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RBI मॉनिटरी पॉलिसी:ओमिक्रॉन ने बढ़ाई सेंट्रल बैंक की चिंता, ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद नहीं

नई दिल्ली8 महीने पहले
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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) आज मॉनिटरी पॉलिसी पेश करेगी। इस बार कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के कारण उम्मीद की जा रही है कि रेपो और रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होगा।

पिछले साल, मार्च में सेंट्रल बैंक ने रेपो रेट में 75 बेसिस पॉइंट्स (BPS) और मई में 40 BPS की दो कटौती की थी। इन कटौतियों के बाद रेपो रेट 4% के रिकॉर्ड लो लेवल पर आ गया था।

तब से लेकर अब तक दरों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है। RBI गवर्नर शक्तिकांत दास आज मुंबई में सुबह 10 बजे एक वेबकास्ट के माध्यम से MPC के फैसले की जानकारी देंगे।

इंटरेस्ट रेट 4% रहने का अनुमान
रॉयटर्स ने मॉनिटरी पॉलिसी को लेकर 50 अर्थशास्त्रियों का एक पोल किया है। इस पोल में सामने आया है कि RBI अपने बेंचमार्क इंटरेस्ट रेट को 4% और रिवर्स रेपो रेट को 3.35% पर बरकरार रखेगा।

ब्लूमबर्ग ने भी 28 अर्थशास्त्रियों का सर्वे किया है। इस सर्वे में भी अर्थशास्त्रियों ने छह सदस्यीय मॉनिटरी पॉलिसी के इंटरेस्ट रेट को 4% पर रखने का अनुमान जताया है।

पॉलिसी रेट को तय करने में रिटेल इन्फ्लेशन का ध्यान रखा जाता है। ऐसे में RBI के लिए पॉलिसी रेट का निर्णय लेते समय ये राहत वाली बात होगी कि महंगाई जुलाई से उसके 2% से 6% के टारगेट रेंज में है।

फरवरी से पॉलिसी नॉर्मलाइजेशन शुरू होने की उम्मीद
मॉर्गन स्टेनली के अर्थशास्त्रियों ने कहा, 'हम RBI से दिसंबर में रिवर्स रेपो रेट में 15-20 BPS की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन नए कोविड-19 वैरिएंट से पैदा हुई अनिश्चितता को देखते हुए, अब दरों में बदलाव की उम्मीद नहीं है।'

अर्थशास्त्रियों ने कहा, 'सेंट्रेल बैंक नए वैरिएंट के रिस्क को समझने के लिए इंतजार कर सकता है। यदि नए वैरिएंट का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, तो हम फरवरी से रिवर्स रेपो रेट में बढ़ोतरी के साथ पॉलिसी नॉर्मलाइजेशन शुरू होने की उम्मीद करते हैं।'

पॉलिसी नॉर्मलाइजेशन को लेकर भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चीफ इकोनॉमिस्ट सौम्य कांति घोष ने कहा, 'महामारी के आने के बाद से, RBI ने हमेशा संतुलन बनाए रखने की कोशिश है, और महामारी अभी खत्म नहीं हुई है।'

रेपो रेट क्या है?
रेपो रेट उसे कहते हैं जिस पर बैंक शॉर्ट-टर्म बेसिस पर RBI से लोन लेते हैं। अभी लोन की दर 4% है। पॉलिसी के तहत, बैंकों को गवर्नमेंट सिक्योरिटीज को कोलेटरल के रूप में RBI को देना होता है और बाद में पूर्व-निर्धारित समय पर वापस खरीदना होता है। रेपो रेट के जरिए RBI लिक्विडिटी को रेगुलेट करता है।

रेपो रेट जितना ज्यादा होगा उतना महंगा ही बैंकों के लिए RBI का लोन होगा। अगर बैंको को RBI से महंगा लोन मिलेगा तो उन्हें भी अपने लोन की दरों को बढ़ाना होगा और ग्राहकों की EMI पर इसका सीधा असर होगा। RBI रेपो रेट को तब कम करता है जब इकोनॉमिक ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए मार्केट में ज्यादा पैसा इंफ्यूज करने की जरूरत होती है।

रिवर्स रेपो रेट क्या है?
रिवर्स रेपो वह रेट है जिस पर RBI बैंकों से पैसा लेता है। फिलहाल RBI फिक्स्ड रेट रेपो विंडो में 3.35% पर बैंको से पैसा लेता है। हालांकि, उस विंडो में पैसे लेने की अधिकतम सीमा 2 लाख करोड़ रुपए हैं।

बैंक अपने बैलेंस एक्सेस लिक्विडिटी को वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) ऑक्शन्स में RBI को उधार दे सकते हैं। ये 7-दिन, 14-दिन या 28-दिन के रिवर्स रेपो ऑक्शन होते हैं। फिलहाल की स्थिति में इन ऑक्शन्स में बैंकों को 3.8%-3.99% का इंटरेस्ट मिल रहा है।

जब इकोनॉमी में महंगाई बढ़ जाती है, तब RBI रिवर्स रेपो रेट को बढ़ाकर बैंकों को सेंट्रल बैंक में पैसा जमा करने के लिए प्रोत्साहित करता है। इससे मार्केट में मौजूद एक्सेस फंड को अब्जॉर्ब करने में मदद मिलती है।

रेपो और रिवर्स रेपो में 65 बेसिस पॉइंट का अंतर
सामान्य तौर पर रेपो और रिवर्स रेपो रेट का अंतर 25 बेसिस पॉइंट का होता है, लेकिन RBI ने कोविड-19 के दौरान अंतर को 65 बेसिस पॉइंट तक बढ़ने दिया है।

2018 और 2019 में सुस्ती और 2020 में COVID-19 के फैलने से भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत बहुत खराब हो गई थी। ऐसे में दुनिया के अधिकांश केंद्रीय बैंकों की तरह, भारतीय रिजर्व बैंक ने भी इकोनॉमी को बूस्ट देने के लिए ब्याज दरों में कटौती की।

अभी भी इकोनॉमी पर से कोरोना का संकट खत्म नहीं हुआ है। RBI ने महामारी के बाद से ही बॉन्ड और डॉलर खरीदकर और पैसे प्रिंट कर सिस्टम में सरप्लस लिक्विडिटी सुनिश्चित की है।