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  • Investment In SIP Crossed Rs 10,000 Crore For The First Time, A Record 26.8 Lakh New SIP Accounts Were Also Opened

नया मुकाम:SIP में निवेश पहली बार 10 हजार करोड़ रुपए के पार निकला, रिकॉर्ड 26.8 लाख नए SIP खाते भी खुले

नई दिल्ली10 दिन पहले
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बीते महीने म्यूचुअल फंड के सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में पहली बार 10 हजार करोड़ से ज्यादा का शुद्ध निवेश हुआ। इस दौरान रिकॉर्ड 26.8 लाख नए SIP खाते भी खुले। सितंबर में SIP में कुल 10,351.3 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश हुआ। इसके मुकाबले मार्च 2020 में SIP में 8,641 करोड़ रुपए का निवेश आया था। उसी महीने कोरोना महामारी से बचाव के लिए देशव्यापी लॉकडाउन लगाया गया था। तब से अब तक इस मामले में करीब 20% बढ़ोतरी हुई है।

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के सीईओ एनएस वेंकटेश ने कहा, SIP योगदान 10 हजार करोड़ के पार पहुंचना मील का पत्थर है। यह म्यूचुअल फंड में निवेशकों के निरंतर विश्वास को दर्शाता है। खुदरा निवेशक कम रिटर्न वाले पारंपरिक बचत विकल्पों जैसे बैंक एफडी आदि की तुलना में म्यूचुअल फंड को प्राथमिकता दे रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, शेयर बाजारों में तेजी के बीच सितंबर के दौरान इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लगातार सातवें महीने निवेश बढ़ा है।

इस वित्त वर्ष अब तक लगातार बढ़ा SIP निवेश

महीनानिवेश (करोड़ रुपए में)
अप्रैल8,596
मई8,813
जून9,155
जुलाई9,609
अगस्त9,923
सितंबर10,351

इक्विटी और इक्विटी-लिंक्ड स्कीम्स में 8,677.4 करोड़ रुपए का निवेश हुआ
एम्फी की तरफ से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में इक्विटी और इक्विटी-लिंक्ड स्कीम्स में 8,677.4 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश हुआ। अगस्त के दौरान इस श्रेणी के फंड्स में 8,666.7 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश हुआ था। हालांकि यदि पूरी म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री (डेट समेत) की बात करें तो सितंबर में इनसे 47,257.4 करोड़ रुपए की निकासी हुई।

सिर्फ स्मॉल-कैप फंड से निकासी
सितंबर में स्मॉल-कैप को छोड़कर इक्विटी कैटेगरी के अन्य सभी फंड्स में शुद्ध निवेश हुआ। स्मॉल-कैप फंड्स से लगातार दूसरे माह निकासी हुई। इसके उलट सिर्फ 1 माह निकासी के बाद लार्ज-कैप एवं मल्टी-कैप फंड्स में शुद्ध निवेश हुआ है। मिड-कैप फंड्स में 5वें माह शुद्ध निवेश हुआ है।

इक्विटी फंड में निवेश बढ़ने के कारण

  • सितंबर में सेंसेक्स पहली बार 60,000 ऊपर निकला।
  • गोल्ड और डेट जैसे अन्य एसेट क्लास का प्रदर्शन कमजोर।
  • भारत दुनिया के सबसे तेज शेयर बाजारों में शुमार रहा।
  • मार्च 2020 से सेंसेक्स ने दोगुनी से ज्यादा उछाल देखी।