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कोरोना के खिलाफ आर्थिक मोर्चाबंदी:महामारी की दूसरी लहर से लड़ने के RBI का नया प्लान, पेमेंट बैंक की लिमिट दोगुनी, RTGS और NEFT की सुविधा से ATM बनेगा मोबाइल वॉलेट

मुंबई10 दिन पहले
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लगातार बढ़ रहे कोरोना के नए मामलों से देश की आर्थिक रिकवरी की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने इस संकट से सामना करने के लिए मजबूत मोर्चेबंदी शुरु कर दी है। इसके तहत नए वित्त वर्ष (2021-22) की पहली मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने कई फैसले लिए गए।

अब पेमेंट बैंक के डिपॉजिट लिमिट एक लाख से बढ़ाकर दो लाख कर दी गई है। इससे ऑनलाइन बैंकिंग को बढ़ावा मिलेगा साथ ही फाइनेंशियल सिस्टम में सेटलमेंट रिस्क को कम करने में मदद मिलेगी। रिजर्व बैंक ने बाजार में नगदी की किल्लत भी कम होगी।

डिजिटल पेटेंट कंपनियों के लिए भी NEFT और RTGS सुविधा
RBI ने डिजिटल पेमेंट कंपनियों के लिए भी नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT) और रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) सुविधाओं का दायरा बढ़ाया है। इसके तहत फिनटेक और पेमेंट कंपनियां भी NEFT और RTGS के जरिए पैसे ट्रांसफर कर सकेंगी। अब तक केवल बैंकों के लिए ही यह सुविधा उपलब्ध थी।

रिजर्व बैंक के मुताबिक इससे फाइनेंशियल सिस्टम में सेटलमेंट रिस्क को कम करने में मदद मिलेगी और देश में डिजिटल फाइनेंशियल सर्विसेज को भी बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। यानी अगर आपके पास मोबाइल वॉलेट है तो आप RTGS और NEFT के जरिए किसी को भी पैसा भेज सकते हैं।

पेटीएम-फोनपे जैसे प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPIs) के लिए अकाउंट लिमिट को बढ़ाकर 2 लाख रुपए कर दी है, जो पहले 1 लाख रुपए थी। इससे पेटीएम, गूगलपे सहित फोनपे यूजर्स को बड़ा फायदा मिलेगा। हालांकि इसके लिए फुल KYC अनिवार्य है। आसान भाषा में समझें तो इससे आपका मोबाइल वॉलेट अब एक तरह से ATM बन जाएगा।

डिजिटल पेमेंट में बदलाव पर काम तेज
डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए भी रिजर्व बैंक ने ऐलान किया है। अब पेमेंट बैंक के प्रति ग्राहक के लिए डिपॉजिट लिमिट 2 लाख रुपए कर दी है, जो पहले 1 लाख रुपए थी। यानी दिन के अंत तक एक ग्राहक अकाउंट में अधिकतम दो लाख रुपए ही डिपॉजिट हो सकता है। देश के प्रमुख पेमेंट बैंकों में एयरटेल, पेटीएम, इंडिया पोस्ट जैसे बड़े नाम शामिल हैं। लेकिन ये बैंक कर्ज नहीं दे सकते हैं। ये बैंक डेबिट कार्ड दे सकते हैं, लेकिन क्रेडिट जैसी सुविधा नहीं दे सकते।

RBI ने पेमेंट बैंकों की इस लिमिट को इसलिए बढ़ाया क्योंकि नॉर्मल बैंकों में डिपॉजिट इंंश्योरेंस गारंटी की सीमा अब पांच लाख रुपए हो गई है। पहले यह एक लाख रुपए थी।

TLTRO स्कीम 30 सितंबर तक बढ़ाई गई
शक्तिकांत दास ने कहा कि TLTRO स्कीम की अवधि को अगले छह माह के लिए यानी 30 सितंबर 2021 तक बढ़ाया जा रहा है। Tउन्होंने कहा कि RBI अपने विभिन्न टूल्स के जरिए बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी सपोर्ट देना जारी रखेगा। LTRO का फुल फॉर्म टार्गेटेड लॉन्ग टर्म रेपो ऑपरेशन है। यह एक ऐसा साधन होता है जिससे बैंक रेपो रेट पर रिजर्व बैंक से एक से तीन साल के लॉन्ग टर्म के कर्ज लेते हैं और इसके बदले उन्हें सरकारी या अन्य कोई लंबी अवधि की सिक्योरिटीज जमानत के रूप में रखनी पड़ती है।

50 हजार करोड़ रुपए की आर्थिक मदद
रिजर्व बैंक ने फाइनेंशियल संस्थानों जैसे नाबार्ड, नेशनल हाउसिंग बैंक और सिडबी के लिए 50 हजार करोड़ रुपए की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। इसके तहत नाबार्ड (NABARD) को 25 हजार करोड़ रुपए, नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) को 10 हजार करोड़ रुपए और SIDBI को 15 हजार करोड़ दिए।