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  • Three General Insurance Companies Can Get Capital Of 5000 Crores, It Will Be Easy To Follow Regulatory Rules Before Listing

निजीकरण में मिलेगी सहायता:तीन जनरल इंश्योरेंस कंपनियों को मिल सकती है 5000 करोड़ की पूंजी, लिस्टिंग से पहले रेगुलेटरी नियमों का पालन करने में आसानी होगी

नई दिल्ली2 महीने पहले
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सरकार घाटे में चल रही अपनी तीन जनरल इंश्योरेंस कंपनियों को और पूंजी दे सकती है। इससे इन कंपनियों का निजीकरण करने में मदद मिलेगी और इन कंपनियों को लिस्टिंग से पहले रेगुलेटरी नियमों का पालन करने में आसानी होगी। सरकार जिन तीन जनरल इंश्योरेंस कंपनियों को पूंजी दे सकती है, उनमें नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी शामिल हो सकती हैं। इनको लगभग 5,000 करोड़ रुपए की पूंजी की जरूरत होगी।

नेशनल इंश्योरेंस और ओरिएंटल इंश्योरेंस की लिस्टिंग का प्लान

इन कंपनियों को कितनी रकम दी जाएगी, इस बारे में वित्त मंत्रालय जल्द फैसला ले सकता है। सरकार नेशनल इंश्योरेंस और ओरिएंटल इंश्योरेंस को पूंजी देने के बाद उनको शेयर बाजार में लिस्ट कराने पर विचार कर सकती है। नीति आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस का निजीकरण करने का प्रस्ताव कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता में विनिवेश के लिए बनाए गए सचिवों के कोर ग्रुप के पास भेजा है। इस जनरल इंश्योरेंस कंपनी के अलावा दो बैंकों का भी निजीकरण होना है।

पिछले साल तीनों कंपनियों को सरकार ने दिए थे 12,450 करोड़

पिछले हफ्ते ही सरकार ने जनरल इंश्योरेंस बिजनेस (नेशनलाइजेशन अमेंडमेंट एक्ट) का नोटिफिकेशन जारी किया था। इससे सरकार को इन कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 51% से नीचे लाने में मदद मिलेगी। पिछले साल इनको सरकार ने 12,450 करोड़ रुपए दिए थे। सूत्र ने बताया कि सरकार से पूंजी मिलने के बावजूद इन कंपनियों के परफॉर्मेंस में सुधार नहीं आया है। कोविड वाले वित्त वर्ष यानी 2020-21 में ओरिएंटल इंश्योरेंस को 1,525 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। लेकिन इसका सॉल्वेंसी रेशियो 1.52 था।

नेशनल और यूनाइटेड इंश्योरेंस का लॉस 5,000 करोड़ रह सकता है

नेशनल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के पिछले वित्त वर्ष के नतीजे अब तक जारी नहीं हुए हैं। इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI को दी गई जानकारी के मुताबिक, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को वित्त वर्ष 2020 में 4,627 करोड़ रुपए का लॉस हुआ था। मार्च तिमाही में इसका सॉल्वेंसी रेशियो 1.21 था। यूनाइटेड इंडिया को 2019-20 में 1,485 करोड़ रुपए का लॉस हुआ था। इसका सॉल्वेंसी मार्जिन 0.30 था। यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के एक एग्जिक्यूटिव ने बताया कि नेशनल और यूनाइटेड इंश्योरेंस का कुल लॉस 5,000 करोड़ रुपए रह सकता है। इससे इन बीमा कंपनियों का सॉल्वेंसी रेशियो और कम होगा।

जनरल बीमा कंपनियों का 150% सॉल्वेंसी मार्जिन होना जरूरी

बीमा कंपनियों का सॉल्वेंसी रेशियो बैंकों के कैपिटल रेशियो जैसा होता है। इससे पता चलता है कि कंपनी के पास देनदारी के मुकाबले कितना ज्यादा संपत्ति है। इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI के मुताबिक, जनरल बीमा कंपनियों के पास देनदारियों का 1.5 गुना सरप्लस (150% का सॉल्वेंसी मार्जिन) होना जरूरी है।