढ़ा रहे हैं।

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