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  • Railways Lost 71 Percent Passenger Revenue This Financial Year, Annual Freight Revenue Increased By 2 Percent

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कोविड का असर:रेलवे को यात्री सेवा से होने वाली इनकम 71% घटी, लेकिन माल ढुलाई की आमदनी में हुआ 2% इजाफा

2 महीने पहले
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  • ज्यादा ढुलाई के साथ ज्यादा स्पीड का भी फायदा हुआ है जो कोविड के पहले से डबल हो गया है
  • पिछले एक साल में रेलवे की माल ढुलाई में बढ़ोतरी की वजह गैर परंपरागत सामान की ज्यादा ढुलाई है

रेलवे को पिछले एक साल में कोविड के चलते यात्री सेवा से भले ही 38,017 करोड़ रुपए का लॉस हुआ, लेकिन श्रमिक स्पेशल रेल चलाने से मिली वाहवाही ने उसकी कुछ हद तक भरपाई कर दी। उसने पिछले साल आवश्यक सामग्री की ढुलाई सुविधा शुरू की और ढुलाई के काम में इनोवेशन किए जिससे माल भाड़े से हासिल आमदनी में सालाना आधार पर दो पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई। रेलवे को ज्यादा ढुलाई के साथ ज्यादा स्पीड का भी फायदा मिला है जो कोविड के पहले से डबल हो गया है।

माल ढुलाई से होने वाली आमदनी सामान्य रखने पर जोर

सामान्य रेल सेवा अब भी शुरू नहीं हो पाई है, ऐसे में रेलवे का पूरा जोर माल ढुलाई से होने वाली आमदनी को सामान्य बनाए रखने पर है। उसकी आमदनी में 22 मार्च तक पिछले एक साल में सिर्फ 1,868 करोड़ रुपए यानी महज 2% का इजाफा हुआ लेकिन इससे कोरोनावायरस के चलते हुए लॉकडाउन की मुसीबतों के बीच उसको बड़ा सपोर्ट मिला है।

रेलवे को यात्री सेवा से हुई आमदनी में 71.03% की गिरावट

रेलवे को पिछले वित्त वर्ष में यात्री सेवा से 53,525.57 करोड़ रुपए की आमदनी हुई थी लेकिन इस वित्त वर्ष में अब तक यह 71.03% की गिरावट के साथ सिर्फ 15,507.68 करोड़ रुपए रह गई। इस वित्त वर्ष में फरवरी 2021 तक रेलवे को यात्री सेवा से 12,409.49 करोड़ रुपए की आमदनी हुई थी, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 48,809.40 करोड़ रुपए रही थी।

दूध, दवाओं और वेंटिलेटर के लिए पार्सल सर्विस शुरू की

लॉकडाउन के चलते यात्री सेवाएं रेलवे ने बंद कर दी थीं लेकिन प्रवासी मजदूरों को घरों तक पहुंचाने के लिए 1 मई को श्रमिक स्पेशल रेलगाड़ियां चलाई थी। उसने 1 मई से 30 अगस्त तक 4000 ज्यादा स्पेशल ट्रेन से 23 राज्यों 63.15 लाख श्रमिकों को उनके गांव घर तक पहुंचाया था। इस बीच रेलवे ने मौके का फायदा उठाने के लिए माल ढुलाई को लेकर बड़े बदलाव किए और दूध, दवाओं और वेंटिलेटर के लिए पार्सल सर्विस शुरू की।

नया बिजनेस जुटाने के लिए बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट बनाए गए

रेलवे को कोविड के दौरान मौकों की पहचान करने और इनोवेशन के जरिए उनको भुनाने से नए वित्त वर्ष में फायदा होगा। उसने कस्टमर्स से नया बिजनेस जुटाने के लिए रेलवे बोर्ड, जोनल रेलवे और डिविजनल लेवल पर बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट बनाए हैं। उसने कूरियर और ईकॉमर्स कंपनियों को भरोसेमंद सेवा देने के लिए पक्के टाइम टेबल वाली पार्सल सर्विस शुरू की है।

माल ढुलाई में बढ़ोतरी की वजह गैर परंपरागत सामान की ज्यादा ढुलाई

अगर माल ढुलाई की बात करें तो यह इस वित्त वर्ष में 22 मार्च तक 119.176 करोड़ टन रही थी। पिछले वित्त वर्ष इस दौरान 118.599 करोड़ टन माल की ढुलाई हुई जो पिछले साल से लगभग 5 लाख टन ज्यादा है। पिछले एक साल में रेलवे की माल ढुलाई में बढ़ोतरी की वजह गैर परंपरागत सामान की ज्यादा ढुलाई है। इस दौरान केमिकल सॉल्ट की ढुलाई में सालाना 439%, रेत में 274%, कॉटन में 266%, प्याज में 234% और ऑटोमोबाइल में 84% की बढ़ोतरी हुई।

किसान रेल सेवा से भी कृषि उत्पादों की ढुलाई में इजाफा हुआ है

जुलाई 2020 में शुरू किसान रेल सेवा से कृषि उत्पादों की ढुलाई में इजाफा हुआ है। सरकार ने इन सेवा के अंदर फलों और सब्जियों की ढुलाई पर 50% की सब्सिडी दी। रेलवे को ज्यादा ढुलाई के साथ ज्यादा स्पीड का भी फायदा मिला है जो कोविड के पहले के 23.71 किलोमीटर प्रति घंटे से डबल होकर लगभग 45.36 प्रति घंटा हो गया है।

चल रही हैं 2402 मेल/एक्सप्रेस ट्रेन, 5381 उपनगरीय रेल और 851 पैसेंजर ट्रेन

फिलहाल रेलवे 8,634 स्पेशल ट्रेन चला रही है जिनमें 2402 मेल और एक्सप्रेस ट्रेन, 5381 उपनगरीय रेल और 851 पैसेंजर ट्रेन शामिल हैं। रेलवे की 75 पर्सेंट मेल और एक्सप्रेस ट्रेन चालू हो चुकी हैं लेकिन पैसेंजर ट्रेनों में सिर्फ 18 पर्सेंट ही चालू हैं। कोविड से पहले रोजाना 11,319 ट्रेनें चल रही थीं जिनमें से 65% यानी 7377 रेलगाड़ियां फिर से चलने लगी हैं। रेलवे अपनी यात्री सेवाएं शुरू कर चुकी है लेकिन ट्रेन थोड़े ज्यादा किराए के साथ स्पेशल दर्जे के साथ चल रही हैं।

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