पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Market Watch
  • SENSEX48690.8-0.96 %
  • NIFTY14696.5-1.04 %
  • GOLD(MCX 10 GM)475690 %
  • SILVER(MCX 1 KG)698750 %
  • Business News
  • SC Issues Guidelines For Cheque Bounce Cases, Asks Govt To Amend Laws

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

चेक बाउंस मामला:सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को कानून में बदलाव का निर्देश, कहा- एक साल में दर्ज सभी मामलों को जोड़कर एक मुकदमा चलाया जाए

नई दिल्लीएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा- निचली अदालतों को जरूरी निर्देश दें सभी हाईकोर्ट
  • चेक बाउंस के मामले में हलफनामे के जरिए साक्ष्य दिए जा सकते हैं

चेक बाउंस के मामलों के जल्द से जल्द निपटारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कई दिशा-निर्देश दिए। इसमें कानून में बदलाव संबंधी निर्देश भी शामिल हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि कानून में ऐसा बदलाव किया जाए जिससे किसी व्यक्ति के खिलाफ एक साल में दर्ज हुए चेक बाउंस के सभी मामलों को जोड़कर एक मुकदमा चलाया जाए।

देश में 35 लाख से ज्यादा मामले लंबित

चीफ जस्टिस एसए बोवड़े की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने सुझाव दिया कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट में ऐसे बदलाव किए जाएं कि एक व्यक्ति के खिलाफ सेक्शन 138 के तहत 12 महीने में दर्ज सभी मामलों को जोड़कर एक ही मुकदमा चलाया जाए। पूरे देश में कुल 2.31 करोड़ से ज्यादा आपराधिक मुकदमे लंबित हैं। इसमें से 35.16 लाख मुकदमे चेक बाउंस से संबंधित हैं। एमीकस क्यूरी के मुताबिक, चेक बाउंस की शिकायतों की संख्या निपटारा किए जाने वाले मामलों से ज्यादा है।

देशभर की हाईकोर्ट को दिए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसले को दोहराते हुए सभी हाईकोर्ट से कहा कि चेक बाउंस के मामलों के जल्द निपटारों को लिए वे निचली अदालतों को दिशा-निर्देश जारी करें। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि चेक बाउंस के मामलों में हलफनामे के जरिए साक्ष्यों को पेश किया जा सकता है। इन मामलों में गवाहों को बुलाकर जांच करने की जरूरत नहीं है। अब इस मामले पर 8 हफ्ते बाद तीन जजों की पीठ विचार करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 5 मार्च को स्वत: संज्ञान लिया था

चेक बाउंस के मामलों में तेजी लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 5 मार्च को स्वत: संज्ञान लिया था। इसके लिए कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा और एडवोकेट के परमेश्वर को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था। एमीकस क्यूरी का किसी भी मुकदमे से सीधे कोई मतलब नहीं होता है। यह केवल अदालत की मदद करता है जिससे मुकदमे पर असर पड़ता है।

10 मार्च को गठित की थी समिति

सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 10 मार्च को एक समिति गठित की थी। इस समिति की अध्यक्षता बंबई हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर सी चव्हाण कर रहे हैं। इस समिति से देशभर में चेक बाउंस के मामलों के जल्द निस्तारण के लिए उठाए जाने वाले कदमों को लेकर रिपोर्ट मांगी है। समिति को तीन महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करनी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिन मुद्दों का उसने विचार नहीं किया है, उन पर यह समिति विचार करेगी।