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पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से राहत की मांग:पिछले साल 9 महीने में सरकारी खजाने में पहुंचे 1.36 लाख करोड़ रु, वैट वसूलने में राजस्थान-MP आगे

नई दिल्ली2 महीने पहले
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देश में पेट्रोल-डीजल के दामों को कम करने की मांग होने लगी है। शनिवार को राजस्थान के पेट्रोल-डीजल पंप संचालकों ने पंप बंद रखकर वैट (राज्य सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स) कम कर ने की मांग की। पेट्रोल-डीजल पर वैट वसूलने के मामले में मणिपुर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और असम आगे हैं। देश के कई शहरों में पेट्रोल के दाम 100 रुपए और डीजल के 90 रुपए प्रति लीटर के पार निकल गए हैं।

मणिपुर में वैट सबसे ज्यादा, लक्षद्वीप में वैट नहीं
वैट वसूलने के मामले में मणिपुर सबसे आगे हो गया है। यहां पेट्रोल पर 36.50% और डीजल पर 22.50% टैक्स वसूला जा रहा है। बड़े राज्यों में तमिलनाडु में वैट कम है। यहां पेट्रोल पर 15% और डीजल पर 11% टैक्स वसूला जाता है। लेकिन पेंच यह है कि यहां वैट के साथ पेट्रोल पर 13.02 रुपए और डीजल पर 9.62 रुपए प्रति लीटर सेस (उपकर) भी वसूला जाता है। ज्यादातर राज्य सेस वसूल रहे हैं। लक्षद्वीप एक मात्र ऐसा राज्य है जहां वैट नहीं लिया जाता है।

​​​​​​2019-20 में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की वैट से हुई सबसे ज्यादा कमाई

वैट से कमाई के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है। ​​​​​​2019-20 में वैट के जरिए राज्य सरकार को 26,791 करोड़ रुपए कर कमाई हुई। इसके बाद उत्तर प्रदेश का नंबर आता है उसने 20,112 करोड़ रुपए की कमाई की।

राज्यों को मिलने वाला वैट 5 साल में 43% बढ़ा

राज्यों को पेट्रोल-डीजल पर वैट लगाने से होने वाली कमाई 5 साल में 43% बढ़ी है। वित्त वर्ष 2014-15 में इससे होने वाली कमाई 1.37 लाख करोड़ थी जो 2019-20 में बढ़कर 2 लाख करोड़ पर पहुंच गई। कोरोना के कारण लगाए गए लॉकडाउन के बावजूद चालू वित्त वर्ष 2020-21 की तीनों तिमाही (अप्रैल-दिसंबर) में वैट से 1.36 रुपए करोड़ की कमाई हुई है।

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल पर वसूलती हैं भारी टैक्स

पेट्रोल का बेस प्राइज अभी 33 रुपए और डीजल का बेस प्राइज 34 रुपए के करीब है। इस पर केंद्र सरकार 33 रुपए एक्साइज ड्यूटी वसूल रही है। इसके बाद राज्य सरकारें इस पर अपने हिसाब से वैट और सेस वसूलती हैं, जिसके बाद इनका दाम बेस प्राइज से 3 गुना तक बढ़ गया है।

राज्य के अलग-अलग शहरों में कीमत में अंतर क्यों?
जब पेट्रोल-डीजल किसी पेट्रोल पंप पर पहुंचता है तो वो पेट्रोल पंप किसी ऑयल डिपो से कितना दूर है, उसके हिसाब से उस पर किराया लगता है। इसके कारण शहर बदलने के साथ-साथ किराया बढ़ता-घटता है। जिससे अलग-अलग शहरों में भी कीमत में अंतर आ जाता है।