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नॉलेज:'पॉजिटिव पे' से थमेगी आपके बैंक चेक की धांधली, जानिए आरबीआई का क्या है प्लान

मुंबई4 महीने पहले
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आरबीआई जल्द जारी करेगा 'पॉजिटिव पे' से संबंधित गाइडलाइन
  • 'पॉजिटिव पे' से बढ़ेगी चेक पेमेंट की सुरक्षा
  • आरबीआई जल्द जारी करेगा गाइडलाइन

हर साल बैंकों चेक के जरिए होने वाले फर्जीवाड़े से संबंधित सैकड़ों मामले आते हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने ग्राहकों के इस समस्या को ध्यान में रखते हुए इस बार की एमपीसी बैठक में 'पॉजिटिव पे' सिस्टम का एलान किया है। जिसमें 'पॉजिटिव पे' के माध्यम से फर्जी चेक से होने वाले फ्रॉड से निजात मिलेगा। यह सिस्टम 50,000 रुपए या उससे ज्यादा की रकम पर लागू होगा।

ग्राहकों को फ्रॉड से बचाना लक्ष्य

बैठक के दौरान गवर्नर शक्तिकांता दास ने कहा कि, चेक पेमेंट की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हम पॉजिटिव पे सिस्टम से संबंधित गाइडलाइन जारी करेंगे। इससे 50,000 रुपए और उससे ज्यादा की रकम के चेक में हो रहे फ्रॉड पर रोक लगेगी। उन्होने ये भी बताया कि वॉल्यूम के लिहाज से देश में चेक के जरिए होने वाला करीब 20 फीसदी ट्रांजेक्शन इस सिस्टम के दायरे में आएंगे, जबकि वैल्यू के लिहाज से 80 फीसदी ट्रांजेक्शन इस सिस्टम के दायरे में आएंगे।

बता दें कि पॉजिटिव पे सिस्टम को आईसीआईसीआई बैंक ने अपने ग्राहकों के लिए साल 2016 में ही लांच कर दिया था। 'पॉजिटिव पे' सिस्टम के तहत किसी थर्ड पार्टी को चेक जारी करने वाला व्यक्ति अपने बैंक को अपने चेक का डिटेल भी भेजेगा। हालांकि, अभी चेक ट्रंकेशन सिस्‍टम (सीटीएस) का इस्तेमाल चेक क्‍लीयरिंग के लिए होता है। सीटीसी में क्लीयरिंग हाउस की ओर से इसकी डिजिटल फोटो भुगतानकर्ता के बैंक के होम ब्रांच को भेज दी जाती है। जिससे पैसे ट्रांजेक्शन में स्पष्टता रहे।

'पॉजिटिव पे' से फायदे और सुरक्षा
इसमें अकाउंट नंबर, चेक नंबर, भुगतानकर्ता का नाम, भुगतान राशि और चेक के दोनों तरफ की फोटो भी संबंधित बैंक के मोबाइल एप पर अपलोड करना होगा। जानकारी अपलोड करने के बाद ही चेक को थर्ड पार्टी को देना होगा। जानकारों कहना है कि पैसे को ट्रांजेक्शन करने से पहले बैंक कर्मचारी अपलोड किए गए जानकारी को क्रॉस चेक करते हैं। इससे बैंक ग्राहकों को फर्जी चेक से छुटकारा मिलेगा। यह चेक के एक स्थान से दूसरे स्थान जाने में लगने वाली लागत और समय को भी कम करता है।

क्या करता है 'पॉजिटिव पे' ?

पॉजिटिव पे एक प्रकार का ऑटोमेटिक कैश मैनेजमेंट सर्विस है चेक से संबंधित फ्रॉड की जांच करता है। बैंक इसके जरिए चेक को जारी करने वाली संस्था या व्यक्ति और चेक जिसे प्राप्त होगा उसकी जानकारी की जांच करता है। इस दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर चेक दोबारा जारी करने वाली संस्था या व्यक्ति को वापस कर दी जाती है। भारत में अभी आईसीआईसीआई बैंक ही इस प्रकार की सर्विस देता है।