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बढ़ सकता है AGR का पैसा चुकाने का समय:जियो के एकाधिकार को रोकने के लिए सरकार दे सकती है राहत पैकेज, वोडाफोन और एयरटेल को होगा फायदा

मुंबई2 महीने पहले
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टेलीकॉम सेक्टर में सरकार जियो के एकाधिकार को रोकना चाहती है। इसलिए वह वोडाफोन आइडिया और एयरटेल को राहत पैकेज दे सकती है। खबर है कि सरकार एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) को चुकाने का समय 20 साल तक बढ़ा सकती है।

वोडाफोन के अधिकारी टेलीकॉम सेक्रेटरी से मिले

जानकारी के मुताबिक, इस संबंध में वोडाफोन आइडिया के MD रविंदर टक्कर और अन्य अधिकारियों ने टेलीकॉम सेक्रेटरी अंशू प्रकाश से पिछले हफ्ते मुलाकात की है। सरकार टेलीकॉम सेक्टर को राहत पैकेज दे सकती है। इसका सीधा फायदा वोडाफोन आइडिया और एयरटेल को हो सकता है। टेलीकॉम विभाग ने वोडाफोन आइडिया से कहा है कि वह राहत पैकेज मिलने के बाद का ब्यौरा दे कि कैसे आगे कंपनी चलेगी।

सरकार ने मांगा आगे का ब्यौरा

सरकार इस ब्यौरे में यह जानना चाहती है कि वोडाफोन आइडिया का निवेश क्या और कैसे होगा। कैसे यह प्रति ग्राहक से कमाई को बढ़ाएगी। साथ ही 5G के लिए बिजनेस प्लान क्या होगा। वोडाफोन आइडिया पर 1.92 लाख करोड़ रुपए देनदारी है। इसमें से 58,254 करोड़ रुपए AGR का बकाया है। AGR में से कंपनी ने 7,854 करोड़ रुपए चुका दिए हैं। AGR की कुल रकम उसे 10 साल में चुकाना है। इसकी अगली किस्त मार्च 2022 में देना है। यह किस्त 9,000 करोड़ रुपए की होगी।

एयरटेल पर 25,980 करोड़ रुपए का बकाया

एयरटेल की बात करें तो इसके ऊपर AGR का 43,980 करोड़ रुपए बाकी हैं। इसने 18 हजार करोड़ रुपए चुकाए हैं। इसे मार्च 2022 में 4,500 करोड़ रुपए की किस्त देना है। AGR की रकम देने के लिए सुप्रीमकोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को 10 साल का समय दिया है। सरकार अब उसे बढ़ाकर 20 साल कर सकती है।

सरकार कानूनी सलाह लेगी

सरकार इस मामले में कानूनी सलाह भी लेगी कि वह 20 साल का समय कर सकती है या नहीं। क्योंकि 10 साल का समय सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। यह समय मार्च 2031 में पूरा होगा। कैबिनेट ने पहले ही 20 साल का समय मंजूर किया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे नहीं माना। सरकार इस मामले में टेलीकॉम सेक्टर को बचाने, बैंकों के कर्ज और कर्मचारियों की नौकरी बचाने का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट सकती है। हाल में रिजल्ट के समय वोडाफोन आइडिया के एमडी रविंदर टक्कर ने कहा था कि सरकार के पास यह ताकत है कि वह AGR का बकाया चुकाने के लिए और समय दे सकती है।

वोडाफोन आइडिया को पैसा जुटाना होगा

जानकारों का मानना है कि वोडाफोन आइडिया को पैसा जुटाना होगा। साथ ही टैरिफ बढ़ाना होगा और सरकार को राहत देना होगी। इसके बिना कंपनी का चलना मुश्किल है। वोडाफोन पिछले साल से 25 हजार करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रही है। पर उसे कोई निवेशक नहीं मिल रहा है। कंपनी का शेयर पिछले 15 दिनों में 40% से ज्याटा टूट चुका है। इस साल जनवरी में एक शेयर का भाव 13.80 रुपए पर था। यह फिलहाल 7 रुपए से नीचे कारोबार कर रहा है। मई में वोडाफोन आइडिया के 42.80 लाख ग्राहक घटे थे जबकि जून में 42.90 लाख ग्राहक घट गए थे। फिलहाल इसके 27 करोड़ से कम ग्राहक हैं।

लगातार ग्राहक घट रहे हैं

मई में एयरटेल के 46.10 लाख ग्राहक तो घटे, पर जून में इसके ग्राहकों की संख्या 38.1 लाख बढ़ गई थी। जियो के ग्राहक मई में 35.5 लाख बढ़े और जून में 54.7 लाख बढ़े थे। सरकार का जो बकाया वोडाफोन आइडिया पर है, उसमें 96,300 करोड़ रुपए स्पेक्ट्रम का पेमेंट है। 43,980 करोड़ रुपए का AGR है। इसके अलावा बैंकों का 23,100 करोड़ रुपए बकाया हैं। इसमें काफी पैसा सरकारी बैंकों का है । इसके अलावा हजारों करोड़ रुपए की बैंक गारंटी भी है। साथ ही AGR, स्पेक्ट्रम और बैंक के लोन पर ब्याज अलग से बकाया है। मार्च तक वोडाफोन आइडिया के पास केवल 350 करोड़ रुपए का कैश बैलेंस था।

तीन साल में 13.20 करोड़ ग्राहक घटे

वोडाफोन को लगातार झटका लग रहा है। इसके ग्राहक घट कर 26.8 करोड़ पर आ गए हैं। 2018 में इसके 40 करोड़ ग्राहक थे। यानी 3 सालों में इसके 13.20 करोड़ ग्राहक घट गए हैं। अप्रैल से जून की तिमाही में इसकी प्रति ग्राहक कमाई घट कर 105 रुपए हो गई है। जियो की कमाई 138 और एयरटेल की 145 रुपए प्रति ग्राहक है। वोडाफोन को बने रहने के लिए प्रति ग्राहक 200 रुपए की कमाई करनी होगी। वोडाफोन को अप्रैल-जून तिमाही में 7 हजार 319 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था।