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  • There May Be A Fall Of 15 To 20% In The Stock Market, The Shares Of Companies Are At The Expensive Level So Far

जबरदस्त तेजी के बाद का असर:शेयर बाजार में 15 से 20% की आ सकती है गिरावट, कंपनियों के शेयर अब तक के महंगे लेवल पर

मुंबईएक महीने पहले
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शेयर बाजार में चल रही जबरदस्त तेजी का असर अब उल्टा हो सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि बाजार में यहां से 15-20% की गिरावट आ सकती है। यानी BSE का सेंसेक्स 900-1100 अंक टूट सकता है।

अगला हफ्ता बाजार के लिए मुश्किलों वाला होगा

स्वस्तिका इन्वेस्टेमार्ट के रिसर्च हेड संतोष मीणा कहते हैं कि अगला हफ्ता बाजार के लिए मुश्किलों वाला होगा। अमेरिका के सेंट्रल बैंक की मीटिंग और चीन में मेटल सेक्टर की दिक्कतों से बाजार पर असर होगा। जापान का भी सेंट्रल बैंक 22 सितंबर को अपनी मॉनिटरी पॉलिसी की घोषणा करेगा। उनका कहना है कि नीचे की ओर निफ्टी का सपोर्ट 17,430 से 17,250 तक के बीच रह सकता है। इसके नीचे जाने पर निफ्टी 16,700 तक जा सकता है।

उनका कहना है कि अगर निफ्टी 17,800 के लेवल को मैनेज कर पाता है तो फिर यह 18 हजार के लेवल को टच कर सकता है। हालांकि निकट समय में इसमें गिरावट दिख सकती है। मिड कैप में शुक्रवार को थोड़ा बिकवाली का दबाव देखा भी गया था।

बाजार की हर तेजी के बाद गिरावट आती है

जानकारों के मुताबिक, बाजार के इतिहास में जब भी ऐसी तेजी आई है, उसमें गिरावट जरूर दिखी है। 15-20% की गिरावट यहां से बाजार में दिख सकती है। हालांकि यह एक सामान्य बात है। पिछले 30 सालों के आंकड़ों को देखें तो 20 साल में जब भी बाजार की तेजी आई है, उसके बाद 15% की गिरावट दिखी है। पिछले 17 महीने से बाजार में जो तेजी है, उसमें अभी तक कोई गिरावट नहीं आई है।

महंगे वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहे हैं शेयर

आंकड़े बताते हैं कि टॉप 500 लिस्टेड कंपनियों को देखा जाए तो इनका शेयर इस समय 32 के PE मल्टीपल पर कारोबार कर रहा है। बाजार की अब तक जितनी भी तेजी आई है, उसमें यह अब तक का सबसे महंगा लेवल है। चाहे वह 2008 की तेजी रही हो, या कोई भी तेजी रही हो। PE मतलब प्राइस टू अर्निंग। यानी किसी कंपनी का शेयर अगर 32 के मल्टीपल PE पर कारोबार कर रहा है तो इसका मतलब हम उसके एक रुपए के शेयर के लिए 32 रुपए दे रहे हैं।

साल 2018 की बाजार की तेजी से तुलना करें तो उस समय टॉप 500 कंपनियों के शेयर 25 के मल्टीपल PE पर कारोबार कर रहे थे। 2008 में भी इसी मल्टीपल PE पर कंपनियों के शेयर कारोबार कर रहे थे।

मिड कैप और स्माल कैप ज्यादा टूट सकते हैं

बाजार की गिरावट में मिड कैप और स्माल कैप ज्यादा पिट सकते हैं। ये 15% की तुलना में 30% तक टूट सकते हैं। कुछ विश्लेषक मानते हैं कि बाजार में करेक्शन का कोई समय तय नहीं है। हो सकता है कि यह अगले हफ्ते हो, हो सकता है कि यह दो महीने बाद हो। जिस माहौल में बाजार है, उस माहौल में यह अनुमान लगा पाना काफी मुश्किल है। 2003 से 2007 के दौरान हर साल करीबन 15% की गिरावट बाजार में दिखी थी। कुछ समय एक साल में दो बार भी गिरावट दिखी थी।

बाजार की तेजी के कई कारण हैं

दरअसल बाजार में इस समय तेजी के कई कारण हैं। त्यौहारी सीजन, आने वाले ढेर सारे अच्छी कंपनियों के IPO, फिर अगले साल बजट जैसे इवेंट हैं। ऐसे में बाजार में तेजी बने रहने का एक कारण है। पिछले एक साल में भारतीय बाजार में लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप में 100 लाख करोड़ रुपए की बढ़त आई है। इसमें से 30% मार्केट कैप वाली कंपनियां ऐसी हैं जो नॉन-प्रमोटर्स की हैं या फिर उसमें जनता की म्यूचुअल फंड या किसी और तरीके से ज्यादा हिस्सेदारी है।