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  • Insurance Company Can Not Refuse Or Delay Claims For COVID 19 Related Hospitalization Even If It Is Not Billed On Standard Rates

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बेफिक्र हो जाइए:अस्पताल में कोविड के इलाज पर क्लेम देने से मना नहीं कर पाएगी बीमा कंपनी, बिल में ऊंचा रेट लगने पर भी उसे करना होगा फटाफट सेटलमेंट

20 दिन पहले
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  • बीमा कंपनियां IRDAI के रेट के हिसाब से क्लेम सेटल करेंगी, तो रिन्यूअल पर प्रीमियम 10-15% तक बढ़ जाएगा
  • 24 घंटे जरूरी हॉस्पिटलाइजेशन वाली पॉलिसी में घर पर इलाज होने पर PPE किट या दवाओं का खर्च नहीं मिलेगा

आप अगर इस बात को लेकिर दुविधा में हैं कि बीमा कंपनी अस्पताल में कोविड के इलाज का खर्च रेगुलर हेल्थ कवर के हिसाब से चुकाएगी या नहीं, तो बेफिक्र हो जाइए। इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने साधारण बीमा कंपनियों को इंडस्ट्री बॉडी जनरल इंश्योरेंस (GI) काउंसिल के मार्फत कहा है कि रिंबर्समेंट या क्लेम न रोका जाए, भले ही अस्पताल स्टैंडर्ड रेट से ज्यादा पेमेंट ले रहे हों।

बीमा फर्मों को अस्पतालों से डील करनी होगी

IRDAI के फर्मान से तो पॉलिसी होल्डर्स चिंतामुक्त हो जाएंगे लेकिन अब बीमा कंपनियों को अस्पतालों से इलाज के रेट और पैकेज डील पर सौदेबाजी करनी होगी। असल में कोविड के इलाज के लिए अस्पतालों में स्टैंडर्ड रेट है, लेकिन मीडिया में ऐसी खबरें आई थीं कि कई जगहों पर ऊंचे रेट चार्ज किए जाने से बीमा कंपनियों और उनके बीच खींचतान मची है।

बढ़ेगा बीमा कंपनियों का क्लेम रेशियो

हेल्थ इंश्योरेंस बायर्स के लिए फायदेमंद इंश्योरेंस रेगुलेटर के फर्मान से बीमा कंपनियों का क्लेम रेशियो बढ़ जाएगा। यानी बीमा कंपनी का लॉस 100 पर्सेंट से ऊपर जाएगा यानी 100 रुपये के प्रीमियम पर उनको क्लेम में 101 रुपये या ज्यादा देना पड़ेगा। ऐसा होने पर हेल्थ पॉलिसी रिन्यूअल के समय बायर को ज्यादा प्रीमियम देना पड़ेगा।

फटाफट क्लेम सेटल करने की जिम्मेदारी

इंश्योरेंस रेगुलेटर के कहने के मुताबिक बीमा कंपनियां काउंसिल के रेफरेंस रेट के हिसाब से क्लेम का सेटलमेंट सकती हैं। उसका कहना है कि क्लेम ज्यादा होने पर भी पॉलिसीहोल्डर को दिक्कत नहीं होनी चाहिए। IRDAI के मुताबिक क्लेम फटाफट सेटल करने की जिम्मेदारी बीमा कंपनियों की होगी। यह पॉलिसी होल्डर्स के लिए फायदेमंद होगा क्योंकि कोविड के इलाज में वायरस इनफेक्शन को फैलने से रोकने पर होने वाले खर्च जोड़े जाने से बड़े बिल आ रहे हैं।

15% तक बढ़ेगा रिन्यूअल प्रीमियम

एक प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनी के अंडरराइटिंग हेड ने कहा, ‘यह पॉलिसीहोल्डर के लिए फायदेमंद होगा, लेकिन हमारे साथ अन्याय होगा, क्योंकि मुसीबत की जड़ अस्पताल हैं। हम IRDAI के हिसाब से पेमेंट कर देंगे, लेकिन अस्पतालों को उनकी कारगुजारियों के लिए दंडित किया जाना चाहिए।’ एक सरकारी इंश्योरेंस फर्म के टॉप एग्जिक्यूटिव प्रेसिडेंट ने कहा कि कंपनी IRDAI के रेट के हिसाब से भुगतान करेगी, लेकिन रिन्यूअल पर प्रीमियम 10-15 पर्सेंट तक बढ़ जाएगा।

PPE कॉस्ट सहित 10,000 रु रोजाना का खर्च

GI काउंसिल के रेट कार्ड के हिसाब से NABH की मान्यता वाले अस्पतालों के लिए 1,200 रुपये की PPE कॉस्ट सहित कुल 10,000 रुपये रोजाना का खर्च तय है जबकि बिना NABH की मान्यता वाले अस्पतालों के लिए 8,000 रुपये रोजाना का रेट है। NABH वाले अस्पतालों के ICU में वेंटिलेटर की जरूरत वाले गंभीर मरीजों के लिए 2,000 रुपये की PPE कॉस्ट सहित 18,000 रुपये रोजाना का खर्च तय है जो NABH से बाहर के अस्पतालों के लिए 15,000 रुपये रोजाना है।

क्लेम के सेटलमेंट में हैं कुछ पेंच

कोविड के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होने पर क्लेम के सेटलमेंट में कुछ पेंच फंसे हैं। जैसे- रूम रेंट फिक्स रहेगा अगर पॉलिसी में ऑप्शन चुना गया है। जिस पॉलिसी में कम से कम 24 घंटे का हॉस्पिटलाइजेशन जरूरी होगा, उसमें कोविड का संक्रमण होने के बाद इलाज घर पर हुआ तो पॉलिसीहोल्डर PPE किट या दवाओं का खर्च क्लेम नहीं कर पाएंगे।

SC जाना चाहती थी GI काउंसिल

यूं तो अस्पतालों में हेल्थ पॉलिसी वालों का खर्च बढ़ाने का गलत चलन अपनाने का आरोप हमेशा से लगता रहा है। लेकिन पिछले साल अप्रैल में अस्पतालों में कोविड के मरीजों का भर्ती होना शुरू होने के बाद भी हालात बदले नहीं हैं। कोविड के इलाज में क्लेम का फुल पेमेंट नहीं हो रहा है, लेकिन अस्पताल बुखार जांचने, PPE किट और साफ-सफाई वगैरह का खर्च जोड़ते जा रहे हैं। ऐसे में तय रेट से ज्यादा वसूली को लेकर अस्पतालों के खिलाफ GI काउंसिल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की योजना बनाई थी, लेकिन इसको आगे नहीं ले जाया गया।

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