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महंगाई ने बदला ट्रेंड /भारतीयों के पास पड़ा है 112 लाख करोड़ रुपए का सोना, इसे गिरवी रखकर लोन देने के लिए बैंकों में मची होड़

केपीएमजी का अनुमान है कि मार्च 2022 तक भारत की गोल्ड लोन इंडस्ट्री 4.6 लाख करोड़ रुपए की हो सकती है। केपीएमजी का अनुमान है कि मार्च 2022 तक भारत की गोल्ड लोन इंडस्ट्री 4.6 लाख करोड़ रुपए की हो सकती है।

  • 24 घंटे गोल्ड लोन दे रहा है मणप्पुरम फाइनेंस, एचडीएफसी ने शाखाओं की संख्या बढ़ाई
  • साहूकारों के मुकाबले कम ब्याज दर पर गोल्ड लोन देते हैं बैंक, समय की होती है बचत

मनी भास्कर

Jul 30,2020 06:49:04 PM IST

नई दिल्ली. भारतीय परिवारों के पास दुनिया का सबसे बड़ा सोने का निजी ढेर है। कोरोनावायरस महामारी के कारण अर्थव्यवस्थाओं में आई गिरावट से सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं। अब इसका फायदा उठाने के लिए बैंकों में सोने को गिरवी रखकर लोन देने की होड़ मची है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुमान के मुताबिक, भारतीयों के पास 1.5 ट्रिलियन डॉलर करीब 112 लाख करोड़ रुपए का सोना ज्वैलरी के रूप में पड़ा है।

कम हो सकती हैं ब्याज दरें

बैंकों की इस प्रतिस्पर्धा से ग्राहकों को फायदा हो सकता है और ब्याज दरों में कमी हो सकती है। इससे ग्राहकों को अनौपचारिक कर्जदाताओं को सोना गिरवी रखकर लिए जाने वाले लोन के लिए ज्यादा ब्याज नहीं देनी पड़ेगी। एचडीएफसी बैंक लिमिटेड और फेडरल बैंक लिमिटेड जैसे कर्जदाताओं ने कीमती धातु के लोन पोर्टफोलियो का विस्तार किया है। लोन गिरवी रखकर कर्ज देने वाली फर्म मुथूट फाइनेंस लिमिटेड और मणप्पुरम फाइनेंस लिमिटेड ने अपने ग्राहकों के लिए कर्ज को आसान बनाया है।

24 घंटे घर बैठे लोन दे रहा है मणप्पुरम

कोरोनावायरस के कारण लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में मणप्पुरम अपने बैंक नेटवर्क के जरिए ग्राहकों को 24 घंटे घर बैठे लोन उपलब्ध रहा है। ग्राहकों की मांग के अनुसार लोन देने के लिए मणप्पुरम का स्टाफ और व्हीकल 24 घंटे तैयार रहते हैं। वहीं, एचडीएफसी बैंक ने ग्रामीण क्षेत्र में गोल्ड लोन देने वाली शाखाओं की संख्या में बढ़ोतरी की है।

ज्वैलरी के रूप में पड़ा है सोना

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, भारतीयों के पास पड़ा अधिकांश सोना ज्वैलरी के रूप है। इसमें से बड़ी मात्रा में ऐसी ज्वैलरी है जो शादी के समय गिफ्ट के रूप में दी जाती है। भारत में सोने को विशेष अवसरों पर पहना जाता है। यह विवाह के समय महिलाओं को दिए जाने वाले दहेज में बड़ी हिस्सेदारी रखता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड की कीमत 2000 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई है। इस कारण ग्राहकों को गोल्ड लोन पर ज्यादा पैसा मिल रहा है। इससे लोन लेने वालों की संख्या भी बढ़ी है।

65% गोल्ड लोन इंडस्ट्री पर अनौपचारिक क्षेत्र का कब्जा

कंसलटेंसी फर्म केपीएमजी के अनुमान के मुताबिक, भारत की कुल गोल्ड लोन इंडस्ट्री में से 65 फीसदी पर अनौपचारिक क्षेत्र के कर्जदाताओं का कब्जा है। इनका ब्याज दर 25 से 50 फीसदी तक होता है। भारत के कुछ हिस्सों, खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में साहूकारों के पास गिरवी रखने के लिए महिलाओं के गहनों को आखिरी विकल्प के तौर पर देखा जाता है। हालांकि, अब यह विकल्प खत्म होता दिख रहा है।

खत्म हो रहा साहूकारों का दबदबा

कॉमट्रेंड्ज रिस्क मैनेजमेंट सर्विसेज के डायरेक्टर गनानाशेकर थिगाराजन का कहना है कि देश की प्रत्येक गली में साहूकारों की दुकानें हैं। इनमें से अधिकांश भारी मार्जिन पर काम करते हैं। हालांकि, गोल्ड लोन कंपनियों के प्रोफेशनल सेटअप की वजह से इन साहूकारों का दबदबा खत्म हो रहा है। पारदर्शिता और फेयर प्राइसिंग की वजह से अब लोग साहूकारों से दूर होकर कंपनियों के पास जा रहे हैं।

गोल्ड लोन इंडस्ट्री में बैंकों की लंबे समय से उपस्थिति

वैसे तो गोल्ड लोन इंडस्ट्री में बैंकों की लंबे समय से उपस्थिति बनी हुई है, लेकिन अन्य स्रोतों से कमाई खत्म होने के कारण अब बैंक इसे प्रमुख रास्ता बनाने का प्रयास कर रहे हैं। बैंक अब गोवा के पॉल फर्नांडीज की तरह ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचना चाहते हैं। फर्नांडीज ने अपने बच्चे की शिक्षा को फीस जुटाने के लिए एक स्थानीय बैंक में पत्नी के सोने के गहने गिरवी रखे हैं। फर्नांडीज एक क्रूज शिप में हेड वेटर का काम करते हैं और उन्हें पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है।

एक घंटे में मिल गया गोल्ड लोन: फर्नांडीज

गोल्ड लोन लेने वाले बैंक का नाम ना बताते हुए फर्नांडीज ने कहा कि उन्हें मात्र 8.5 फीसदी ब्याज दर देना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कम ब्याज दर और सुरक्षा को देखते हुए साहूकार के बजाए बैंक का चुनाव किया। लोन प्रोसेसिंग के लिए फर्नांडीज से केवल एक राष्ट्रीय पहचान पत्र और निवास का प्रमाण मांगा गया। इसके बाद केवल एक घंटे में गोल्ड लोन मिल गया। गोल्ड लोन उपभोक्ताओं को उसकी कीमत की 75 फीसदी तक राशि मिल जाती है। इसके लिए बैंक 7 से 15 फीसदी की ब्याज दर लेते हैं जबकि मणप्पुरम और मुथूट 12 से 29 फीसदी तक की ब्याज दर वसूलते हैं।

दो साल में गोल्ड लोन इंडस्ट्री में 34% ग्रोथ का अनुमान

केपीएमजी का अनुमान है कि गोल्ड लोन में लगने वाले कम समय और डिफॉल्ट के समय आसानी से बिक्री के कारण भारत की गोल्ड लोन इंडस्ट्री में अगले दो साल में 34 फीसदी तक का ग्रोथ हो सकता है। मार्च 2022 तक भारत की गोल्ड लोन इंडस्ट्री 4.6 लाख करोड़ रुपए की हो सकती है। वहीं, एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की भारतीय इकाई का कहना है कि लॉकडाउन के कारण कारोबार बंद रहे हैं और लाखों लोगों को नौकरी गंवानी पड़ी है। इसको देखते हुए बैंक लोन में 31 मार्च 2021 से पहले ग्रोथ की उम्मीद नहीं है। ऐसे में गोल्ड लोन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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केपीएमजी का अनुमान है कि मार्च 2022 तक भारत की गोल्ड लोन इंडस्ट्री 4.6 लाख करोड़ रुपए की हो सकती है।केपीएमजी का अनुमान है कि मार्च 2022 तक भारत की गोल्ड लोन इंडस्ट्री 4.6 लाख करोड़ रुपए की हो सकती है।

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