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टैक्स टिप्स:आपके पास सिर्फ 6 दिन बचे हैं टैक्स बचाने के लिए; नहीं किया निवेश तो जानें क्या हैं विकल्प, टैक्स भी बचेगा और कमाई भी होगी

नई दिल्ली3 महीने पहले
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फाइनेंशियल ईयर की आखिरी तारीख में सिर्फ 8 दिन ही बचे हैं, उसमें भी वर्किंग डेज यानी काम करने वाले 6 दिन ही बचे हुए हैं। अब अगर आप टैक्स के दायरे में आते हैं और टैक्स बचाने के लिए आपने जरूरी इन्वेस्टमेंट नहीं किए हैं तो कर लीजिए। हम आपके लिए यहां ऐसे ही कुछ विकल्प बता रहे हैं जिससे आप ना सिर्फ टैक्स बचा पाएंगे बल्कि पैसे से पैसा भी कमा पाएंगे।

जानकारों के मुताबिक, टैक्स बचाने और उस निवेश से कमाने के लिहाज से आप ELSS, नेशनल पेंशन स्कीम और PPF सहित कुछ दूसरी स्कीम्स में पैसा लगा सकते हैं। इन विकल्पों में सबसे ज्यादा फायदेमंद ELSS सबसे फायदेमंद साबित हो सकता है।

इक्विटी लिंक्‍ड सेविंग स्‍कीम (ELSS)
इक्विटी लिंक्‍ड सेविंग स्‍कीम यानी ईएलएसएस म्यूचुअल फंड स्कीम हैं, म्‍यूचुअल फंड की इस स्कीम में निवेश करने पर इनकम टैक्‍स कानून के सेक्‍शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपए तक निवेश पर टैक्स छूट का फायदा उठा सकते हैं। बाजार में मौजूद ईएलएसएस पर लॉक-इन-पीरियड 3 साल है। मतलब ये है कि आप उस स्कीम से 3 साल तक पैसे नहीं निकाल सकते हैं। ELSS के कई फंड्स ने बीते 1 साल में 80% से ज्यादा का रिटर्न दिया है।

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)
मौजूदा प्रावधानों के तहत सेक्शन 80CCD का सब सेक्शन 80CCD (1) के तहत पेंशन स्कीम में जमा पर टैक्स में छूट हासिल कर सकता है। सैलरीड कर्मचारी अपनी सैलरी का 10% तक और नॉन सैलरीड कर्मचारी अपनी कुल इनकम का 20% तक पेंशन अकाउंट में जमा कर छूट पा सकता है, जो अधिकतम 1.5 लाख रुपए है। इसके अलावा एक अन्य सब सेक्शन 80CCD (1B) भी है, जिसके तहत सैलरीड कर्मचारी और सेल्फ एम्लॉयड व्यक्ति अपनी तरफ से NPS अकाउंट में डिपॉजिट कर अतिरिक्त टैक्स छूट का लाभ ले सकता है। यह छूट 50000 रुपए तक की होगी।

NPS ग्राहकों को इक्विटी से एक साल में करीब 12.5-17% तक रिटर्न मिला है। प्रेफरेंशियल शेयर ने 12-14% मुनाफा दिया है, जबकि सरकारी बॉन्ड में निवेश के जरिए एनपीएस ग्राहकों ने 10-15% तक रिटर्न कमाया है।

पोस्ट ऑफिस की सेविंग स्कीम में कर सकते हैं निवेश
पोस्ट ऑफिस की स्मॉल सेविंग स्कीम में निवेश करने पर भी आपको ज्यादा ब्याज के साथ आयकर कानून के सेक्शन 80C के तहत इनकम टैक्स का लाभ भी मिलता है। इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80C में बहुत से ऐसे विकल्प हैं जिसमें निवेश के जरिए आप 1.5 लाख रुपए तक की रकम पर टैक्स बचा सकते हैं। पोस्ट ऑफिस की ऐसी 6 स्कीम्स हैं जिनमें आपको बेहतर रिटर्न के साथ इनकम टैक्स छूट का लाभ भी मिलेगा। ये हैं वो स्कीम्स

स्कीमब्याज
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)7.10
नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC)6.8%
टाइम डिपॉजिट स्कीम6.7%
किसान विकास पत्र (KVP)6.9%
सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम7.40
सुकन्या समृद्धि योजना7.60

टैक्स सेविंग FD में भी हो सकता है ऑप्शन
5 साल वाली FD को टैक्स सेविंग FD कहा जाता है। इसमें निवेश पर आयकर कानून के सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपए तक टैक्स की छूट ली जा सकती है। इसके अलावा टैक्स छूट के लिए आप पोस्ट ऑफिस की FD (टाइम डिपॉजिट स्कीम) में भी निवेश कर सकते हैं। हम आपको बता रहे है कि कौन से बैंक में टैक्स सेविंग FD पर कितना ब्याज मिल रहा है। ये बैंक दे रहे अच्छा ब्याज

बैंकब्याज दर (% में)
DCB बैंक6.75
यस बैंक6.75
पोस्ट ऑफिस6.70
इंडसइंड बैंक6.50
RBL बैंक6.40
एक्सिस बैंक5.75
SBI5.40
ICICI5.35
HDFC5.30
पंजाब नेशनल बैंक5.30

यूलिप प्लान में कर सकते हैं निवेश
अगर आप निवेश के लिए कोई ऐसा ऑप्शन देख रहे हैं जहां निवेश करने पर आपको लाइफ इंश्योरेंस के साथ अच्छा रिटर्न भी मिले तो आप यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) में इन्वेस्ट कर सकते हैं। यूलिप, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी और मार्केट लिंक इंवेस्टमेंट प्रोडक्ट का कॉम्बिनेशन है। इसके तहत प्रीमियम का एक हिस्सा इक्विटी या डेट फंड में निवेश किया जाता है। इससे आपके परिवार को आपके रहने और न रहने पर भी वित्तीय सुरक्षा मिलती है।

यह एक यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान, एक ऐसा प्रोडक्ट है जहां बीमा और निवेश लाभ एक साथ मिलता है। इन्हें बीमा कंपनियों द्वारा पेश किया जाता है। जब आप एक प्रीमियम का भुगतान करते हैं, तो इसका एक हिस्सा बीमा कंपनी द्वारा आपको बीमा कवरेज प्रदान करने के लिए उपयोग किया जाता है और बाकी का कर्ज और इक्विटी प्रतिभूतियों में निवेश करने के लिए उपयोग किया जाता है। यूलिप में निवेश, मार्केट के जोखिमों के अधीन होते हैं और निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का जोखिम उठाना होता है। यूलिप में निवेश करते समय, अपने जोखिम की सीमा पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

इन्वेस्टमेंट का उद्देश सिर्फ टैक्स बचाना नहीं होना चाहिए
केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया बताते हैं कि एक सामान्य नियम के तहत आपको ELSS, PPF या NPS सहित अन्य निवेश विकल्पों में सिर्फ इनके टैक्स लाभ देखने की बजाय इनके रिटर्न, लिक्विडिटी और जोखिम की तुलना करनी चाहिए। ऐसा करने से आप टैक्स बचत के साथ ही बेहतर रिटर्न भी पा सकेंगे। इससे लंबी अवधि के लक्ष्यों को समय पर पूरा करने में भी मदद मिलेगी, जैसे कि रिटायरमेंट के लिए पैसा जुटाना और बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे जमा करना। निवेश करने से पहले आपको ये समझने की जरूरत है कि निवेश का मुक्ष्य उद्देश्य टैक्स बचाना नहीं बल्कि अच्छा रिटर्न कमाना होना चाहिए।