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  • India Omicron Third Wave; Industries May Hit By Manpower Shortage

कोरोना का असर:कर्मचारियों की कमी जल्द ही बन सकती है चुनौती, 21 सेक्टर्स में दिखेगा असर

मुंबई13 दिन पहले
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कोरोना की तीसरी लहर के बीच देश में काम करने वालों की कमी की चुनौती सामने आ सकती है। 21 सेक्टर्स में किए गए सर्वे में इस तरह की जानकारी सामने आई है।

ब्लू-कॉलर वर्क फोर्स की हो सकती है कमी

जॉब मार्केट के विशेषज्ञों कहना है कि ब्लू-कॉलर वर्कफोर्स की कमी जल्द ही विभिन्न क्षेत्रों के लिए एक चुनौती बन सकती है। पहले से ही कोरोना के मामलों में तेजी से वृद्धि और राज्यों में लगाए गए प्रतिबंधों के बीच इंडस्ट्री को कर्मचारियों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। स्टाफिंग रिसोर्स फर्म टीमलीज सर्विसेज के एक सर्वेक्षण के अनुसार, 21 सेक्टर्स में 850 कंपनियों में से लगभग आधी ने कहा कि उनकी अगले तीन महीनों में ब्लू-कॉलर मैनपावर को हायर करने की योजना है।

कई सेक्टर कर्मचारियों की कमी से गुजर रहे हैं

हालांकि, कई सेक्टर्स जिसमें विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन, रियल एस्टेट, हेल्थकेयर और फार्मास्युटिकल सेक्टर को लेबर की कमी के दौर से गुजरना पड़ रहा है। टीमलीज और इंडस्ट्री के अनुमानों के अनुसार, उद्योगों में लेबर की वर्तमान कमी 15 से 25% तक है। अगले कुछ महीने में यह अंतर और बढ़ सकता है, क्योंकि कोविड की ताजा लहर देश में फैल गई है।

कामगार जुटाना एक चुनौती भरा काम

टीमलीज सर्विसेज के असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट अमित वडेरा ने कहा कि आने वाले महीने में लेबर को जुटाना एक चुनौती भरा काम हो सकता है। प्रवासी मजदूर अपने घरों को लौटने के लिए पहले से ही तैयार बैठे हैं। इससे मौजूदा समय में कामगारों की कमी हो रही है। बड़े-बड़े शहरों में जिस तेजी से संक्रमण फैल रहा है उससे यह संकट और गहरा हो सकता है।

प्रतिबंधों के कारण मामला बिगड़ सकता है

वडेरा ने कहा कि यहां तक कि फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG), ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर जहां लेबर की सप्लाई डिमांड की तुलना में मामूली अधिक है, वहां संक्रमण की संख्या बढ़ने और अंतरराज्यीय प्रतिबंधों के कारण मामला बिगड़ सकता है। हालांकि कंपनी के कुछ शीर्ष अधिकारी और अर्थशास्त्री अब भी आशावादी बने हुए हैं।

उनका कहना है कि सभी लोग और सरकारें इस बार पिछली दो लहरों की तुलना में बेहतर तरीके से तैयार हैं और कई मौजूदा मैनपावर को बनाए रखने के लिए कई उपाय अपना रहे हैं।

बेहतर तरीके से तैयार हो रही हैं कंपनियां

महिंद्रा ग्रुप के मुख्य अर्थशास्त्री सच्चिदानंद शुक्ला ने कहा कि हम इस बार सरकार, व्यवसायों और व्यक्तियों के रूप में बेहतर तरीके से तैयार और सक्षम हैं। लेकिन अर्थव्यवस्था और आबादी के विशाल आकार को देखते हुए, हजारों सेक्टर्स- विशेष रूप से इनफ़ॉर्मल सेक्टर में, अभी भी कुछ समय के लिए इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। इसके अलावा, शहरों में जिस तरह का सपोर्ट और नौकरियां उपलब्ध है वह गांवों में नहीं है और इसके चलते मजदूरों को शहरों में फिर से लौटना ही होगा।

कई कंपनियां बना रही हैं उपाय

शुक्ला ने कहा कि हमने अपने ग्रुप में भी देखा है कि स्थानीय रूप से उपलब्ध विकल्प (मजदूर) ज्यादा लंबे समय तक कारगर साबित नहीं होते हैं। थर्मेक्स, JSW स्टील और फोर्ब्स मार्शल सहित कई कंपनियां लेबर को बनाए रखने के लिए मजदूरी, स्वास्थ्य कवरेज और रोजगार बीमा के अलावा अटेंडेंस अलाउंस (रोज आने के लिए सैलरी के अतिरिक्त दिया जाने वाला एक्स्ट्रा नकद), मोबिलाइजेशन कॉस्ट, मजदूरी को उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहनों से जोड़ने जैसी नई स्कीम शुरू कर रही हैं।

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