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ब्रोकिंग कम्युनिटी और FPI का विरोध:निवेशकों के हित में हैं नए पीक मार्जिन नॉर्म्स, ट्रेड सेटलमेंट साइकिल छोटा करना भी फायदेमंद

एक महीने पहले
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सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी। -फाइल फोटो। - Money Bhaskar
सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी। -फाइल फोटो।

मार्केट रेगुलेटर सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी ने कहा कि नए पीक मार्जिन नॉर्म्स और ट्रेड सेटलमेंट साइकिल को छोटा करने जैसे रिफॉर्म्स, निवेशकों के हित में हैं। हालांकि, पीक मार्जिन नॉर्म्स और T+1 सेटलमेंट साइकिल अपनाने के प्रस्ताव का ब्रोकिंग कम्युनिटी और फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर (FPI) विरोध कर रहे हैं।

1 सितंबर को लागू हुए नए पीक मार्जिन नॉर्म्स

नए पीक मार्जिन नॉर्म्स के तहत सेबी ने स्टॉक मार्केट में हर तरह की ट्रेडिंग के लिए तय मार्जिन की पूरी रकम पहले देने की व्यवस्था की है। दिसंबर 2020 में 25% से शुरू हुई यह व्यवस्था तीन चरणों में 75% तक पहुंची थी, फिर 1 सितंबर को 100% हो गई।

T+1 वाली व्यवस्था अपनाने से ट्रेड का पूरा प्रोसेस दो दिन में पूरा हो जाएगा

जहां तक सौदे के सेटलमेंट की T+1 वाली व्यवस्था की बात है तो इसको अपनाने से ट्रेड का पूरा प्रोसेस दो दिन में पूरा हो जाएगा। यानी ऑर्डर दिए जाने और उसके एग्जिक्यूट होने से लेकर सेलर के एकाउंट में पैसा और खरीदने वाले के खाते में शेयर दो दिन में पहुंच जाएंगे। अभी T+2 वाली व्यवस्था में तीन दिन लगते थे।

मार्जिन बढ़ाए जाने से सुकून और कुछ गलत नहीं होने का भरोसा मिलेगा

त्यागी ने गुरुवार को CII के फाइनेंशियल मार्केट्स समिट को संबोधित करते हुए कहा, 'नए पीक मार्जिन नॉर्म्स सबके हित में हैं। एक निवेशक के मार्जिन का इस्तेमाल दूसरे या ब्रोकिंग कंपनी के अपने सौदे में नहीं होना चाहिए। बाजार में छोटे निवेशकों की भागीदारी बढ़ने और मार्जिन बढ़ाए जाने से लोगों को सुकून और कुछ गलत नहीं होने का भरोसा मिलेगा।'

निवेशक जो खरीदते हैं, उन्हें उसे जल्द से जल्द हासिल करने का हक

सेबी के चीफ त्यागी के मुताबिक जहां तक T+1 सेटलमेंट की बात है, तो T+3 से T+2 वाली व्यवस्था में शिफ्टिंग 2003 में हुई थी। ट्रेड साइकिल को और कम किए जाने की जरूरत है, क्योंकि पेमेंट और बैंकिंग सिस्टम में बड़े सुधार हुए हैं। निवेशक जो खरीदते हैं, उन्हें उसे जल्द से जल्द हासिल करने का हक है।

1 जनवरी 2022 से वैकल्पिक रूप से लागू होगी T+1 सेटलमेंट

सेबी ने 7 सितंबर को एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें उसने 1 जनवरी 2022 से वैकल्पिक तौर पर T+1 सेटलमेंट साइकिल अपनाए जाने की बात कही थी। उसने स्टॉक एक्सचेंजों से तय करने के लिए कहा था कि क्या वे किसी लिस्टेड शेयर के लिए छोटा सेटलमेंट साइकिल अपनाना चाहते हैं। त्यागी ने कहा कि सेबी FPI की चिंताओं और चुनौतियों को देखते हुए छोटा सेटलमेंट साइकिल चरणबद्ध तरीके से अपनाने की दिशा में बढ़ रहा है।

T+1 सबकी चाहत है, FPI को थोड़ा सोचने की जरूरत है

FPI की चिंताओं के बाबत त्यागी ने कहा, 'ये 1999 से डेरिवेटिव मार्केट में निवेश कर रहे हैं, जहां मार्जिन पहले देना होता है। ये IPO मार्केट में भी पैसा लगा रहे हैं, जहां पैसा सात दिन के लिए फंसा रहता है। यहां तक कि अमेरिका में T+1 सेटलमेंट को लेकर डिस्कशन पेपर जारी हुआ है। यह सबकी चाहत है, FPI को थोड़ा सोचने की जरूरत है।

इनसाइडर ट्रेडिंग की समस्या से सक्रियता से निपट रहा है सेबी

इनसाइडर ट्रेडिंग को लेकर सेबी की हालिया कार्रवाई पर त्यागी ने कहा कि इससे सक्रियता से निपटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सेबी इन मामलों में पक्के सबूत जुटा रहा है लेकिन यह नहीं बताया कि जानकारी जुटाने के लिए किस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। सेबी ने अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके पूनावाला फिनकॉर्प, इंफोसिस और जी में इनसाइडर ट्रेडिंग के नियमों के उल्लंघन का पता लगाया था।

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