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कानूनी फर्म्स को नहीं है दिलचस्पी:LIC के IPO में कम फीस मिलने से दूर हो रही हैं कानूनी फर्म्स, गुरुवार को बिड जमा करने की अंतिम तारीख

मुंबईएक महीने पहले
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अब तक का सबसे बड़ा IPO लेकर आ रही LIC के सामने एक दिक्कत आन खड़ी हुई है। कानूनी सेवा देने वाली फर्म्स इस IPO में दिलचस्पी नहीं दिखा रही हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार काफी कम फीस पर सेवा लेना चाहती है। गुरुवार को बिड जमा करने का अंतिम दिन है।

IPO में सलाह देने से दूर हो सकती हैं कानूनी फर्म्स

घरेलू लॉ फर्म्स का कहना है कि वे सरकार को इस IPO में सलाह देने से दूर हो सकती हैं। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ऐसे समय में अपना IPO ला रही है, जब देश का शेयर बाजार अपनी ऐतिहासिक ऊंचाई पर है। साथ ही IPO बाजार में भी तेजी है और रिकॉर्ड पैसे जुटे रहे हैं। 32 करोड़ पॉलिसी और नए प्रीमियम के मामले में 66% बाजार पर हिस्सेदारी रखने वाली LIC 450 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम का प्रबंधन करती है।

मार्च से पहले लिस्ट कराने की योजना

सरकार LIC को मार्च 2022 से पहले शेयर बाजार में लिस्ट कराना चाहती है। LIC IPO से 80 से 90 हजार करोड़ रुपए जुटा सकती है। उसकी करीबन 10% हिस्सेदारी दो बार में सरकार बेचने की योजना बना रही है। पिछले हफ्ते ही सरकार ने इसके लिए 10 मर्चेंट बैंकर्स को चुना था। 16 मर्चेंट बैंकर्स ने इसके लिए प्रजेंटेशन दिया था।

बड़े इश्यू में लॉ फर्म की रहती है दिलचस्पी

हालांकि इतने बड़े IPO में हर लॉ फर्म और मर्चेंट बैंकर्स अपने आप को शामिल करना चाहते हैं। इससे सरकारी सर्कल में उनकी क्रेडिबिलिटी बढ़ती है। लेकिन LIC के मामले में यह कानूनी फर्म ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रही हैं। इन कानूनी फर्म का कहना है कि LIC जैसी विशाल कंपनी की संरचना काफी जटिल है। इसके मसौदे को ड्राफ्ट करना बहुत ही मुश्किल का काम है। सरकार ने अब तक कानूनी फर्म को आकर्षित करने के लिए दो बार अपने ऑफर में संशोधन किया है।

6 अरब डॉलर के IPO लाइन में

एक अनुमान के मुताबिक, इस समय 6 अरब डॉलर के IPO आने की तैयारी में हैं। जुलाई में जोमैटो के 9,600 करोड़ रुपए के भारी-भरकम IPO के बाद पेटीएम भी IPO लाने की तैयारी में है। इसने सेबी के पास मसौदा जमा कराया है। ओला भी IPO की तैयारी में है। ऐसा माना जा रहा है कि LIC के IPO में साइरिल अमरचंद मंगलदास, शार्दुल अमरचंद मंगलदास और खेतान एंड कंपनी शामिल हो सकती हैं। हालांकि इन्होंने अभी तक बिड नहीं किया है।

सरकार ने देश के टॉप लॉ फर्म को हाल में बुलाया था। इसके लिए फीस के टाइमटेबल में थोड़ा सुधार किया गया था। इसमें सरकार ने कुल फीस का 50% हिस्सा ड्राफ्ट जमा करने के बाद देने की बात कही थी।

पांच कंपनियों के इश्यू के बराबर है LIC का IPO

कानूनी फर्म्स का कहना है कि LIC का IPO अकेले पांच कंपनियों के IPO के बराबर है। यानी इतना काम LIC के IPO में करना होगा। कम से कम इसमें 36 टास्क ऐसे हैं जो काफी जटिल हैं। इसमें ड्राफ्ट पेपर से लेकर रेगुलेटर्स के सवालों का जवाब देना, कॉर्पोरेट गवर्नेंस की समीक्षा करना और लंबित मामलों को देखना बहुत ही मुश्किल काम है। साथ ही जोखिम का भी एनालिसिस करना होगा।