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LIC के IPO में देरी:मार्च 2022 की डेडलाइन तक IPO की संभावना नहीं, वैल्यूएशन और रेगुलेटरी प्रोसेस में लग रहा ज्यादा वक्त

नई दिल्ली5 महीने पहले
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लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) का इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2022 के बीच आने की संभावना नहीं है। इसकी वजह है इसके वैल्यूएशन में अनुमान से ज्यादा वक्त लगना। इसके साथ ही कई अन्य तैयारियां भी बची है।

वैल्यूएशन के बाद कई रेगुलेटरी प्रोसेस पूरी करनी होंगी
LIC के IPO को मैनेज करने के लिए सरकार ने 10 मर्चेंट बैंकर्स अपॉइंट किए हैं। इसमें से एक मर्चेंट बैंकर के सीनियर अधिकारी ने कहा, LIC के वैल्यूएशन में काफी ज्यादा समय लग रहा है। वैल्यूएशन की प्रोसेस अगर पूरी भी हो जाती है तो उसके बाद रेगुलेटरी प्रोसेस को पूरा करना होगा।

एक अन्य अधिकारी ने कहा, LIC के वैल्यूएशन की प्रोसेस उसके साइज, प्रोडक्ट मिक्स, रियल एस्टेट एसेट, सब्सिडियरी और प्रॉफिट शेयरिंग स्ट्रक्चर की वजह से काफी कॉम्प्लेक्स है। रेगुलेटरी प्रोसेस को लेकर अधिकारी ने कहा कि मार्च 2022 की डेडलाइन में इसे पूरा कर पाना मुश्किल होगा।

IPO के लिए LIC एक्ट 1956 में बड़े बदलाव
IPO को लाने के लिए LIC एक्ट 1956 में बड़े बदलाव किए गए हैं। कितने शेयर बेचे जाएंगे और वह किस प्राइस बैंड में होंगे, यह अब तक तय नहीं हुआ है। सरकार LIC के IPO इश्यू साइज से 10% शेयर पॉलिसी होल्डर्स के लिए सुरक्षित रखेगी।

LIC ने पॉलिसी होल्डर्स से पैन अपडेट करने को कहा
LIC ने कहा है कि IPO में हिस्सा लेने के लिए पॉलिसी धारक चेक कर लें कि रिकॉर्ड में दिए पैन की जानकारी सही है या नहीं। अगर सही नहीं है तो वह पैन की जानकारी को अपडेट कर लें। LIC ने ये भी कहा है कि अगर किसी पॉलिसी धारक के पास वर्तमान में डीमैट अकाउंट नहीं है, तो उसे अपने खर्च पर खोलने का प्लान कर लेना चाहिए।

1 लाख करोड़ रुपए जुटाना चाहती है सरकार
सरकार LIC की 10% तक हिस्सेदारी बेचकर 40 हजार करोड़ रुपए से 1 लाख करोड़ रुपए जुटाना चाहती है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक 5% हिस्सेदारी बिक्री से ही LIC का IPO भारत का सबसे बड़ा IPO बन जाएगा। वहीं 10% हिस्सेदारी बेचने से LIC ग्लोबल लेवल पर दूसरी सबसे बड़ी बीमा कंपनी बन जाएगी।