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लॉकडाउन कल, आज और कल:शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड ने निवेशकों को किया मालामाल; गोल्ड से भी 15% रिटर्न, जानिए आगे अब कहां बनेगा सबसे ज्यादा पैसा?

मुंबई3 महीने पहलेलेखक: दिग्विजय सिंह
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रिस्क है तो इश्क है। ये डायलॉग हर्षद मेहता पर बनी वेब सीरीज 'स्कैम 1992' का है, लेकिन इस समय बाजार में पैसा लगाने वालों पर सटीक बैठता है। आज से ठीक एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर देश में जनता कर्फ्यू लगा और 25 मार्च से लॉकडाउन। इस एक साल के दौरान शेयर बाजार में पैसा लगाकर जिसने रिस्क लिया, वो मालामाल हो गया। अगर हम निवेश के पांच तरीकों की बात करें तो शेयर बाजार दूसरे चारों से आगे दिखाई दे रहा है। चूंकि बाजार में पैसा लगाने वाले रिस्क लेते हैं, लेकिन बंपर रिटर्न उनको उससे इश्क करना सिखा ही देता है। जब कुछ दिग्गज शेयरों से रिटर्न 350% से ज्यादा मिले, यानी बाजार में आपने 100 रुपए लगाए तो यह 350 रुपए से ज्यादा हो गए, तब इश्क का परवान चढ़ना लाजमी भी है।

तो आइए देख लेतें हैं कि निवेश के उन पांच तरीकों ने आपके पैसे बनाए या डुबाए और बनाए भी तो कितने बनाए। ये भी समझ लेते हैं कि आने वाले समय में इन असेट क्लास में पैसा बनेगा या नहीं...

शेयर बाजार: एक साल में शेयर बाजार ने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया। निफ्टी और सेंसेक्स एक साल के सबसे निचले स्तर से अब तक 90% से ज्यादा चढ़ चुके हैं। यानी पिछले साल मार्च में निवेशकों का 100 रुपए अब बढ़कर 190 रुपए से ज्यादा हो गया है। पिछले साल लॉकडाउन के ऐलान से कुछ दिन पहले यानि 13 मार्च को भारी गिरावट देखी गई थी। लेकिन उन दिनों की गिरावट में किसी ने शेयर बाजार में पैसा लगाया होगा तो वो इस समय खुशी से फूला नहीं समा रहा होगा।

अगर किसी ने निफ्टी में शामिल चुनिंदा शेयरों में पैसे ही लगाए होते तो उसका पैसा 3 गुने से ज्यादा हो गया होता। निफ्टी से जुड़ी टॉप कंपनियों की बात करें तो टाटा मोटर्स ने 368% का रिटर्न दिया है। इसके अलावा हिंडाल्को, अदानी पोर्ट, ग्रासिम और M&M ऐसे शेयर रहे, जिन्होंने 190% से 280% तक रिटर्न दिया।

ब्रोकरेज हाउस एक्सिस सिक्योरिटीज की मानें तो निफ्टी 50 इंडेक्स इस साल के अंत तक 17,000 के स्तर को पार कर सकता है। उसका मानना है कि निवेशकों को ICICI बैंक, भारती एयरटेल, HCL टेक, टेक महिंद्रा और ल्यूपिन जैसे शेयरों में निवेश किया जा सकता है। इसी तरह BSE सेंसेक्स पर ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस मॉर्गन स्टैनली ने इस साल के लिए 61 हजार का टार्गेट दिया है।

म्यूचुअल फंड: कम रिस्क लेने वाले या शेयर बाजार में सीधे निवेश से बचने वालों के लिए फिट फंडा है म्यूचुअल फंड। दरअसल, इसमें जब आप निवेश करते हैं तो अलग-अलग फंड हाउसेज के फंड मैनेजर आपके पैसे को शेयर बाजार में लगाते हैं। पिछले एक साल की बात करें तो निवेशकों को अलग-अलग म्यूचुअल फंड्स में 30 से 90% तक का रिटर्न मिला।

बाजार की तेजी को देखते हुए जानकार मान रहे हैं कि म्यूचुअल फंड्स में पैसा लगाना फायदे का सौदा हो सकता है। ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के फाउंडर और CEO पंकज मठपाल की मानें तो इस साल भी सेक्टोरल को छोड़ दिया जाए तो अलग-अलग म्यूचुअल फंड्स कम से कम 15% तक रिटर्न दे सकते हैं। इसके लिए नए निवेशकों को बस फ्लेक्सी कैप, मल्टीकैप और लार्ज कैप फंड्स पर ध्यान रखना है।

सोना भी चमका: लॉकडाउन के दौरान गोल्ड की कीमतें लगातार बढ़ीं, जो अगस्त 2020 तक 56 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड हाई तक भी पहुंची। यानी किसी ने अगर मार्च के दौरान सोने में पैसे लगाए तो वो अगस्त में उसको 30% से ज्यादा का रिटर्न मिला। हालांकि पिछले साल अगस्त से अब तक सोने की चमक थोड़ी फीकी पड़ी है। फिर भी पूरे एक साल की बात करें तो आज भी गोल्ड ने निवेशकों को करीब 15% रिटर्न दिया है।

IIFL सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी एंड करेंसी) अनुज गुप्ता की माने तो सोना इस साल के अंत तक एक बार फिर 52 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम के पार हो सकता है। क्योंकि शादी का सीजन नजदीक है और मई में अक्षय तृतीया भी है। इससे सोने की डिमांड बढ़ेगी। इसलिए गोल्ड में निवेश करने का यह सही समय है।

फिक्स्ड डिपॉजिट: पैसा बचाकर बैंक में FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट करना काफी पुराना और सुरक्षित तरीका है। लेकिन इससे निवेशकों का सालभर में साढ़े 5% भी ब्याज नहीं मिला। सेक्टर से जुड़े एक्सपर्ट्स की मानें तो आने वाले दिनों में भी ब्याज दरें इसी के आस-पास ही रह सकती हैं। बढ़ती महंगाई को काबू करने के लिए पिछले तीन बार से रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों को स्थिर रखा है। जानकारों की मानें तो आने वाले समय में भी रिजर्व बैंक दरों में बदलाव नहीं करेगा।

रियल एस्टेट: बने पड़े खाली घर और सस्ते ब्याज दरों के चलते घरों के दाम बढ़ने के बजाय गिर गए। ग्लोबल रिसर्च एजेंसी नाइट फ्रैंक की मानें तो सालभर में भारत में घर साढ़े तीन पर्सेंट सस्ते हुए हैं। जानकार मानते हैं कि लॉकडाउन खुलने के बाद पहली बार घर खरीदने वाले लोग प्रॉपर्टी बाजार में ज्यादा निकले। प्रॉपर्टी बाजार का फ्यूचर भी ठंडा ही रहने वाला है।

होमएंट्स के फाउंडर प्रदीप मिश्रा के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान असल खरीदार या पहली घर खरीदने वालों की ओर से ज्यादा डिमांड आई। कोरोना के दौरान लोगों को घर समझ आया कि अपने घर में रहना कितना फायदेमंद है। वहीं, कमर्शियल प्रॉपर्टी की डिमांड कमजोर ही रही है, लेकिन वैक्सीनेशन जैसे जैसे बढ़ रहा है इसमें सुधार देखने को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार सस्ते घरों पर फोकस कर रही है। इसके लिए डेवलपर्स को भी इंसेटिव दिया जा रहा है। दूसरी ओर होम लोन की ब्याज दरें भी 10 साल के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। ऐसे में कीमतें भले ही स्थिर रहें लेकिन घर खरीदार शॉपिंग पर जरूर निकल रहे हैं।