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विश्वभर के अर्थशास्त्रियों पर सर्वे:दुनिया पर मंदी मंडरा रही पर भारत को खतरा नहीं, श्रीलंका के लिए अगला साल और ज्यादा खराब

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली18 दिन पहले
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अगले एक साल के लिए दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं के सामने मंदी का संकट खड़ा हो गया है। दरअसल, महंगाई पर काबू पाने के लिए कई देशों के केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाने को मजबूर हैं। लेकिन, भारत में मंदी की आशंका अभी बिल्कुल भी नहीं है। ब्लूमबर्ग के एक सर्वे में दुनियाभर के अर्थशास्त्रियों ने यह राय व्यक्त की है। सर्वे के मुताबिक, सबसे खराब आर्थिक हालात से गुजर रहे श्रीलंका के लिए अगला साल और ज्यादा खराब साबित हो सकता है। वहां मंदी की आशंका 85% तक है।

एशियाई अर्थव्यवस्थाएं काफी हद तक लचीली बनी
अर्थशास्त्रियों ने न्यूजीलैंड, ताइवान, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस में मंदी छाने की आशंका क्रमश: 33%, 20%, 20% और 8% जताई है। यूरोप और अमेरिका की तुलना में एशियाई अर्थव्यवस्थाएं काफी हद तक लचीली बनी हुई हैं। चीन की बात करें तो उसके मंदी में फंसने की आशंका 20% तक है। वहीं, दक्षिण कोरिया और जापान के मंदी की चपेट में आने की आशंका 25% तक है। जर्मनी, फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों को ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।

एशियाई अर्थव्‍यवस्‍था की स्थिति अमेरिका यूरोप से बेहतर
मूडीज के मुख्‍य अर्थशास्‍त्री (एशिया-प्रशांत) स्‍टीवन कोरेन ने कहा, एशियाई अर्थव्‍यवस्‍थाओं पर मंदी का जोखिम होने के बावजूद इनकी स्थिति अमेरिका और यूरोपीय देशों से बेहतर है. कमोडिटी की बढ़ती कीमतों और महंगाई से जर्मनी, फ्रांस जैसे देश ज्‍यादा परेशान हैं। एशिया में मंदी का जोखिम जहां 20-25% के दायरे में है, वहीं अमेरिका पर इसका खतरा 40% और यूरोप पर 50-55% हो गया है।

ब्‍लूमबर्ग के अनुसार, इटली में मंदी आने की 65% आशंका है, जबकि फ्रांस में 50% और जर्मनी में 45% आशंका है. ब्रिटेन पर भी मंदी आने की 45% आशंका है। ब्रिटेन पर भी मंदी आने की 45% आशंका दिख रही है।