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नेशनल इमर्जेंसी में मौके तलाश रही कंपनी:तूतीकोरीन प्लांट खोलने की वेदांता की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ऑक्सीजन जरूरी है, उत्पादन चाहे तमिलनाडु सरकार करे या कंपनी

2 महीने पहले
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देश में लोग ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने की वजह से मर रहे हैं। उसका उत्पादन होना चाहिए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन करेगा। यह बात सुप्रीम कोर्ट ने तूतीकोरीन में ऑक्सीजन फैसिलिटी वाली स्टरलाइट कॉपर यूनिट को खोले जाने की वेदांता की मांग पर सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार से कही। चीफ जस्टिस जे एस बोबड़े की अगुआई वाली बेंच ने तमिलनाडु सरकार से पूछा कि वह ऑक्सीजन के प्रोडक्शन के लिए कंपनी की कॉपर यूनिट को क्यों नहीं अपने कंट्रोल में ले लेती। मामले में अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी।

राज्य सरकार चाहे तो यूनिट में खुद ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू कर ले

कंपनी ने स्टरलाइट प्लांट खोलने की अर्जी अदालत में लगाते हुए कहा था कि वहां हजारों टन ऑक्सीजन बनाई जाएगी और मरीजों को मुफ्त में दी जाएगी। इस प्लांट को तीन साल पहले पर्यावरण संरक्षण के नियमों के गंभीर उल्लंघन और उसके खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में हिंसा के बीच 13 लोगों के मारे जाने के बाद तमिलनाडु सरकार ने बंद करा दिया था। पीड़ित परिवारों के के वकील कोलिन गोंजाल्विस ने कहा कि राज्य सरकार चाहे तो यूनिट को अपने नियंत्रण में लेकर ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू करा सकती है

प्लांट को वेदांता चलाए या वैद्यनाथन के क्लाइंट, केंद्र को फर्क नहीं पड़ता

अदालत ने कहा कि तमिलनाडु सरकार चाहे तो प्लांट का कंट्रोल लेकर ऑक्सीजन का उत्पादन खुद शुरू कर सकती है। उसने कहा कि तमिलनाडु में ऑक्सीजन सरप्लस हो सकता है, लेकिन यहां बात देश की है। राष्ट्रीय संपदा का हर नागरिक में बराबर का बंटवारा होना चाहिए। सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्लांट को वेदांता चलाए या वैद्यनाथन के क्लाइंट, केंद्र को फर्क नहीं पड़ता। लोग मर रहे हों तो कानून और व्यवस्था का रोना नहीं रोया जा सकता। राज्य सरकार के वकील सी एस वैद्यनाथन ने कहा था कि प्लांट खोलने में लॉ एंड ऑर्डर की समस्या हो सकती है।

कई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां जीवन रक्षा के लिए बना रहीं ऑक्सीजन

कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अर्जी तब लगाई है जब देश की जनता कोविड से बचाव के लिए वैक्सीन, इलाज के लिए दवा और जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन की कमी से जूझ रही है। गौर करने वाली बात यह है कि कई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने अपने यहां इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन बनाने वाले प्लांट में जीवन रक्षा के लिए गैस का उत्पादन शुरू किया है। जहां तक ऑक्सीजन उत्पादन के लिए स्टरलाइट प्लांट को खोले जाने की वेदांता अपील की बात है तो उसकी एक अर्जी 2 दिसंबर, 2020 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने खारिज कर दी थी। ​​​​​​

अदालत ने आश्वस्त किया, कंपनी की तरफ से पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन होगा

तमिलनाडु की सरकार स्टरलाइट कॉपर प्लांट को खोलने की इजाजत दिए जाने की अर्जी का कई आधार पर विरोध कर रही है। उसका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी कंपनी की ऐसी अर्जी खारिज कर चुका है। इस पर अदालत ने उसे गुरुवार को आश्वस्त किया था कि कंपनी की तरफ से पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन किया जाएगा।

2013 में भी बंद हुआ था स्टरलाइट प्लांट, तब SC के आदेश पर फिर शुरू हुआ था

यहां दिलचस्प बात यह है कि कंपनी के इस प्लांट के खिलाफ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की शिकायत पहले भी हुई थी। उसकी वजह से 2013 में बंद कराया गया स्टरलाइट का प्लांट सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फिर शुरू हो गया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी को निर्देश दिए थे कि वो इलाके में पर्यावरण की सुरक्षा के लिए 100 करोड़ रुपए खर्च करे।

नेशनल इमर्जेंसी है, राज्य सरकार समस्या के समाधान की राह में रोड़े न अटकाए: SC

चीफ जस्टिस एस ए बोबड़े, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस रविंद्र भट की बेंच ने कंपनी की अपील पर सुनवाई में कहा था कि अदालत का ध्यान कंपनी के प्लांट में लगी ऑक्सीजन फैसिलिटी पर है। उसने कहा कि नेशनल इमर्जेंसी है और राज्य सरकार समस्या के समाधान की राह में रोड़े न अटकाए।

सॉलिसीटर जनरल ने कहा, पर्यावरण संरक्षण से ज्यादा जरूरी मानव जीवन की रक्षा

मामले में सरकार का पक्ष रखने वाले सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि देश को ऑक्सीजन की जरूरत है। इसलिए अगर वेदांता अपना प्लांट चालू कराना चाहती है तो उसको कम से कम ऑक्सीजन फैसिलिटी खोलने की इजाजत दी जाए। उन्होंने अपनी दलील में कहा था कि पर्यावरण संरक्षण से ज्यादा जरूरी मानव जीवन की रक्षा है।

वेदांता के वकील ने कहाए, इजाजत मिलने के 6-7 दिन के भीतर ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू

अदालत में वेदांता का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने इसी को आधार बनाते हुए कहा था कि कंपनी इजाजत मिलने के 6 से 7 दिन के भीतर ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू कर सकती है। तमिलनाडु सरकार ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा था कि उत्पादन शुरू होने में कम से कम दो-चार हफ्ते लगेंगे।

कंपनी के सीईओ ने कहा है कि ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू करने में 45 दिन लगेंगे: तमिलनाडु

तमिलनाडु सरकार के वकील के वी विश्वनाथन के मुताबिक, कंपनी के ही सीईओ ने कहा है कि ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू करने में 45 दिन लगेंगे, जबकि उसके वकील कह रहे हैं कि उत्पादन सात दिन में शुरू हो सकता है। तो फिर, कौन सच कह रहा है? इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि यह सब बंद प्लांट खोलने की कंपनी की चाल है।

2018 में बंद हुआ था वेदांता का तूतीकोरीन वाला कॉपर प्लांट

तमिलनाडु सरकार ने 2018 में वेदांता का तूतीकोरीन वाला कॉपर प्लांट पर्यावरण से जुड़े कई नियमों के उल्लंघन के चलते बंद करा दिया था। उससे पहले प्लांट से पर्यावरण को कथित रूप से हो रहे नुकसान को लेकर स्थानीय लोगों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में 13 की मौत हो गई थी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 15 दिसंबर को प्लांट शुरू करने की इजाजत दी थी, जिसके खिलाफ तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

फ्री ऑक्सीजन के ऑफर वाला प्लांट लोगों के लिए नुकसानदेह रहा है

वेदांता जिस प्लांट में जीवन रक्षक ऑक्सीजन बनाकर मरीजों को फ्री बांटने का ऑफर दे रही है, वह लोगों की सेहत के लिए नुकसानदेह रहा है। मार्च 2013 में यहां हुई सल्फर डाई ऑक्साइड लीक ने हजारों लोगों को प्रभावित किया था। और-तो-और, इस प्लांट की ऑक्सीजन फैसिलिटी 2004 में एनवायरमेंट क्लीयरेंस लिए बिना बनाई गई थी। इसकी पुष्टि सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी के ऑर्डर पर बनाई गई पल्यूशन सेंट्रल बोर्ड कमेटी ने की थी।

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