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भावुक हुए पेटीएम के फाउंडर:लिस्टिंग के दौरान राष्ट्रगान बजा तो विजय शेखर बोले- भारत भाग्य विधाता सुनकर आंसू आ जाते हैं

मुंबई11 दिन पहले
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पेटीएम के फाउंडर विजय शेखर शर्मा बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में शेयर की लिस्टिंग के दौरान भावुक हो गए। लिस्ट‍िंग सेरेमनी की अपनी स्पीच की शुरुआत में राष्ट्र गान बजने के बाद उन्हें रूमाल से अपने आंसू पोंछते देखा गया।

उन्होंने कहा, 'अभी मेरे साथ ये हो गया क्योंकि आपने राष्ट्रगान गा दिया। जब भी राष्ट्रगान बजता है तो भारत भाग्य विधाता शब्दों को सुनकर मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं।'

लिस्ट‍िंग स्पीच में विजय शेखर के आंसू निकल पड़े। वह रूमाल से आंसू पोंछते नजर आए।
लिस्ट‍िंग स्पीच में विजय शेखर के आंसू निकल पड़े। वह रूमाल से आंसू पोंछते नजर आए।

लिस्टिंग में परिवार भी साथ
लिस्टिंग के दौरान विजय शेखर शर्मा का परिवार भी उनके साथ था। विजय शेखर और उनके बेटे विवान ने पेटीएम की लिस्टिंग के लिए साथ में गोंग बजाया।

वहीं विजय शेखर ने इस मौके पर अपनी मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

27% टूटकर बंद हुआ पेटीएम का स्टॉक
डिजिटल मोबाइल पेमेंट प्लेटफॉर्म पेटीएम की पेरेंट कंपनी वन 97 कम्युनिकेशन के शेयरों की जमकर पिटाई हुई। 2,150 रुपए के इश्यू प्राइस की तुलना में इसका शेयर पहले दिन 27% टूट कर 1,560.80 रुपए पर बंद हुआ है। यानी निवेशकों को IPO प्राइस की तुलना में 589.20 रुपए प्रति शेयर का घाटा हुआ है। सबसे बड़े इश्यू का सबसे खराब प्रदर्शन बाजार में रहा है।

लिस्टिंग निराशाजनक, लेकिन कहानी प्रेरित करने वाली
इंजीनियरिंग ग्रेजुएट शर्मा ने मोबाइल रिचार्ज के लिए एक प्लेटफॉर्म के रूप में पेटीएम की स्थापना की थी। पेटीएम की सफलता ने स्कूल शिक्षक के बेटे विजय शेखर शर्मा को अरबपति बना दिया है। पेटीएम के शेयरों की लिस्ट‍िंग भले ही निराशाजनक रही हो, लेकिन इसके फाउंडर विजय शेखर शर्मा की कहानी प्रेरित करने वाली है।

दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से डिग्री ​​​​​
विजय शेखर शर्मा अलीगढ़ के रहने वाले हैं। उनके पिता एक स्कूल टीचर थे। 12वीं तक उनकी पढ़ाई हिंदी मीडियम से हुई। ग्रेजुएशन के लिए वो दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग चले गए और इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन की पढ़ाई की। 1997 में कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने एक वेबसाइट Indiasite.net की स्थापना की थी और दो साल में ही इसे कई लाख रुपए में बेच दिया। यहीं से उनके एंटरप्रेन्योरशिप सफर की शुरुआत हुई थी।

2011 में पेटीएम शुरू किया
2010 तक विजय शेखर शर्मा के पास बिजनेस के कई आइडिया आ चुके थे। 2011 में उन्होंने स्मार्टफोन से पेमेंट मॉडल पर काम करने का फैसला किया। मोबाइल से पेमेंट (Pay Through Mobile) का शॉर्ट फॉर्म ही Paytm बना। 2014 में पेटीएम ने मोबाइल वॉलेट लॉन्च किया।

शुरुआती प्लेयर होने से पेटीएम को मिला फायदा
भारत के बाजार में शुरुआती प्लेयर होने की वजह से पेटीएम को काफी फायदा मिला। शुरुआती 6 सालों में पेटीएम के पास कुल 12.5 करोड़ कंज्यूमर ही थे। इसकी वजह भारतीय कंज्यूमर की नकदी पर निर्भरता थी। पेटीएम के लिए ये एक बड़ी चुनौती थी। पेटीएम को छोटी दुकानों और व्यापारियों के साथ जोड़ देने के बाद भी लेन-देन की संख्या काफी कम रही।

नोटबंदी ने बढ़ाया पेटीएम का ट्रैफिक
8 नवंबर 2016 को रात 8 बजे जब प्रधानमंत्री ने देश में 500-1000 रुपए की नोटों को गैरकानूनी-टेंडर करार दिया, इसके बाद पेटीएम ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी के बाद एक साल में पेटीएम पर 435% ट्रैफिक बढ़ा, वहीं ऐप के 200% डाउनलोड बढ़ गए। कुल ट्रांजैक्शन की बात करें तो वो 250% तक बढ़ गया।