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  • To Help Farmers Get Higher Produce, Govt Wants To Take Use AI And Data Analysis Tools, Will Share Agri Data With Domestic And Foreign Companies

कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार की योजना:सरकार लेना चाहती है डेटा एनालिसिस और AI की मदद, देशी-विदेशी कंपनियों से शेयर करेगी खेती-किसानी के डेटा

एक महीने पहले
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सांकेतिक तस्वीर। - Money Bhaskar
सांकेतिक तस्वीर।

खाद्य सुरक्षा हासिल करने में जुटी सरकार किसानों के डेटा का इस्तेमाल करके सदियों पुराने तरीकों का इस्तेमाल कर रहे कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव लाना चाहती है। इसके लिए उसने अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और सिस्को के साथ ही ITC और जियो प्लेटफॉर्म्स सहित कई इंडियन कंपनियों के साथ करार किया है।

सरकार उपज बढ़ाने में किसानों की मदद के लिए प्राइवेट सेक्टर की मदद लेना चाहती है

सरकार 2014 से जो डेटा जुटा रही है, उसे एक प्रोजेक्ट के तहत अगले साल अप्रैल से इन कंपनियों से शेयर करेगी। सरकार उपज बढ़ाने में किसानों की मदद के लिए प्राइवेट सेक्टर की मदद लेना चाहती है। वह इसके लिए ऐप और टूल के जरिए फसल, मिट्टी की गुणवत्ता और जोत जैसी सूचनाओं का इस्तेमाल करना चाहती है।

ब्राजील, अमेरिका और EU जैसे निर्यातकों से कॉम्पिटिशन करना चाहती है सरकार

सरकार इस प्रोजेक्ट के जरिए कृषि क्षेत्र में लंबे समय से महसूस किए जा रहे सुधार की जरूरत पूरी करेगी। वह ग्रामीण क्षेत्र में लोगों की आमदनी बढ़ाना, आयात घटाना, बेहतर बुनियादी सुविधाओं के जरिए खाने की बर्बादी रोकना चाहती है। वह ब्राजील, अमेरिका और यूरोपियन यूनियन जैसे निर्यातकों से कॉम्पिटिशन करना चाहती है।

विदेशी कंपनियों के पास नेटवर्क, AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करने की गुंजाइश

कंसल्टेंसी फर्म अर्न्स्ट एंड यंग के मुताबिक, 2025 तक भारत की एग्रीटेक इंडस्ट्री का साइज 24 अरब डॉलर का हो सकता है। विदेशी कंपनियों के पास यहां नेटवर्क, AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करने की बहुत गुंजाइश है। अमेजन और रिलायंस जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों को कृषि उत्पादों का टिकाऊ सोर्स मिल सकता है।

यहां टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव में खाने की बर्बादी होती है

EY इंडिया के पार्टनर अंकुर पाहवा के मुताबिक, 'यह हाई इंपैक्ट इंडस्ट्री है यानी यह अपने से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स पर गहरा असर डालती है। निजी कंपनियां यहां मौजूद मौकों को भांपते हुए उनका फायदा उठाना चाहती हैं। यहां टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव में खाने की बर्बादी होती है, इसको देखते हुए इस क्षेत्र में काफी संभावना है।

फसल के ढर्रे, मिट्टी की गुणवत्ता, बीमा, लोन से जुड़े डेटा को AI से एनालाइज कराएगी

सरकार का आइडिया सिंपल है। फसल के ढर्रे, मिट्टी की गुणवत्ता, बीमा, लोन और मौसम से जुड़े डेटा को डेटाबेस में डालकर उसको AI और डेटा एनालिटिक्स के जरिए एनालाइज कराएगी। उससे एग्री सेक्टर को जरूरत के हिसाब से सेवा मुहैया कराई जा सकेगी। यह सेक्टर पैदावार में बढ़त में ठहराव, पानी की कमी, मिट्टी की गुणवत्ता में आ रही गिरावट के अलावा कोल्ड स्टोर जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जूझ रहा है।

सरकार ने 5 करोड़ से ज्यादा किसानों का डेटाबेस तैयार किया है

सरकार ने जोत वाले 12 करोड़ किसानों की पहचान की है और उनमें से 5 करोड़ से ज्यादा किसानों का डेटाबेस तैयार किया है। स्टार एग्रीबाजार टेक्नोलॉजी, ESRI इंडिया टेक्नोलॉजीज, पतंजलि ऑर्गेनिक रिसर्च इंस्टीट्यूट और निंजाकार्ट जैसी कंपनियां सरकार के इस प्रोग्राम का हिस्सा बनी हैं।

किसानों का डर- बड़ी कंपनियां जानकारी का फायदा उठाकर सस्ता खरीदेंगी उपज

लेकिन एग्री सेक्टर से जुड़े इस प्रोजेक्ट में बड़ी कंपनियों को जोड़ने के लिए सरकार की कड़ी आलोचना होने लगी है। आलोचकों का कहना है कि प्रोग्राम में प्राइवेट सेक्टर का दबदबा होगा और छोटे-कमजोर किसानों को दिक्कत होगी। यह सरकार की मुसीबतें बढ़ा सकती है जो पहले से ही कृषि कानून को लेकर सड़कों पर उतरे किसानों से परेशान है।

किसानों का कहना है कि उनसे ज्यादा नुकसान आम लोगों का होगा

किसानों को डर है कि सरकार के इस प्रोग्राम का हिस्सा बनीं बड़ी कंपनियां खेती किसानी से जुड़ी जानकारी का फायदा उठाकर किसानों से उनकी उपज सस्ता खरीदेंगी और बेहद ऊंची कीमत पर बेचेंगी। उनका यह भी कहना है कि इससे ज्यादा नुकसान आम लोगों का होगा।

माइक्रोसॉफ्ट ने AI और मशीन लर्निंग के यूज के लिए 100 गांवों का चुनाव किया

माइक्रोसॉफ्ट ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत AI और मशीन लर्निंग के जरिए प्लेटफॉर्म बनाने के लिए 100 गांवों का चुनाव किया है। अमेजन ने किसानों को मेबाइल ऐप के जरिए रियल टाइम बेसिस पर सलाह देना शुरू भी कर दिया है। वह सॉल्यूशन प्रोवाइडर को क्लाउड सर्विस मुहैया करा रही है।

स्टार एग्रीबाजार के को-फाउंडर अमित मुंडावाला सरकार के प्रोजेक्ट को 'गेम चेंजर' बता रहे हैं। उनकी कंपनी खेती की जमीन का प्रोफाइल तैयार कर रही है। कंपनी इसके अलावा फसल और मौसम के पैटर्न का अनुमान भी लगा रही है।

जरूरी डेटा होने पर उसे जमीनी हकीकत से जोड़ कर देखा जा सकेगा

इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के साउथ एशिया डायरेक्टर पी के जोशी के मुताबिक, 'जरूरी डेटा होने पर उसे जमीनी हकीकत से जोड़ कर देखा जा सकेगा। चीजों को समझ बूझकर वाजिब फैसले लिए जा सकेंगे। यह पता लगाया जा सकेगा, कब और कहां सरकार के दखल देने की जरूरत है।'

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