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  • SEBI Eases Startups Listing Rules, 25% Holding For One Year Is New Norm

निवेशकों की जिंदगी हुई ईजी:स्टार्टअप्स की लिस्टिंग के नियम सेबी ने बनाए आसान, दो के बजाए सिर्फ एक साल 25% होल्डिंग रखना काफी होगा

7 महीने पहले
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  • सेबी ने एंकर इनवेस्टर्स को 30 दिन के लॉक इन पीरियड के साथ इश्यू के 60% तक का अलॉटमेंट किए जाने की सिफारिश की है
  • कंपनी में अब एक शेयरहोल्डर की हिस्सेदारी 49% हो जाएगी तो उनको बाकी शेयरहोल्डर के लिए ओपन ऑफर लाना होगा

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने निवेशकों के लिए स्टार्टअप और अर्ली स्टार्टअप से निकलना आसान बना दिया है। अब से जिस स्टार्टअप में निवेशक के एक ग्रुप की होल्डिंग 25% कम से कम एक साल तक रहेगी, वह IGP पर लिस्ट होने लायक बन जाएगी। पहले स्टार्टअप की लिस्टिंग के लिए एक इनवेस्टर ग्रुप की इतनी होल्डिंग का कम से कम दो साल रहना जरूरी था। इसकी घोषणा गुरुवार को सेबी की बोर्ड मीटिंग के बाद की गई थी।

NSE का इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म (IGP) नई पीढ़ी की कंपनियों के लिए बनाया गया पब्लिक प्लेटफॉर्म है। यहां से ये कंपनियां फंड जुटा सकती हैं और निवेशकों को अपना पैसा निकालने का मौका भी देती हैं।

एंकर इनवेस्टर्स को इश्यू का 60% तक अलॉटमेंट किया जा सकेगा

सेबी ने एंकर इनवेस्टर्स को 30 दिन के लॉक इन पीरियड के साथ इश्यू के 60% तक का अलॉटमेंट किए जाने की सिफारिश की है। सेबी ने कंपनियों को प्रमोटर को सुपीरियर वोटिंग राइट्स इश्यू किए जाने की भी इजाजत दी है। उसने कहा कि जिन कंपनियों ने प्रमोटरों या उनको शुरू करने वाले फाउंडर को सुपीरियर वोटिंग राइट्स जारी किए हैं, उनको IGP पर लिस्ट होने की इजाजत होगी।

होल्डिंग 25% के बजाय 49% होने पर ओपन ऑफर लाना जरूरी होगा

इसके अलावा कंपनी में अब एक शेयरहोल्डर की हिस्सेदारी 49% हो जाएगी तो उनको बाकी शेयरहोल्डर के लिए ओपन ऑफर लाना होगा। पहले इस तरह ओपन ऑफर ट्रिगर होने के लिए मेनबोर्ड की तरह यहां 25% की शेयरहोल्डिंग लिमिट तय की गई थी।

75% शेयरों का ऑफर मंजूर होने पर डीलिस्टिंग को कामयाब माना जाएगा

IGP पर डीलिस्टिंग के नियमों को भी उदार बनाया गया है। डीलिस्टिंग को तभी कामयाब माना जाएगा जब कंपनी के टोटल शेयरों का 75% और पब्लिक होल्डिंग का 50% हिस्सा ऑफर किया जाएगा और उनको कंपनी की तरफ से स्वीकार किया जाएगा।

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