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भास्कर इंटरव्यू:अमेरिकी फेड रिजर्व का रुख बदला तो बाजार में गिरावट का दौर आ सकता है: निमेश शाह

मुंबई10 महीने पहले
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  • अभी विकास और महंगाई, दोनों तेज हैं। इसलिए ब्याज दर में कटौती की कम संभावना देखते हैं
  • आर्बिट्रेज फंड्स और डायनेमिक असेट एलोकेशन फंड्स का कॉम्बिनेशन भी डेट में निवेश का बेहतर तरीका साबित हो सकता है

शेयर बाजार में हाल तक तेजी का रुख रहा है। म्यूचुअल फंड की स्कीम्स ने अच्छा रिटर्न दिया है। अर्थव्यवस्था में रिकवरी भी तेजी से हो रही है। ऐसे में निवेशक अपना पैसा कहां लगाएं। देश की तीसरी सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनी ICICI प्रूडेंशियल के एमडी निमेश शाह का मानना है कि इनवेस्टर को असेट अलोकेशन की रणनीति अपनानी चाहिए। असेट अलोकेशन का मतलब है कि आपके पास अगर 100 रुपए हैं तो उसमें से कितनी रकम कहां निवेश करें। निमेश शाह के साथ भास्कर की बातचीत के मुख्य अंश:-

सवाल: शेयर बाजार में इतनी तेजी क्यों है? अर्थव्यवस्था और शेयर बाजारों के बीच फर्क को देखते हुए, क्या आपको लगता है कि यह तेजी टिकाऊ है?

जवाब: 2020 को ऐसे साल के रूप में जाना जाएगा जिसमें एक वैश्विक महामारी ने दुनिया भर के इक्विटी बाजारों में अभूतपूर्व तेजी ला दी। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के निवेश से यह रुझान कुछ समय के लिए जारी रह सकता है। इस तेजी के लिए अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा फाइनेंशियल सिस्टम में खरबों डॉलर की रकम डालना भी जिम्मेदार है।

इक्विटी बाजार में बुनियादी सुधार की संभावना कम

जवाब-जब तक इस तरह की रकम आती रहेगी, तब तक इक्विटी बाजार में बुनियादी सुधार की संभावना कम रहती है। हम आम तौर पर मैक्रो इकोनॉमिक डेवलपमेंट के आधार पर अपनी समीक्षा करते हैं। लेकिन यह तब करेंगे जब अगर कच्चे तेल के दाम 60 डॉलर प्रति बैरल के पार कर जाएंगे, पश्चिमी देशों में महंगाई वापस आ जाएगी, RBI के पास साथ सरप्लस लिक्विडिटी (कैश) तेजी से बढ़ती है, वैश्विक बाजार के असेट अंडर मैनेजमेंट में तेजी से गिरावट आती है।

सवाल: इक्विटी के रिटर्न्स को देखते हुए, क्या रिटेल निवेशक को मुनाफा वसूली करनी चाहिए? क्या उन्हें कहीं और निवेश करना चाहिए?

जवाब: निवेश में असेट अलोकेशन का पालन करना हमेशा महत्वपूर्ण होता है। इक्विटी बाजार में आई तेजी ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वैल्यूएशन महंगे हैं। लेकिन कम ब्याज दरों के आधार पर इन्हें देखें तो ये महंगे नहीं दिखाई देते हैं। रिटेल निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि अमेरिकी फेड के रुख में कोई भी बदलाव बाजारों पर नकारात्मक असर डाल सकता है। हम अनुमान नहीं लगा सकते कि ऐसा कब होगा। लेकिन फ़िलहाल, हम ऐसा होने की उम्मीद नहीं करते हैं।

सवाल: केंद्रीय बैंक आगे किस तरह का कदम उठा सकते हैं ?

जवाब: 2018 में बाजार में गिरावट के बाद, जो तेजी आई वह काफी हद चुनिंदा स्टॉक्स पर केंद्रित है। आगे हम उम्मीद करते हैं कि दुनिया भर के सेंट्रल बैंक ग्रोथ आधारित नीतियां बनाएंगे। इससे बाजारों में तेजी बढ़ेगी। इसके अलावा, वैल्यू अभी भी आकर्षक बना हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में मिड और स्मॉल-कैप शेयरों ने बड़े शेयरों को कमजोर कर दिया है। यह ट्रेंड कुछ समय बाद उलट सकता है।

सवाल: स्मॉल और मिड कैप शेयरों पर आपकी क्या राय है?

जवाब: कम ब्याज दर के माहौल में, छोटी और मिड-कैप कंपनियां पूंजी की कम लागत के कारण सबसे अधिक लाभ कमाती हैं। आगे की तिमाहियों में मूलभूत रूप से मजबूत कंपनियों में सुधार की संभावना देखी जा रही है। इसका असर उनके स्टॉक पर भी दिखेगा। इसलिए, यदि कोई अगले पांच वर्षों तक निवेश में बने रहने के लिए तैयार है, तो इक्विटी फंड में निवेश कर सकता है। लेकिन यह निवेश सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के माध्यम से करना चाहिए।

पैसे को अलग-अलग साधन में निवेश करें

किसी एक असेट क्लास में सभी पैसे लगाने की बजाय इक्विटी, डेट, सोना और अन्य एसेट में निवेश करना समझदारी होगी। इससे किसी एक एसेट क्लास में गिरावट आने पर पोर्टफोलियो पर ज्यादा असर नहीं होगा। असेट एलोकेशन स्कीम में निवेश के जरिए भी इसे हासिल किया जा सकता है। इस स्कीम में इक्विटी मार्केट की तेजी का लाभ तो मिलता ही है, डेट मार्केट की स्थिरता भी मिलती है।

सवाल: 2020 की शुरुआत में कुछ घटनाओं के कारण डेट में निवेशकों का विश्वास कम हुआ। 2021 के लिए रिटेल निवेशकों को आप क्या सलाह देंगे?

जवाब: ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के 22 वर्षों के इतिहास में हमने डेट होल्डिंग्स में कभी डिफ़ॉल्ट नहीं किया है। हम लंबे समय से डेट में निवेश की सलाह दे रहे थे। लेकिन आगे जाकर, आर्बिट्रेज फंड्स, अक्रुअल फंड्स और डायनेमिक असेट एलोकेशन फंड्स का कॉम्बिनेशन भी डेट में निवेश का बेहतर तरीका साबित हो सकता है। 2020 में, आरबीआई ने ब्याज दरों में 1.15% की कटौती की। यह ग्रोथ को बढ़ावा देने और लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए किया गया था। अभी विकास और महंगाई, दोनों तेज हैं। इसलिए ब्याज दर में कटौती की कम संभावना देखते हैं।