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  • Power Ministry Gave Instructions To NTPC And DVC, Said – Supply Only As Much As Is Needed In Delhi

कोयला संकट पर एक्शन में PMO:प्रधानमंत्री कार्यालय आज थर्मल पावर स्टेशनों पर कोल स्टॉक की समीक्षा करेगा; NTPC, DVC को दिल्ली को पर्याप्त बिजली देने के निर्देश

नई दिल्ली7 दिन पहले
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के कुछ राज्यों में बिजली संकट की आहट शुरू हो गई है। देश के कई पावर प्लांट्स में 3 से 5 दिन का ही कोल स्टॉक बचा है। आशंका जताई जा रही है कि आगे हालात और बिगड़ सकते हैं। इस बीच आज प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO थर्मल पावर स्टेशनों पर कोयले के स्टॉक की समीक्षा करेगा। वहीं कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कल 1.94 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति की है। ये घरेलू कोयले की अब तक की सबसे ज्यादा सप्लाई है। जहां तक ​​राज्यों का सवाल है तो इस साल जून तक उनसे स्टॉक बढ़ाने को कहा है। इससे पहले बिजली मंत्रालय ने नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (NTPC) और दामोदर वेली कॉर्पोरेशन (DVC) को निर्देश दिए हैं कि वे दिल्ली में मांग के मुताबिक बिजली सप्लाई करना जारी रखें।

दिल्ली को मांग के मुताबिक ही मिलेगी बिजली
बिजली मंत्रालय ने कहा कि दिल्ली की कंपनियों को उनकी मांग के मुताबिक ही बिजली दी जाएगी। पिछले 10 दिनों में दिल्ली डिस्कॉम की घोषित क्षमता (DC) के आधार पर बिजली मंत्रालय ने 10 अक्टूबर को 2021 को NTPC और DVC को यह निर्देश जारी किए थे। इसका मतलब यह है कि दिल्ली को जितनी बिजली की जरूरत होगी, उतनी ही सप्लाई की जाएगी। इससे कम बिजली मिलने की शिकायत दूर होगी।

क्या निर्देश जारी किए गए हैं?

  • NTPC और DVC दिल्ली डिस्कॉम्स को उनके कोल बेस्ड पावर स्टेशन से संबंधित पावर पर्चेज एग्रीमेंट (PPA) के तहत डिक्लेयर्ड कैपेसिटी की पेशकश कर सकते हैं। दिल्ली डिस्कॉम्स जितनी बिजली की मांग करती हैं, उतनी बिजली दोनों कंपनियां उपलब्ध करवाएंगी।
  • NTPC दिल्ली डिस्कॉम्स को उनके आवंटन (गैस बेस्ड पावर स्टेशन) के अनुसार डिक्लेयर्ड कैपेसिटी की पेशकश कर सकती है। दिल्ली डिस्कॉम्स को SPOT, LT-RLNG जैसे सभी सोर्सेस से उपलब्ध गैस सप्लाई की जा सकती है।

कोयला आधारित बिजली उत्पादन से बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए 11 अक्टूबर 2021 को आवंटित बिजली के उपयोग के संबंध में भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

  • इन दिशा-निर्देशों के तहत राज्यों से आवंटित बिजली सीधे उपभोक्ताओं को सप्लाई करने का अनुरोध किया गया है।
  • यदि कोई राज्य पॉवर एक्सचेंज में बिजली बेचता हुआ पाया जाता है या इस आवंटित बिजली को शेड्यूल नहीं कर रहा है, तो उनके आवंटन को अस्थायी रूप से कम या वापस लिया जा सकता है। इसे दूसरे राज्यों को आवंटित किया जा सकता है, जिन्हें बिजली की जरूरत होती है।

कोयले की कमी की वजह

  • कोरोना की दूसरी लहर के बाद देश अब पटरी पर लौटने लगा है। औद्योगिक गतिविधियां पहले की तरह शुरू होने लगी हैं, जिससे बिजली की मांग बढ़ी है।
  • इंटरनेशनल मार्केट में कोयले की महंगी कीमतें भी इसकी कमी की वजह है। कोयला महंगा होते ही पावर प्लांट्स ने इसका इम्पोर्ट बंद कर दिया और वे पूरी तरह कोल इंडिया पर निर्भर हो गए। देश में कोयला उत्पादन में 80% हिस्सेदारी रखने वाली कोल इंडिया का कहना है कि ग्लोबल कोल प्राइज में हो रहे इजाफे की वजह से हमें घरेलू कोयला उत्पादन पर निर्भर होना पड़ा है। डिमांड और सप्लाई में आए अंतर की वजह से ये स्थिति बनी है।
  • भारत में कोयले की कमी को मानसून से भी जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल मानसून के देरी से लौटने की वजह से अभी तक खुली खदानों में पानी भरा हुआ है। इस वजह से इन खदानों से कोयले का उत्पादन नहीं हो पा रहा है।