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  • Piramal Group Wins Bid For DHFL With 94 Percent Votes

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पीरामल का ऑफर मंजूर:पीरामल एंटरप्राइजेज ने जीती DHFL को खरीदने की बोली, 37,250 करोड़ रुपए का ऑफर दिया था

नई दिल्ली5 महीने पहले
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  • DHFL पर बैंकों का 83,873 करोड़ रुपए का कर्ज है
  • अमेरिका की ओकट्री कैपिटल ने 38,400 करोड़ रु. का ऑफर दिया था

पीरामल ग्रुप ने कर्ज में डूबी दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिडेट (DHFL) को खरीदने के लिए बोली जीत ली है। पीरामल ने 37,250 करोड़ रुपए में DHFL को खरीदने का ऑफर दिया है। DHFL को कर्ज देने वाले बैंकों की समिति (कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स यानी CoC) ने इस ऑफर को मंजूरी दे दी है। बोली जीतने के लिए कम से कम 66% वोटों की जरूरत थी। पीरामल की बोली को 94% वोट मिले हैं।

ओकट्री कैपिटल का ऑफर ज्यादा, फिर भी मंजूर नहीं

इस बोली प्रक्रिया में अमेरिका की ओकट्री कैपिटल भी शामिल थी। उसका ऑफर पीरामल से ज्यादा, 38,400 करोड़ रुपए का था। लेकिन बैंकों की समिति में उसे सिर्फ 45% वोट मिले। पीरामल ग्रुप ने ओकट्री कैपिटल के मुकाबले शुरू में (अपफ्रंट) ज्यादा कैश पेमेंट का ऑफर दिया। इसलिए उसके ऑफर को मंजूर किया गया है। शुरुआत में अडानी ग्रुप ने भी DHFL को खरीदने की इच्छा जताई थी। बाद में वह इससे हट गई।

कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स लेगी अंतिम फैसला

सूत्रों के मुताबिक, पीरामल ग्रुप ने वोटिंग प्रक्रिया में जीत हासिल कर ली। लेकिन इस पर अभी कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स को अंतिम फैसला लेना है। कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स की मंजूरी के बाद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) को सिफारिश भेजी जाएगी। NCLT की मंजूरी के बाद दिवालिया प्रक्रिया फाइनल होगी। NCLT की मंजूरी के बाद DHFL पीरामल ग्रुप की कंपनी बन जाएगी।

NCLT की मुंबई बेंच में चल रही है दिवालिया प्रक्रिया

नवंबर 2019 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी (IBC) कोड के तहत DHFL को दिवालिया घोषित करने के लिए आवेदन किया था। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई बेंच में DHFL की दिवालिया प्रक्रिया चल रही है। कंपनी के बोर्ड को भंग करके आर. सुब्रमण्यकुमार को एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया गया है। DHFL पहली फाइनेंस कंपनी है जिसके खिलाफ RBI ने विशेष शक्ति का इस्तेमाल करके दिवालिया प्रक्रिया के लिए आवेदन किया है।

DHFL पर करीब 83 हजार करोड़ रुपए का कर्ज

जुलाई 2019 तक DHFL पर 83,873 करोड़ रुपए का कर्ज था। इसमें बैंक, नेशनल हाउसिंग बोर्ड, म्यूचुअल फंड्स और बॉन्डहोल्डर्स का पैसा शामिल है। DHFL पर सबसे ज्यादा कर्ज स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का है। एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2020 तक DHFL के पास 79,800 करोड़ रुपए के असेट्स थे। इसमें से 50,227 करोड़ रुपए या कुल पोर्टफोलियो का 63% हिस्सा नॉन-परफॉर्मिंग असेट्स (NPA) घोषित हो चुका है।

DHFL पर किसका कितना कर्ज

कर्जदाताराशि
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया10,083
बैंक ऑफ इंडिया4125
केनरा बैंक2681
नेशनल हाउसिंग बोर्ड2434
यूनियन बैंक2378
सिंडिकेट बैंक2229
बैंक ऑफ बड़ौदा2075
इंडियन बैंक1552
सेंट्रल बैंक1389
IDBI बैंक999
HDFC बैंक361

नोट: राशि करोड़ रुपए में है।

दिवालिया प्रक्रिया के तहत बड़े अधिग्रहण

आर्सेलर मित्तल-एस्सार स्टील: स्टील किंग के रूप में मशहूर लक्ष्मी निवास मित्तल की कंपनी आर्सेलर मित्तल ने 2019 में एस्सार स्टील इंडिया लिमिटेड को खरीदा था। दिवालिया प्रक्रिया के तहत आर्सेलर मित्तल ने 42,000 करोड़ रुपए में एस्सार स्टील का अधिग्रहण किया था। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2019 में इस अधिग्रहण को मंजूरी दी थी। एस्सार स्टील के संचालन के लिए आर्सेलर मित्तल ने निप्पन स्टील के साथ जॉइंट वेंचर गठित किया है।

रिलायंस इंफ्राटेल-रिलायंस जियो: रिलायंस जियो ने अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस इंफ्राटेल को दिवालिया प्रक्रिया के तहत खरीदा है। यह सौदा 4400 करोड़ रुपए में हुआ है। NCLT की मुंबई बेंच ने दिसंबर 2020 में इस अधिग्रहण को मंजूरी दी है। रिलायंस जियो इस सौदे के तहत रिलायंस इंफ्राटेल के टावर और फाइबर असेट्स के विलय की योजना बना रही है। हालांकि, अभी यह अधिग्रहण पूरा नहीं हुआ है।

पतंजलि आयुर्वेद- रुचि सोया: योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद ने दिवालिया प्रक्रिया के तहत रुचि सोया का अधिग्रहण किया है। इसके लिए पतंजलि आयुर्वेद ने 4,350 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। यह अधिग्रहण दिसंबर 2019 में पूरा हुआ था। रुचि सोया सोयाबीन से जुड़े उत्पादों का निर्माण करती है। महाकोश और रुचि गोल्ड इसके प्रमुख सोयाबीन तेल ब्रांड हैं। मौजूदा समय में रुचि सोया नए बोर्ड के साथ पहले की तरह स्वतंत्र रूप से कारोबार कर रही है। रुचि सोया शेयर बाजार में भी लिस्टेड है।

जेपी इंफ्राटेक-NBCC: सार्वजनिक क्षेत्र की कंस्ट्रक्शन कंपनी NBCC ने रियल्टी कंपनी जेपी इंफ्राटेक का अधिग्रहण किया है। यह पूरी तरह से कैश डील नहीं है। इस डील के तहत NBCC कर्जदाताओं को कर्ज के बदले 1526 एकड़ जमीन ट्रांसफर करेगी। इसके अलावा NBCC अधूरे पड़े फ्लैटों का अधिग्रहण करेगी और निर्माण पूरा करके खरीदारों को आवंटित करेगी। NCLT ने दिसंबर 2019 में NBCC के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी। हालांकि, अभी यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। दिवालिया प्रक्रिया के तहत जेपी इंफ्राटेक पर होमबायर्स ने 13,364 करोड़ रुपए और लैंडर्स ने 9,783 करोड़ रुपए का क्लेम किया था।

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