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इकोनॉमी में सुधार के संकेत:सितंबर में अप्रैल के मुकाबले जीएसटी कलेक्शन 3 गुना और वाहनों की बिक्री 37% तक बढ़ी, बिजली खपत में भी सुधार

नई दिल्ली8 महीने पहले
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  • इन सुधारों से भारतीय अर्थव्यवस्था में वी (V) शेप की रिकवरी की उम्मीद बढ़ गई है
  • रिकवरी की वजह फेस्टिव सीजन और अनलॉक प्रक्रिया के तहत मिलने वाली रियायतें हैं

लॉकडाउन के छह महीने बाद पहली बार सुधार के संकेत नजर आ रहे हैं। अब जबकि अनलॉक-5 चल रहा है ऐसे में अर्थव्यवस्था करीब-करीब पूरी खुल चुकी है। अप्रैल की तुलना में सितंबर में जीएसटी कलेक्शन, बिजली खपत और ऑटो बिक्री सहित अन्य क्षेत्रों में रिकवरी देखने को मिली है। इंडस्ट्रियल ग्रोथ के चलते फ्यूल की खपत भी बढ़ी है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में वी (V) शेप की रिकवरी की उम्मीद बढ़ गई है। लॉकडाउन के बाद इकोनॉमी में आए सुधार को हम छह उदाहरणों से समझते हैं-

1. जीएसटी ; अप्रैल के मुकाबले सितंबर में कलेक्शन लगभग तीन गुना बढ़ा

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक लॉकडाउन के बाद अप्रैल की तुलना में जीएसटी कलेक्शन सितंबर में 3 गुना ज्यादा रहा। सितंबर में कुल जीएसटी कलेक्शन 95.48 हजार करोड़ रुपए का रहा, जो अगस्त के मुकाबले 10.4% अधिक है। अगस्त में जीएसटी कलेक्शन 86.44 हजार करोड़ रुपए रहा था। ग्रॉस कलेक्शन में केंद्र सरकार का हिस्सा 17.74 हजार करोड़ रुपए रहा। जबकि राज्यों का हिस्सा 23.13 हजार करोड़ रुपए का रहा। वहीं, आईजीएसटी का हिस्सा 47.48 हजार करोड़ रुपए रहा।

जीएसटी में यह बढ़त इसलिए आई है क्योंकि सरकार अनलॉक प्रक्रिया के तहत कई रियायतें दे रही है। इससे आर्थिक गतिविधियां भी रफ्तार पकड़ रही हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय ट्रेड भी शुरू हो गया है। जानकार मानते हैं कि जीएसटी के रेवेन्यू में बढ़त का मतलब बिजनेस ऑपरेशन का आउटलुक अब ठीक हो रहा है।

2. मैन्युफैक्चरिंग; पीएमआई इंडेक्स में ग्रोथ 8 साल के उच्चतम स्तर पर

सितंबर महीने में पीएमआई इंडेक्स 56.8 अंक रहा है, जो अप्रैल के मुकाबले लगभग दोगुना है। यह 8 साल के उच्चतम स्तर पर रहा। इससे पहले जनवरी 2012 में पीएमआई इंडेक्स 56.8 अंक पर था। जबकि पिछले महीने यानी अगस्त, 2020 में यह इंडेक्स में 52 अंक पर था। 25 मार्च से लागू देशव्यापी लॉकडाउन के कारण आर्थिक और कारोबारी गतिविधियां थम गई थीं और अप्रैल में पीएमआई इंडेक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई थी।

अनलॉक में मिल रही रियायतों के चलते फैक्ट्रियों में धीमी रफ्तार से काम शुरु हो चुका है। आईएचएस मार्किट के इकोनॉमिक्स एसोसिएट डायरेक्टर पॉलियाना डी लीमा का कहना है कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री सही दिशा में जा रही है। उन्होंने कहा कि सितंबर में लगातार 6 महीने तक गिरावट के बाद निर्यात के नए ऑर्डर मिलने लगे हैं। इससे निर्यात पटरी पर लौटने लगा है।

3. बिजली खपत; अप्रैल के मुकाबले सितंबर में खपत सुधरी

ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में कुल बिजली खपत 113.54 अरब यूनिट्स रही, जो अप्रैल के मुकाबले सुधरी है। पिछले साल की समान अवधि में यह खपत 107.51 अरब यूनिट्स थी। बिजली खपत में लगातार छह महीनों से गिरावट देखी जा रही थी, जो अब सितंबर में थमी है। अप्रैल और मई में कुल बिजली खपत क्रमश: 85.05 अरब और 103 अरब यूनिट्स रही थी। जबकि सालाना आधार पर बिजली की खपत मार्च, 2020 में 8.7% गिरी थी।

सितंबर में पीक पावर डिमांड भी पिछले साल के मुकाबले ज्यादा रही। पीक पावर डिमांड 1.8% बढ़कर 176.56 गीगावाट तक पहुंच गई, जो सितंबर 2019 में 173.45 गीगावाट थी। एक दिन के सर्वाधिक पावर सप्लाई को पीक पावर डिमांड मेट कहा जाता है। बिजली की खपत में बढ़ोतरी होने का मतलब यह है कि कोरोनावायरस महामारी के बीच अब औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों में फिर से तेजी आई है।

4. ऑयल एंड गैस सेक्टर; फ्यूल की डिमांड में बढ़ोतरी

पेट्रोल की बिक्री सितंबर माह में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 2.5% अधिक रही है। मासिक आधार पर भी अगस्त के मुकाबले सितंबर में बिक्री 10.5% बढ़ी है। सितंबर में 22 लाख टन पेट्रोल बिका। इसके अलावा डीजल की बिक्री भी अगस्त 2020 के मुकाबले यह 22% ज्यादा रही। अगस्त में डीजल 48.4 लाख टन बिका। जबकि सालाना आधार पर डीजल की बिक्री 7% गिरी है।

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के डायरेक्टर (मार्केटिंग) अरुण कुमार सिंह कहते हैं कि निजी वाहनों का उपयोग बढ़ने से पेट्रोल की बिक्री बढ़ रही है। जबकि डीजल की बिक्री इसलिए कम हुई है, क्योंकि लॉकडाउन के कारण स्कूल बस और सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल काफी कम हुआ है। सितंबर में जेट फ्यूल और रसोई गैस एलपीजी की बिक्री भी अगस्त के मुकाबले क्रमश: 22.5% और 3.5% बढ़ी है।

5. रेलवे माल ढुलाई ; सितंबर में रेवेन्यू 13% बढ़ा

सालाना आधार पर सितंबर में रेलवे को माल ढुलाई से होने वाली कमाई 13.5% बढ़ी है, जबकि अप्रैल में यह 43.7% नीचे रही थी। हालांकि, इस साल की पहली छमाही में माल ढुलाई का वॉल्यूम 9% कम हुआ है, यह सितंबर में 533 मिलियन टन रहा। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में माल ढुलाई से होने वाली कमाई भी 17% कम हुई है। यह 50.16 हजार करोड़ रुपए रही।

सालाना आधार पर अप्रैल-जून की तिमाही में लॉकडाउन के कारण माल ढुलाई में 21% की गिरावट रही यानी टोटल वॉल्यूम 241 मिलियन टन था। अप्रैल-जून के दौरान रेलवे माल ढुलाई से होने वाली कमाई 31% नीचे गिरकर 22.26 हजार करोड़ रुपए के स्तर पर आ गई थी।

सालाना आधार पर माल ढुलाई सितंबर में 15% अधिक रही। इसका वॉल्यूम करीब 102 मिलियन टन रहा। पिछले साल के मुकाबले माल ढुलाई ऑपरेशन से रेवेन्यू भी 13.61% बढ़कर 9.9 हजार करोड़ रुपए हो गया है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और मुख्य अधिकारी वी के यादव कहते हैं कि रेलवे माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य 2024 तक 2024 मिलियन टन और 2030 तक 32,00 मिलियन टन तक माल ढुलाई का है।

6. ऑटो बिक्री ; सितंबर में बिक्री के आंकड़ों में 37% तक की बढ़त

देशव्यापी लॉकडाउन के बाद लगभग हर महीने ऑटो बिक्री के आंकड़े बेहतर हुए हैं। सालाना आधार पर सितंबर में टाटा मोटर्स की ऑटो बिक्री 37% बढ़ी है। इसके अलावा मारुति सुजुकी की बिक्री 30%, बजाज ऑटो की बिक्री 10% और हुंडई इंडिया की बिक्री भी 23.6% बढ़ी है। देश की जीडीपी में ऑटो सेक्टर की भागीदारी 7% की है।

कोरोना के बीच सितंबर में आए इन आंकड़ों से आर्थिक मोर्चे पर राहत मिलती दिख रही है। जानकारों के मुताबिक कई सेक्टर्स में दिख रही रिकवरी की वजह फेस्टिव सीजन और अनलॉक प्रक्रिया के तहत मिलने वाली रियायतें है। अनलॉक के तहत फैक्ट्रियों में कामकाज रफ्तार पकड़ रही है। सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था के लिए फेस्टिव सीजन अहम रहने वाली है। ई-कॉमर्स कंपनियों, बैंकों सहित कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी अच्छी ग्रोथ का अनुमान है।

नौकरी की संभावना

आने वाले फेस्टिव सीजन के कारण इकोनॉमी में ग्रोथ नजर आ रही है। इंडस्ट्रियल और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी लॉकडाउन के बाद पहली बार अच्छे संकेत नजर आ रहे हैं। इससे संगठित और असंगठित सेक्टर में नौकरियां बढ़ सकती हैं। हाल ही में सीएमआईई ने देश की बेरोजगारी पर आंकड़े जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि सितंबर में देश की बेरोजगारी दर 6.67% है, जो अगस्त के मुकाबले कम हुई है।

अगस्त में बेरोजगारी की दर 8.35% रही थी। सितंबर में बेरोजगारी की यह दर पिछले 18 महीने के निचले स्तर पर है। इसके अलावा शहरी और ग्रामीण बेरोजगारी दर भी घटी है। सितंबर में जॉब लॉस की दर भी घटी है। इसके अलावा ई-कॉमर्स कंपनियों ने भी अक्टूबर-नवंबर में 3 लाख से ज्यादा नौकरियां पेश करने वाली है।

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