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  • SEBI gives relief to brokers and traders, penalty will not be applicable for short collection on submission of 20 percent upfront margin

फैसला /ब्रोकर और व्यापारियों को सेबी ने दी राहत, 20 प्रतिशत अपफ्रंट मार्जिन जमा करने पर शॉर्ट कलेक्शन के लिए पेनाल्टी लागू नहीं होगी

सेबी के इस फैसले से ब्रोकर्स को राहत मिली है और इससे वे अपफ्रंट मार्जिन में पेनाल्टी चुकाने से बच जाएंगे सेबी के इस फैसले से ब्रोकर्स को राहत मिली है और इससे वे अपफ्रंट मार्जिन में पेनाल्टी चुकाने से बच जाएंगे

  • सेबी के इस नियमो से ब्रोकर्स और व्यापारियों को दो दिन का समय मिलेगा
  • मार्जिन मुख्य रूप से इक्विटी और कमोडिटी डेरिवेटिव में लिया जाता है

मनी भास्कर

Jul 31,2020 07:14:43 PM IST

मुंबई. ब्रोकर और व्यापारियों को सेबी ने बड़ी राहत दी है। सेबी ने शुक्रवार को कहा कि अगर ट्रेडिंग मेंबर्स क्लाइंट से कम से कम 20 फीसदी अपफ्रंट मार्जिन जमा करते हैं तो शॉर्ट कलेक्शन के लिए पेनाल्टी लागू नहीं होगी। यह फैसला निवेशकों, ट्रेडिंग मेंबर्स (टीएमएस) या क्लियरिंग मेंबर्स (सीएम) और स्टॉक ब्रोकर असोसिएशंस से रिप्रजेंटेशन मिलने के बाद लिया गया है।

वास्तविक मामलों को मार्जिन पेनाल्टी से छूट मिलेगी

सेबी ने एक सर्कुलर में कहा कि अगर टीएम/सीएम क्लाइंट से वीएआर (वैल्यू एट रिस्क) और ईएलएम (एक्सट्रीम लॉस मार्जिन) के बदले कम से कम 20 फीसदी अपफ्रंट मार्जिन जमा करते हैं तो शॉर्ट कलेक्शन/मार्जिन का कलेक्शन न करने पर जुर्माना लागू नहीं होगा। विश्लेषकों के मुताबिक इस नियम को शामिल करने का मतलब होगा कि उन मामलों में कोई जुर्माना लागू नहीं होगा जहां मार्जिन वास्तव में ली गई थी और 20 प्रतिशत से अधिक सदस्य हैं। वास्तविक मामलों को मार्जिन पेनाल्टी से छूट मिलेगी।

कैश सेगमेंट में पेनाल्टी एक सितंबर से लागू होगी

हालांकि सेबी ने कहा कि क्लीयरिंग कॉरपोरेशन वीएआर और ईएलएम के आधार पर टीएम/सीएम से अग्रिम मार्जिन एकत्र करना जारी रखेगा। कैश सेगमेंट में शॉर्ट कलेक्शन या अपफ्रंट मार्जिन का कलेक्शन न करने के लिए पेनाल्टी एक सितंबर, 2020 से लागू होगी। इस महीने की शुरुआत में स्टॉक ब्रोकर्स असोसिएशन अनमी ने सेबी को पत्र लिखकर कैश सेगमेंट में मार्जिन कलेक्शन फ्रेमवर्क पर चिंता जताई थी। इसने कहा था कि इससे ब्रोकर्स और उनके क्लाइंट्स को दिक्कत होगी।

मार्जिन का मतलब सुरक्षा से है

इसने बिक्री की स्थितियों पर मार्जिन लगाने की प्रक्रिया पर चिंता व्यक्त की थी। इससे डिलिवरी, ओपन पोज़िशन्स पर मार्जिन और टी+2 दिन (कारोबार वाले दिन के साथ दो दिन ) में वितरित की जाने वाली सिक्योरिटीज पर मार्जिन लगाई जाती है। बाजार की भाषा में, मार्जिन न्यूनतम फंड या सुरक्षा है। एक निवेशक को ट्रेड करने से पहले स्टॉक ब्रोकर्स को मार्जिन देनी होती है। यह मूल रूप से इक्विटी और कमोडिटी डेरिवेटिव में व्यापार के जोखिम के लिए एडवांस लिया जाता है।

मार्जिन लेने के लिए दो दिनों का समय होगा

टीएम या सीएम के पास अपने ग्राहकों से मार्जिन इकट्ठा करने के लिए टी + 2 (ट्रेडिंग डे प्लस टू) कार्य दिवसों तक का समय होगा। सेबी ने कहा था कि टी+2 दिनों की अवधि को टीएमएस/सीएम को ग्राहकों से मार्जिन एकत्र करने की अनुमति दी गई है, जो अक्सर उनके सामने आने वाली कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए केवल जुर्माना लगाने के उद्देश्य से लगाया जाना चाहिए। इसे यह नहीं समझा जाना चाहिए कि ग्राहकों को उनसे मार्जिन का भुगतान करने के लिए 2 दिन की अनुमति दी गई है।

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सेबी के इस फैसले से ब्रोकर्स को राहत मिली है और इससे वे अपफ्रंट मार्जिन में पेनाल्टी चुकाने से बच जाएंगेसेबी के इस फैसले से ब्रोकर्स को राहत मिली है और इससे वे अपफ्रंट मार्जिन में पेनाल्टी चुकाने से बच जाएंगे

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