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  • Lockdown Effect, GDP Growth To Decline In March And June Quarter, S&P Forecasts Growth To Be 11 Percent This Fiscal

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तिमाही आधार पर नेगेटिव रहेगी ग्रोथ:मार्च और जून तिमाही में क्वॉर्टरली बेसिस पर जीरो से नीचे रहेगी ग्रोथ, S&P ने दिया है इस वित्त वर्ष आर्थिक वृद्धि दर 11% रहने का अनुमान

2 महीने पहले
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  • HSBC ने दिया है मार्च क्वॉर्टर में तिमाही आधार पर GDP ग्रोथ शून्य से 2.3% नीचे रहने का अनुमान
  • इकोनॉमिस्ट इंद्रनील सेनगुप्ता के मुताबिक, लॉकडाउन का हर महीना करा सकता है 2% तक GDP लॉस

भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ इस फाइनेंशियल ईयर में 11% रह सकती है, यह बात S&P ग्लोबल रेटिंग ने कही है। उसने यह भी कहा है कि लॉकडाउन से ग्रोथ पर बड़ा दबाव पड़ सकता है और कोविड पर काबू पाना बड़ी चुनौती होगी। हाल के दिनों में कोविड संक्रमण के नए मामलों में तेज उछाल आया है जिससे यहां दूसरी लहर चल रही है। S&P के मुताबिक 2023 में GDP ग्रोथ 6.1% और उससे अगले साल 6.4% रह सकती है।

दूसरी लहर GDP ग्रोथ के लिए बड़ा खतरा

S&P ग्लोबल रेटिंग के मुताबिक, ज्यादा संक्रमण वाली कुछ जगहों पर कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं। अगर ज्यादा जगहों पर लॉकडाउन होता है तो इकोनॉमी पर उसका असर इस हिसाब से तय होगा कि वह कितने समय तक रहता है। पिछले हफ्ते ही दूसरी ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने कहा था कि दूसरी लहर भारत की ग्रोथ के लिए बड़ा खतरा है। लेकिन पिछले साल इकोनॉमिक एक्टिविटीज में आई गिरावट के चलते इस साल GDP ग्रोथ डबल डिजिट में रह सकती है।

घर-परिवारों और कंपनियों का बजट बिगड़ा

S&P ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दुनियाभर की इकोनॉमी स्मार्ट तरीके से उबर रही है। सरकारें टीकाकरण अभियान चला रही हैं, मार्केट में जरूरत भर की पूंजी है। लेकिन कोविड की दूसरी लहर ने घर-परिवारों और कंपनियों का बजट बिगाड़ दिया है। इससे लेंडर्स पर नेगेटिव असर हुआ है, जिससे उबरने में बैंकों को कई साल लग सकते हैं।

मार्च तिमाही में ग्रोथ -2.3% रहने का अनुमान

लॉकडाउन के चलते इकोनॉमी को खासतौर पर जून तिमाही में बड़ा नुकसान होने की आशंका है। HSBC ने इकोनॉमिक ग्रोथ तिमाही आधार पर जीरो से नीचे रहने का अनुमान दिया है। इससे इकोनॉमिक रिकवरी होने में देर हो सकती है और इस फाइनेंशियल ईयर में ग्रोथ घट सकती है। दिसंबर तिमाही में सिर्फ 0.4% बढ़ने वाली GDP ग्रोथ के मार्च तिमाही में जीरो से 2.3% (तिमाही आधार पर) नीचे रहने का अनुमान है। सालाना आधार पर बढ़ोतरी हो सकती है क्योंकि पिछले जून क्वॉर्टर में GDP 24% घट गई थी।

ग्रॉस वैल्यू ऐडेड 1% घट सकती है

HSBC की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजल भादुड़ी ने कहा, 'जून तिमाही में देश की ग्रॉस वैल्यू ऐडेड लगभग 1% घट सकती है। ग्रॉस वैल्यू ऐडेड से पता चलता है कि GDP में कौन सा सेक्टर कितना कंट्रिब्यूशन दे रहा है। इसके अलावा शहरों में बेरोजगारी बढ़ी है और जिन सेवाओं में कस्टमर या कंज्यूमर का सामने होना जरूरी होता है, उनमें बड़ी कमजोरी आई है। हालांकि फिजिकल प्रोडक्ट का कारोबार बढ़ा है।'

ग्रोथ में 3% तक का लॉस मुमकिन

बैंक ऑफ अमेरिका के चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट इंद्रनील सेनगुप्ता कहते हैं कि इस फाइनेंशियल ईयर में इकोनॉमिक ग्रोथ में 3% तक का लॉस हो सकता है। हालांकि उन्होंने इस वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 9% बनाए रखा है। उन्होंने कहा, ‘हमारे हिसाब से लॉकडाउन का हरेक महीना 1 से 2 पर्सेंट जीडीपी का लॉस करा सकता है। जिस हिसाब से संक्रमण बढ़ रहा है, लॉकडाउन लंबे समय तक रह सकता है और ग्रोथ पर दबाव बना सकता है।’

महंगाई 4% से ऊपर बने रहने के आसार

कोविड के चलते एक तरफ लॉकडाउन से ग्रोथ में गिरावट आ सकती है, तो दूसरी तरफ महंगाई 4% से ऊपर रहने के आसार हैं। ऐसा इसलिए कि कंपनियां कच्चे माल की कीमत में बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों पर डालती रह सकती हैं और दबी हुई मांग बाहर आ सकती है। इससे रिजर्व बैंक के लिए रेपो रेट में कटौती का कदम उठाना मुश्किल होगा।

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