कोविड-19 /रीयल एस्टेट सेक्टर में एतिहासिक मंदी के संकेत, नहीं है निवेश का सही समय, लाॅकडाउन के बाद घट सकती है प्रोपर्टी की कीमत

  • रीयल एस्टेट के जानकार बताते हैं कि यह सेक्टर अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है
  • 2020 में क्षेत्र के लिए मौजूदा सेंटीमेंट अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर 

Moneybhaskar.com

Apr 16,2020 06:01:54 PM IST

नई दिल्ली. नोटबंदी के बाद से सुस्ती को झेल रही रीयल एस्टेट सेक्टर की परेशानी कोविड-19 के चलते और बढ़ गई है। यह सेक्टर अपने ऐतिहासिक मंदी की ओर बढ़ रहा है और सेक्टर को अगले कुछ सालों तक रिकवरी की कोई उम्मीद नहीं है। रीयल एस्टेट के जानकार बताते हैं कि यह सेक्टर अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। नाइट फ्रैंक-फिक्की-नारेडको के 24वें रीयल एस्टेट सेंटीमेंट इंडेक्स-पहली तिमाही के मुताबिक, 2020 में क्षेत्र के लिए मौजूदा सेंटीमेंट अपने सर्वकालिक निचले स्तर 31 पर आ गई है। सर्वे के अनुसार क्षेत्र के लिए भविष्य की धारणा का स्कोर भी 36 पर आ गया है, जो बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में 59 पर था।

अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में हुआ था सुधार

संपत्ति क्षेत्र की सलाहकार नाइट फ्रैंक तथा उद्योग मंडल फिक्की और नारेडको के एक सर्वे में कहा गया है कि पिछले वित्त वर्ष अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में रीयल एस्टेट क्षेत्र में कुछ सुधार दिख रहा था। लेकिन कोविड-19 महामारी फैलने से इस क्षेत्र को बड़ा झटका लगा है। क्षेत्र की मौजूदा और भविष्य की धारणा दोनों का इंडेक्स अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया है।

निवेश के लिए नहीं है सही समय

रीयल एस्टेट के जानकार बताते हैं कि रीयल्टी सेक्टर में निवेश की योजना के लिए यह समय उत्तम नहीं है। जानकार गुलाम जिया बताते हैं कि इस समय लोगों को रीयल्टी सेक्टर में निवेश को लेकर योजना नहीं बनाना चाहिए। इसका नकारात्मक प्रभाव हो सकता है हालांकि एनआरआई (विदेश में बसे भारतीय) के लिए निवेश का सही समय है क्योंकि डाॅलर के मुकाबले रुपए कमजोर चल रहा है। ऐसे में उनका निवेश करना फ़ायदेमंद हो सकता है।

30 फीसदी तक घट सकती है प्रोपर्टी के दाम

शिशिर बैजल बताते हैं कि आने वाले समय में प्रोपर्टी की कीमत में भारी कमी देखने को मिल सकती है। रेसिडेंशियल और कमर्शियल प्रोपर्टी की डिमांड घटेगी। प्रोपर्टी की कीमत में 20-30 फीसदी तक कटौती की जा सकती है। इसके साथ ही प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी में देरी हो सकती है। हालांकि बिल्डर्स को यह सुझाव दिया गया है कि जल्द से जल्द तैयार प्रोजेक्ट्स को सेल करने पर फोकस करें, इससे लिक्विडिटी की समस्या कम से कम हो।

एनरॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, ' मांग में कमी तथा नकदी की खराब स्थिति से पहले से ही जूझ रहे भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र पर कोविड-19 के कारण भी प्रतिकूल असर देखने को मिल सकता है।'

65% तक मकानों की बिक्री पर असर

इस साल मकानों की बिक्री पर बुरा असर पड़ सकता है। सर्वे के मुताबिक, हाउसिंग प्रोजेक्ट की बिक्री 64 फीसदी प्रभावित हो सकती है तथा कीमतों पर 64 फीसदी तक असर पड़ेगा। इसके अलावा नए लाॅन्च प्रोजेक्ट्स पर 65 फीसदी असर देखने को मिल सकता है। वहीं, ऑफिस स्पेस की मांग में 30 फीसदी की कमी आएगी। वर्ष 2019 में नेट ऑफिस स्पेस 4 करोड़ वर्गफुट था जो कि इस साल घटकर 2.8 करोड़ वर्गफुट तक रह सकता है। रीटेल क्षेत्र 85 लाख वर्ग फुट से 64 फीसदी घटकर 31 लाख वर्गफुट रह सकता है। पहले यह क्षेत्र रीयल एस्टेट में मंदी के बाद भी अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन महामारी की वजह से इनमें गिरावट आना तय है।

एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान

नकदी संकट से जूझ रहे रीयल क्षेत्र में बिक्री आय लगभग थम सी गई है। रीयल्टी कंपनियों के संगठनों के अनुसार, लाॅकडाउन के दौरान इस क्षेत्र को एक लाख करोड़ रुपए से अधिक के नुकसान हो सकता है। हालांकि रीयल्टी सेक्टर केन्द्र सरकार और बैंक से फंडिंग की उम्मीद कर रहा है। इस सेक्टर की रिकवरी को कम से कम एक से दो साल लग सकते हैं।' बता दें कि फिक्की के सर्वे में पहले ही कहा जा चुका है कि कारोबार में रिकवरी मांग की परिस्थितियों और कारोबार के सर्वाइवल पर निर्भर करेगी। नेशनल रीयल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नरेडको) के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि, 'बिक्री पर प्रभाव स्पष्ट दिख रहा है। इसका असर कंपनियों के मुनाफे पर दिखेगा। इसलिए पहली प्रतिक्रिया में रूप में वेतन कटौती हो सकती है। करीब 25 फीसदी तक नौकरियां जा सकती है।'

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